पुस्तकें
लम्बा घूँट
घूँघट के ओट से ही
उसने लम्बा घूँट भरा
झरने ने सुन लिया
और मारे खुशी के
छल-छला कर,
झर-झरा कर
नहला दिया सारा पहाड़
बिरला ही जानता है
यह संगीत है
जिसमें प्यार बजता है
(अविराम-अभिराम!)
लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें
