दामोदर नदी ही नहीं संस्कृति व आजीविका
दामोदर नदी

दामोदर पर सेमिनार

धनबाद : दामोदर की संस्कृति व आजीविका के सवाल पर गांधी सेवा सदन में दामोदर आजीविका बचाओ आंदोलन, बोकारो की ओर से सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार में नदी किनारे बसे 80 गांवों के 180 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अध्यक्षमंडली में शामिल खोरठा साहित्यकार शिव नाथ प्रमाणिक, शांति भारत, रामचंद्र रवानी व जीवन जगन्नाथ ने मोमबत्ती जलाकर सेमिनार का उद्घाटन किया। सेमिनार में श्री प्रमाणिक ने कहा कि दामोदर सिर्फ एक नदी ही नहीं बल्कि हमारी संस्कृति व आजीविका का प्रमुख आधार है। दामोदर से हमारा जन्म मरण का रिश्ता है। इसीलिए दामोदर को बचाने के लिए सभी लोगों को एक साथ मिल कर आवाज बुंलद करने की जरूरत है।

रामचंद्र रवानी ने कहा कि दामोदर के मुद्दे को सशक्त तरीके से उठाने के लिए समाज के सभी वर्ग के लोगों को लगातार चिंतन-मनन व संघर्ष की जरूरत है। शांति भरत ने कहा कि दामोदर अगर मर गया तो हम सांस्कृतिक रूप से टूअर हो जायेंगे। इसीलिए हर हाल में दामोदर को बचाना है। इसके पूर्व जीवन जगन्नाथ ने सेमिनार का विषय प्रवेश कराया।

सेमिनार में जनार्दन प्रसाद, नईम अंसारी, राजेश अशोक , किशुन ठाकुर, कृष्ण कुमार महतो, अब्दुल गफूर, कृष्णा सिंह, फाख अंसारी, मुन्ना खान, धीरेन रवानी, जैबुन निशा, मंटू महतो, लक्ष्मण महतो, आलोक देवी, महेश प्रसाद गुप्ता, सुजीत बनर्जी समेत दर्जनों वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन शेखर शरदेंदू ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन जर्नादन प्रसाद ने किया।
 

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