यमुना को नदी बनाने का एक और सरकारी अभियान अगस्त से

यमुना को नदी बनाने का एक और सरकारी अभियान अगस्त से

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नई दिल्ली। दिल्ली का मैला ढो-ढो कर गंदे नाले में तब्दील हो चुकी यमुना नदी की सफाई का सरकारी अभियान आगामी अगस्त महीने से शुरू हो जाने की उम्मीद है। योजना आयोग ने भी नदी की दुर्दशा की ओर दिल्ली सरकार का ध्यान दिलाते हुए सफाई सुनिश्चित करने की नसीहत दी है।

दिल्ली जल बोर्ड ने यमुना की सफाई करने के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के साथ मिलकर इंटरसेप्टर सीवर बिछाने की योजना बनाई है। इसके तहत दिल्ली के प्रमुख नालों के समानांतर पाइप लाइन बिछाई जाएगी। नालों के गंदे पानी को इन पाइपों के माध्यम से सीवर की सफाई करने वाले संयत्रों में ले जाया जाएगा और साफ कर नाले में डाला जाएगा ताकि स्वच्छ पानी यमुना में गिरे। इस योजना पर करीब 1800 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश नेगी ने बताया कि इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के माध्यम से अमल में लाई जा रही इस योजना के लिए विभिन्न कंपनियों से टेंडर मंगाए गए थे। ये टेंडर इसी महीने खुलने वाले हैं। उन्होंने बताया कि इंटरसेप्टर सीवर लाइन बिछाने वाली कंपनी के चुनाव की पूरी प्रक्रिया में करीब दो-तीन महीने का वक्त लगेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगस्त महीने से यह काम शुरू हो जाएगा।

दिल्ली के तीन प्रमुख नाले नजफगढ़, शाहदरा तथा सप्लीमेंट्री के माध्यम से सर्वाधिक गंदा पानी यमुना में गिरता है। ये तीन वे नाले हैं जिनके माध्यम से शहर के बाकी छोटे-छोटे नालों का पानी नदी में गिरता है। वैसे यमुना को गंदा करने वाले दिल्ली के नालों की कुल संख्या 18 है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अब तक यमुना की सफाई के नाम पर करीब दो हजार करोड़ रुपए पहले ही खर्च किए जा चुके हैं। लेकिन इतना सारा पैसा खर्च हो जाने के बावजूद यमुना की वर्तमान हालत चिंताजनक है। नदी का पानी इस कदर गंदा है कि पशु-पक्षी भी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते।

दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री नेगी ने कहा कि यमुना की सफाई के काम में तीन से चार साल तक लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि इंटरसेप्टर सीवर लाइन बिछाने से लेकर उसको पूरी क्षमता से इस्तेमाल करने में वक्त तो लगेगा ही। हाल ही में केन्द्रीय वन व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने भी यमुना का मुआयना किया था। उन्होंने भी कहा था कि नदी को साफ होने में कम से कम चार साल का समय लग सकता है।

इसी सप्ताह मुख्यमंत्री जब अपने वरिष्ठ अधिकारियों से योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया व अन्य सदस्यों-अधिकारियों से दिल्ली की वार्षिक योजना तय करने के सिलसिले में मिली, तो वहां भी यमुना की चर्चा छिड़ी और आयोग की ओर से नसीहत दी गई कि दिल्ली सरकार इसकी सफाई के लिए जल्दी कदम उठाए।

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