ऑक्सीजन की कमी से पीने का पानी भी होगा जहरीला
लखनऊ (डीएनएन)। गोमती सौन्दर्यीकरण से पहले गिर रहे नालों को डायवर्ट न किए जाने से गोमती सफाई अभियान बेमकसद साबित हो रहा है। नालों के न रोके जाने से गोमती नदी में सीवेज का पानी जमा हो रहा है। वहीं नदी में जलस्तर कम होने और नाले का पानी जमा होने से ऑक्सीजन का लेबल भी घट रहा है। मानक की तुलना में ऑक्सीजन कम होने पर जीवित प्राणियों के लिए पानी जहर का काम कर सकता है।

सात नालों के डायवर्जन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव का एप्रूवल केन्द्र व राज्य सरकार से दिया जाना है। स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई शुरू हो सकेगी। तब तक गोमती में नाले के पानी गिरते रहेंगे। —डीएन यादव, परियोजना प्रबन्धक, अस्थाई गोमती प्रदूषण नियन्त्रण इकाई।सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह यादव व मुख्य सचिव आलोक रंजन के आदेशों के बाद भी जिम्मेदार विभाग आँख मूँदे हैं। यही हाल रहा तो इस गर्मी में पीने के पानी की भी विकराल समस्या पैदा हो सकती है। जल निगम व नगर निगम प्रशासन की लापरवाही शहरवासियों के लिए भारी पड़ सकती है। यह हाल तब है जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस सम्बन्ध में चेतावनी भी जारी कर चुका है। शहर के कुल 26 नालों के डिस्चार्ज को पूरी तरह से अभी तक डायवर्ट नहीं किया जा सका है। वहीं शहर की आबादी बढ़ने एवं नए क्षेत्र के विस्तार के कारण सात नए नालों का भी प्रदूषित जल सीधे नदी में जा रहा है। इसकी शिकायत प्रदूषण नियंन्त्रण बोर्ड लगातार शासन को भेज रहा है।

...कैसे बनेंगे स्टेशन


नालों के डिस्चार्ज को डायवर्ट करने के लिए पम्पिंग स्टेशन बनाना है। इसके लिए गोमती प्रदूषण नियन्त्रण इकाई को करीब 10500 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है। डायवर्जन स्थल के लिए उक्त भूमि की माँग अस्थाई गोमती प्रदूषण नियन्त्रण इकाई के परियोजना प्रबन्धक डीएन यादव की ओर से एलडीए से की गई थी। लेकिन एलडीए के पास लैण्ड बैंक की कमी होने पर उसने भूमि देने से मना कर दिया है।

गन्दा करने वाले नाले


* गोमती नगर विस्तार निकट सिंचाई विभाग बैरल
* गोमती नगर नाला निकट ग्वारी कलवर्ट
* सहारा सिटी नाला निकट फ्लड पम्पिंग स्टेशन
* घैला नाला निकट घैला गाँव
* फैजुल्लागंज अपस्ट्रीम
* फैजुल्लागंज डाउनस्ट्रीम
* बरीकलां नाला

भरवारा एसटीपी चालू हो तो बने बात


गोमती प्रदूषण नियन्त्रण कार्य योजना के अन्तर्गत शहर के कुल 26 नालों के डिस्चार्ज को डायवर्ट कर सीवेज पम्पिंग स्टेशन के माध्यम से शोधन किया जाना था। डीएम ने निरीक्षण के बाद अप्रैल में भरवारा एसटीपी के शुरू करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी भी स्थिति जस की तस है।

पम्पिंग न होने से नदी में जा रहा नालों का पानी


सिस गोमती साइड से आने वाले नालों में पाटा नाला, एनईआर नाला, वजीरगंज, घसियारी मण्डी, चाइना बाजार, लाप्लास एवं ट्रंक सीवर का डिस्चार्ज सिस गोमती पम्पिंग स्टेशन से पम्प करके निशातगंज पुल के ऊपर पड़ी राइजनिंग के माध्यम से भरवारा एसटीपी पर शोधन के लिए भेजा जाता है। लेकिन इस सीवेज पम्पिंग स्टेशन पर स्थापित कुल पाँच पम्पों में से वर्तमान में कई पम्प पूरी तरह से खराब हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र के अधिकांश डिस्चार्ज की पम्पिंग न होने से डिस्चार्ज सीधे नदी में प्रवाहित होकर नदी को प्रदूषित कर रहा है।

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