पेयजल में इनाम, आपदा प्रबन्धन में इन्तजाम

उत्तराखण्ड के हर जिले की अब ड्रोन सुरक्षा का कवच हासिल होगा। सरकार ने हर जिले के लिये एक-एक ड्रोन खरीद लिये हैं। इन्हें जिलों में उपलब्ध करा दिया गया है। आपदा प्रबन्धन विभाग ड्रोन की उपलब्धता के बाद राहत और बचाव के कार्यक्रम में और प्रभावी कार्रवाई की अब उम्मीद कर रहा है। 2013 की आपदा के बाद आपदा प्रबन्धन विभाग अपने इन्तजाम को लगातार चाक चौबन्द बना रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की योजनाओं पर बेहतर ढंग से काम करने का उत्तराखण्ड को इनाम मिला है। केन्द्र सरकार ने उत्तराखण्ड को 39 करोड़ का इनाम दिया है। इनमें से 27 करोड़ रुपए वो हैं, जो कि नाबार्ड से उत्तराखण्ड ने लोन के रूप में लिये थे। इस लोन को अब केन्द्र सरकार चुकाएगी। इसी तरह, 12 करोड़ रुपए का पुरस्कार अलग से मिला है।

ग्रामीण पेयजल में अब भी आदर्श स्थिति कायम करने की राह में कई अड़चन है। करीब 17 हजार बस्तियों में पेयजल आपूर्ति की शिकायतें हैं। यहाँ पर मानक से कम पानी उपलब्ध हो रहा है।

पेयजल विभाग ने ग्रामीण पेयजल व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये दो हजार करोड़ का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अभी वित्त विभाग की स्वीकृति नहीं मिली है। इन स्थितियों के बीच, ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर अच्छे काम के लिये पेयजल विभाग को 39 करोड़ का इनाम मिला है। पेयजल निगम के प्रबन्ध निदेशक भजन सिंह के अनुसार, बेहतर कार्य के लिये 12 करोड़ का पुरस्कार मिला है। 27 करोड़ का पुरस्कार इस रूप में है कि अब नाबार्ड से लिये गया लोन केन्द्र सरकार चुकाएगी।

अब हर जिले में होगा ड्रोन सुरक्षा कवच


उत्तराखण्ड के हर जिले की अब ड्रोन सुरक्षा का कवच हासिल होगा। सरकार ने हर जिले के लिये एक-एक ड्रोन खरीद लिये हैं। इन्हें जिलों में उपलब्ध करा दिया गया है। आपदा प्रबन्धन विभाग ड्रोन की उपलब्धता के बाद राहत और बचाव के कार्यक्रम में और प्रभावी कार्रवाई की अब उम्मीद कर रहा है। 2013 की आपदा के बाद आपदा प्रबन्धन विभाग अपने इन्तजाम को लगातार चाक चौबन्द बना रहा है।

मॉक ड्रिल कई बार की गई है और तैयारियों को परखा गया है। इस क्रम में काफी समय से आपदा प्रबन्धन विभाग हर जिले में ड्रोन सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता महसूस कर रहा था, लेकिन यह सम्भव नहीं हो पा रहा था। विभाग का मानना था कि आपदा या कोई दुर्घटना की स्थिति में ड्रोन काफी मददगार साबित हो सकता है। खासतौर पर पहाड़ में बस दुर्घटना की स्थिति में कभी-कभी लोकेशन तलाशने में दिक्कत होती है, ड्रोन के कारण यह काफी हद तक आसान हो जाएगा। आपदा प्रबन्धन केन्द्र के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला के अनुसार, हर जिले के लिये ड्रोन खरीद लिया गया है।

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