गंगा के लिए सविनय अवज्ञा की मुहिम

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गंगा नदी का बिना सोचे समझे अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। कई बिजली परियोजनाएं गंगा की अविरलता को पवित्राता को ताक पर रखकर चलाई जा रही हैं। गंगा के विरुध्द चल रही समस्त गतिविधियों को रोकने के लिए देश भर में प्रयास किये जा रहे हैं। इसी कड़ी के तहत गंगा के मौलिक रूप की मांग को लेकर ‘गंगा रक्षा आंदोलन’ ने दिनांक 20 जून, 2010 को सायं 5 बजे वाराणसी के अस्सी घाट पर ‘सविनय अवज्ञा’ की मुहिम चलाने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में गंगा से बालू निकालकर प्रतीकरूप से उस स्थानीय कानून को तोड़ा गया, जिसमें कछुआ सेंचुरी के तहत गंगा से बालू उत्खनन पर रोक है। यह मुहिम काशी सुमेरुपीठ के शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती और 700 दिनों से अनाशनरत मणिकर्ण्का के बाबा नागनाथ योगेश्वर के नेतृत्व में चलेगी।

इस अवसर पर उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि पर्यावरणविद्, वैज्ञानिक ,अर्थशास्त्री, साधु-संत और विद्वान शामिल हैं इन्होंने गंगा पर चल रही परियोजनाओं को घाटे का सौदा साबित किया। इतना ही नहीं, सुंदरलाल बहुगुणा, प्रो. अग्रवाल जैसे वयोवृध्द विद्वानों ने लंबे अनशन झेले। वाराणसी के बाबा नागनाथ 700 दिनों से आज भी अनशन पर बैठे हैं। इन्होंने सरकार को तमाम विकल्प सुझाए और यथास्थिति रहने देने की मांग की। आश्चर्य है कि इसके बावजूद सरकार की तरफ से कोई ऐसा कदम नहीं उठाया गया, जिससे संतोष हो। उल्टे गंगा अपना मौलिक रूप छोड़ती जा रही है।

इस अभियान के संयोजन की जिम्मेदारी युवा समाजसेवी कपीन्द्र तिवारी उठाएंगे। उनके साथ वाराणसी के समर्पित युवाओं की टीम काम करेगी।

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