जल संकट दूर कर प्रेरणा बने कर्नाटक के गांव

water crisis
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कभी सोना उगलने वाली धरती कहलाने वाले कर्नाटक के कोलार जिले में एक छोटा-सा गांव चुलुवनाहल्ली। वहां न तो कोई प्रयोगशाला है, न ही कोई प्रशिक्षण संस्थान, फिर भी यहां देश के कई राज्यों के अफसर जल विशेषज्ञ, स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग सीखने आ रहे हैं।

1. सन् 1930 में ‘केरे पुस्तक’ यानी तालाब की किताब में तालाब की साफ-सफाई के लिए स्पष्ट नियम-कायदे दिए गए हैं। कर्नाटक के ये गांव देश के अन्य हिस्सों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
2. 72,500 किलो गाद निकानी गई। डोड्डामरली हल्ली तालाब से। इसकी सफाई 80 सालों से नहीं हुई थी। 20 गांवों में पानी की जरूरत पूरी करता है डोड्डामरली हल्ली तालाब। ऊंचे पहाड़ों व चट्टानों के बीच बसे कर्नाटक के चुलुवनाहल्ली गांव के बीते दस साल बेदह त्रासदीपूर्ण रहे। गांव के एकमात्र तालाब की तलहटी में दरारें पड़ गईं, जिससे बारिश का पानी टिकता नहीं था। तालाब सूखा तो सभी कुए, हैंडपंप व ट्यूबवेल भी सूख गए। साल के सात-आठ महीने तो सारा गांव महज पानी जुटाने में खर्च करता था। ऐसे में खेती-किसानी चौपट हो गई। ऐसे में गांव के एक स्व-सहायता समूह ‘गर्जन’ ने इस त्रासदी से लोगों को उबरने का जिम्मा उठाया।

लोगों को समझाया कि भूजल रिचार्ज कर गांव को जल समस्या से मुक्त किया जा सकता है। श्री गंगाम्बिका तालाब विकास समिति बनाकर झील की सफाई, गहरीकरण व मरम्मत की पूरी योजना गांव वालों ने बनाई। इस पर 9.58 लाख रुपए के संभावित व्यय का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेज दिया गया। बजट को मंजूरी मिली तो गांव वाले तालाब को नया रूप देने के लिए एकजुट हो गए।

दिन-रात काम हुआ। दो चेकडैम और तीन बोल्डर डैम भी बने, नहर की खुदाई, पानी के बहाव पर नियंत्रण के लिए रेगुलेटर लगाया गया। गांव के स्कूल और मंदिर के आसपास के गहरे गड्ढों को भी भर दिया गया। इतना सब होने के बाद सरकार से मिले पैसों में से 60 हजार रुपए बच गए। अब गांव के भूजल स्रोतों में पर्याप्त पानी है।

यहीं तुमकुर जिले के चिकबल्लापुर के पास 81 एकड़ में फैले डोड्डामरली हल्ली तालाब की सफाई के लिए सिंचाई विभाग ने 55 लाख रुपए की योजना बनाई थी। गांव वालों ने तय किया कि सफाई का जिम्मा सरकार का होगा और निकली गाद की ढुलाई किसान मुफ्त में करेंगे। इस तरह परियोजना की कीमत घटकर 12 लाख रह गई। दूसरी तरफ किसानों को थोड़े से श्रम के बदले बेशकीमती खाद निःशुल्क मिल गई।

1997 में तुमकुर जिले का नागरकेरे ताल पूरी तरह सूख गया। हर सुबह पौने छह बजे से पौने आठ बजे तक यहां लोग आते व तालाब की गंदगी साफ करते। स्कूली बच्चों ने भी इसमें मदद की और तालाब की काया पलट कर दी। इसी जिले के चिक्केनयाकनहल्ली ब्लॉक और कांधीगेरे गांव ने भी हीरेकेरे और नौन्नावीनाकेरे नामक दो तालाबों की स्थिति में बदलाव आया है।

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