नैनी झील के लिये एक्शन मोड की जरूरत

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नैनी झील पुनर्जीवीकरण को लेकर आयोजित सेमीनार में राज्यपाल डॉ. केके पाल ने कही दो टूक

जागरण संवाददाता, देहरादून : सरोवर नगरी नैनीताल की नैनी झील के पुनर्जीवीकरण (रिजुवेनेशन) पर आयोजित सेमीनार में राज्यपाल डॉ. केके पाल ने दो टूक कहा कि इस गम्भीर विषय पर डिस्कशन मोड की बजाय अब एक्शन मोड में आना होगा। नैनी झील को लेकर वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के जो भी सुझाव हैं, उन पर कार्य करने की जरूरत है। झील पर बढ़ते दोहन के दबाव को देखते हुए राज्यपाल ने कहा कि नैनीताल में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सुनिश्चित करते हुए पानी के दुरुपयोग पर पूरी तरह पाबन्दी लगाने की जरूरत है।

सोमवार को राजभवन में ‘नैनी झील पुनर्जीवीकरण के रोडमैप पर सम्बन्धित भागीदारी चर्चा’ विषय पर ‘दि युनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी)’ व ‘सेंटर फॉर इकोलॉजी डेवलपमेंट एंड रिसर्च’ की ओर से आयोजित सेमीनार में राज्यपाल डॉ. केके पाल ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि झील के संरक्षण को लेकर समय-समय पर अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए और इनमें विशेषज्ञों ने तमाम सुझाव भी दिए। लिहाजा, अब संरक्षण को लेकर ठोस काम किए जाने की जरूरत है। इस दिशा में नैनीताल के नागरिकों पर भी अहम जिम्मेदारी है। शहर में पीने के पानी की आपूर्ति इस झील पर टिकी है। प्रतिवर्ष यहाँ आबादी से कई गुना अधिक पर्यटक आते हैं, लिहाजा नैनीताल में जल प्रबन्धन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हाल ही में भारत सरकार ने राज्य के 26 हजार जलस्रोतों का मैनुअल निरीक्षण करने का निर्णय लिया है। केन्द्र सरकार का राज्य के हितों की चिन्ता करना जलस्रोतों की बेहतरी के लिये सुखद संकेत है। उन्होंने कहा कि नैनीताल में पर्यटकों की संख्या वहाँ की आबादी से कहीं अधिक होने के चलते नए पर्यटक स्थल भी विकसित करने की जरूरत है। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 13 जिलों में 13 नए पर्यटक स्थल विकसित करने का निर्णय लिया है। तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने झील में पानी की कमी व जनसंख्या दबाव समेत विभिन्न विषयों पर प्रकाश जाला और समाधान भी सुझाया। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह, प्रमुख सचिव आनंदवर्द्धन, यूएनडीपी के एडिशनल कंट्री डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमार आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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