गोमती में न गिरे गंदा पानी
23 Apr 2015

शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय में गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के कार्यो की समीक्षा करते हुए आलोक रंजन ने निर्देश दिए कि गोमती के दोनों तटबन्धों पर डायफ्राम वाल 106.00 लेवल का कार्य सिंचाई विभाग द्वारा जल्द कराएं।

राजधानी लखनऊ की जीवनदायिनी गोमती नदी को निर्मल रखने के लिए केन्द्र के साथ ही प्रदेश सरकार ने भी युद्धस्तर पर कार्य आरम्भ कर दिए हैं। इसी कड़ी में मुख्य सचिव आलोक रंजन ने गोमती नदी में शहर के नालों का पानी न गिरने देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने कहा है कि भरवारा एसटीपी को तीन माह में शुरू कर दें, ताकि गन्दे नालों से होनेवाले प्रदूषण को खत्म किया जा सके। उन्होंने कहा कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के बचे कार्यों को जल्द पूरा कराकर 15 मई तक इसे आरम्भ कर दें। मुख्य सचिव ने शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा एकत्र कराने की जिम्मेदारी सचिव, नगर विकास को सौंपी।

शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय में गोमती रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के कार्यो की समीक्षा करते हुए आलोक रंजन ने निर्देश दिए कि गोमती के दोनों तटबन्धों पर डायफ्राम वाल 106.00 लेवल का कार्य सिंचाई विभाग द्वारा जल्द कराएं। डायफ्राम वाल एवं बन्धों के मध्य भाग में सौन्दर्यीकरण सम्बन्धी कार्य कराएं, जिससे पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। जल निगम नालों के सामान्य डिस्चार्ज को डायवर्ट कर सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लांट तक ले जाए। गोमती कार्ययोजना के प्रथम एवं द्वितीय चरण के अन्तर्गत कुल 26 नाले पाए गए। जल निगम द्वारा बताया गया कि चार नालों को डायवर्ट कर दौलतगंज सीवेज ट्रीटमेन्ट प्लांट क्षमता 56 एमएलडी एवं 22 नालों के डिस्चार्ज को डायवर्ट कर भरवारा एसटीपी क्षमता 345 एमएलडी के माध्यम से इनका शोधन किया जाता है। शहर की आबादी बढ़ने एवं सीमा विस्तार के कारण सात नए नाले सृजित हो गए हैं। इनका डिस्चार्ज गोमती नदी में प्रवाहित हो रहा है। इसी प्रकार, पुराने नालों के डिस्चार्ज में भी अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। नए नालों के डायवर्जन, पुराने पम्पिंग प्लांटों के सुदृढ़ीकरण एवं बढ़े हुए डिस्चार्ज के शोधन के लिए दौलतगंज एसटीपी की क्षमता में बढ़ोतरी करना आवश्यक है।

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