ग्रीन मार्केटिंग वक्त की जरूरत
वर्तमान व्यापारिक जगत में, मार्केटिंग के क्षेत्र में पर्यावरण पर आधारित मुद्दों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। उत्पादों व सेवाओं का, उनके पर्यावरणीय लाभों के आधार पर विक्रय करने की प्रक्रिया को 'ग्रीन मार्केटिंग' कहा जाता है। इसके अंतर्गत वे सभी क्रय/विक्रय आते हैं जिनके द्वारा मानव की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके और साथ ही पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुंचे। ऎसा उत्पाद या तो स्वयं पर्यावरण मित्र हो अथवा इस प्रकार से पैक किया गया हो कि पर्यावरण को क्षति न पहुंचे। 'अमेरिकन मार्केटिंग एसोसिएशन' के अनुसार ग्रीन मार्केटिंग ऎसे उत्पादों का क्रय-विक्रय है जो पर्यावरणीय आधार पर सुरक्षित हों। दूसरे शब्दों में ग्रीन मार्केटिंग में वे सभी क्रियाएं सम्मिलित हैं जिनके माध्यम से उत्पाद में, उसकी उत्पादन प्रक्रिया व पैकेजिंग में और साथ ही विज्ञापन में नैसर्गिक व सुरक्षित परिवर्तन किए जाएं। ग्रीन मार्केटिंग को एन्वायर्न मार्केटिंग या ईकोलॉजिकल मार्केटिंग भी कहा जाता है।
ग्रीन मार्केटिंग की आवश्यकता :
हम सभी समाज का एक अंग हैं। हम जो भी निर्मित करते हैं, समाज की सहायता से व समाज के उपभोग के लिए ही करते हैं। समाज, पर्यावरण व अर्थ आपस में संबंधित और आश्रित हैं। जब हम अपनी आर्थिक नीतियों के पर्यावरणीय प्रभाव पर ध्यान देते हैं तो हम यह सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं कि हमारा समाज स्वस्थ व रहने योग्य हो। साथ ही, मनुष्य को अपनी असीम आवश्यकताओं की प्रतिपूर्ति हेतु अति सीमित प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं। अंतत: ग्रीन मार्केटिंग यह सुनिश्चित करता है कि किस भांति मार्केटिंग से संबंधित क्रियाकलापों में इन सीमित प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाए जिससे एक ओर तो उपभोक्ता की जरूरतों की पूर्ति हो सके व दूसरी ओर उत्पादक संस्थान के उद्देश्यों को भी प्राप्त किया जा सके। आखिरकार ये संस्थान भी तो समाज का ही अंग हैं, अत: उन्हें भी पर्यावरण के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वाहन करना ही होगा।
ये करें : ग्रीन मार्केटिंग ऎसा विक्रय कौशल है जिसका यदि उचित उपयोग किया जाए तो अधिक ग्राहक व धन प्राप्त किया जा सकता है। पर्यावरण मित्र बनने के लिए जरूरी नहीं कि अपने आप को बड़े कामों में उलझाएं, वरन छोटे-छोटे योगदानों से भी चमत्कार संभव है। जैसे-
-जरूरत न हो तो विद्युत, आणविक, इलेक्ट्रॉनिक यंत्र स्टैंड बाय मोड में न रखें और बंद कर दें।
-दस्तावेजों की अकारण अतिरिक्त प्रतियां न छापें व कागज तथा परोक्ष रूप से वनस्पति बचाएं।
-दस्तावेज कागज के दोनों ओर छापें।
-उपयोगोपरांत नल बंद कर जल बचाएं, फ्लश की टंकी में पानी से भरी एक बोतल रखें व जल संरक्षण करें।
-पुन: उपयोग योग्य पैकिंग मटेरियल का उपयोग करें।
- उपयोगोपरांत पंखे, बल्ब, ट्यूब आदि बंद कर बिजली बचाएं। सीएफएल व पांच सितारा विद्युत उपकरण वापरें।
-वाहनों में बायो फ्यूल का उपयोग करें। छोटी दूरियां ग्रीन ट्रान्सपोर्ट अर्थात साइकिल से तय करें।
-बायो फूड अर्थात शाकाहारी भोजन करें।
-सौर ऊर्जा का उपयोग करें।
-पर्यावरण-मित्र साबुन आदि का उपयोग करें।
-लोगों को पर्यावरण मित्र बनने की शिक्षा दें।
-रेन वाटर हार्वेस्टिंग, ऊर्जा व जल संचय की तकनीकों का उपयोग करते हुए भवन निर्माण करें।
-ग्रीन कैम्पेन में सहयोग कर ग्रीन मार्केटिंग अपनाएं?
वैसे ग्रीन मार्केटिंग की परिकल्पना को साकार करना मुख्यत: उद्योग व उद्योगपति का उत्तरदायित्व है, तथापि इस क्रांति को लागू करवाना शासन के लिए अत्यावश्यक है।
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