निर्मल भारत यात्रा, 2 अक्टूबर से 19 नवम्बर
निर्मल भारत यात्रा में जयराम रमेश

एक बहुत ही रोमांचक, मसालेदार और मजेदार अभियान


पर्याप्त साफ-सफाई का अभाव भारत में एक बड़ी समस्या है। 67 करोड़ भारतीयों को अभी भी खुले में शौच जाना पड़ता है। खुले में शौच की वजह से ही प्रतिदिन 1000 बच्चों को जान गंवानी पड़ती है। इस बात को आप ऐसे समझ सकते हैं कि भारत सरकार को देश के कुल बजट में से काफी धन स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करना पड़ रहा है। बावजूद इसके कई एक जानलेवा बीमारी समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं।

इस बात को ध्यान में रख कर और भारत में सेनिटेशन संकट से निपटने के लिए एक.`यात्रा` निकाली गई जो, जुलूस के शक्ल में थी। यह यात्रा पाँच राज्यों- वर्धा (महाराष्ट्र), इंदौर (मध्य प्रदेश), कोटा (राजस्थान), ग्वालियर (मध्य प्रदेश), गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) और बेतिया (बिहार) से होकर गुजरी। इसमें लोगों का स्वच्छता और सफाई पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करने की कल्पना की गई, जो कि यह एक मजेदार और इंटरैक्टिव जागरूकता बढ़ाने के लिए वकालत मंच प्रदान करने के रूप में लंबे दिनों तक जानी जायेगी। सेनीटेशन मेले में बॉलीवुड, नृत्य, गीत व क्रिकेट के माध्यम से कम्युनिटी में साफ-सफाई के प्रति एक सकारात्मक सोच पैदा करने का अभूतपूर्व प्रयास किया गया जो निश्चय ही एक बहुत ही रोमांचक, मसालेदार और मजेदार अभियान कहा जायेगा।

निर्मल भारत यात्रा की प्रमुख आयोजक संस्था वाश युनाइटेड के कार्यकारी निदेशक थार्स्टन कीफर के मताबिक- यह यात्रा आने वाले दिनों में कुछ सकारकत्मक बदलावों के बीच समुदायों, स्कूली बच्चों में स्वच्छता और सफाई की धारणा को बदलने का काम करेगी, क्योंकि इस दौरान लोगों के सकारात्मक शक्ति का दोहन करने का काफी हद तक प्रयास किया गया।

यात्रा का रोड शो 3 अक्टूबर 2012 से महाराष्ट्र में वर्धा से शुरू हुआ था जो बेतिया, बिहार हिमालय के करीब में विश्व शौचालय दिवस 19 नवम्बर को समाप्त हुआ। 56 दिनों की यह यात्रा 6 कस्बों और सैकड़ों गांवों के माध्यम से गुजरी। इस दौरान निर्मल भारत यात्रा काफी लोगों के आस-पास पहुंची और खुले में शौचमुक्त देश बनाने के अभियान को आगे बढ़ाने का काम किया।

यात्रा, निर्मल भारत अभियान / भारत सरकार द्वारा समर्थित थी तथा. स्विस विकास सहयोग, जल आपूर्ति और स्वच्छता सहयोगात्मक परिषद, जीआइजेड, वाटरएड, अर्घ्यम तथा इवाग इसके पार्टनर्स थे।

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