35 प्रतिशत आबादी को मयस्सर नहीं पानी

Submitted by Hindi on Sun, 04/01/2018 - 14:03


अभी तो वैद्य कॉलोनियों को ही पानी देने की मुश्किल आ रही है तो अवैध को देना कैसे संभव है। इन कॉलोनियों में कुछ स्थान पर बोर कराए हैं लेकिन भूजलस्तर कम होने पर वह काम नहीं कर रहे हैं। नर्मदा जल आने पर ही इन कॉलोनियों में पानी सप्लाई हो सकेगी। - कृष्णा गौर, महापौर

भोपाल, 15 अक्टूबर। किसी ने ठीक ही भविष्यवाणी की है कि अगला विश्व युद्ध पानी के लिये ही लड़ा जाएगा। पानी का संकट जिस प्रकार दिन प्रतिदिन गंभीर होता जा रहा है, उसे देखकर लगता है कि जल्द ही यह बात सही भी साबित हो जाएगी। जल समस्या की बात यदि विश्व, देश और प्रदेश की ना करके केवल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की करें तो स्थिति एकदम स्पष्ट हो जाती है क्योंकि भोपाल की 30 से 35 प्रतिशत आबादी आज भी पानी की एक-एक बूँद के लिये तरस रही है। राजधानी को भले ही महानगर की श्रेणी में लाने के लिये अत्याधुनिक सुख सुविधाएँ विकसित की जा रही हो, लेकिन यहाँ की 30 से 35 प्रतिशत आबादी अब भी कुएँ, बावड़ी बोर जैसे पानी के स्रोतों के बिना है।

जल संकटयह स्थिति एक-दो कॉलोनियों की नहीं है बल्कि शहर की 255 बस्तियाँ ऐसी हैं, जहाँ पानी की कोई स्थाई व्यवस्था नहीं है। यह अनुमानित आंकड़ा अथवा मनगढंत बात नहीं वरन सरकारी स्तर पर कराए गए सर्वे में साबित हुआ है कि भोपाल की 250 से भी अधिक कॉलोनियों में जबरदस्त जल संकट व्याप्त है। विशेष बात यह है कि अधिकांश बस्तियों के लोग सम्पतिकर बकायदा जमा करते हैं इसका मतलब वे नगर निगम सीमा के अन्तर्गत तो आते हैं, अपनी बुनियादी जरूरत पानी से ही महरूम है।

इनमें से कुछ कॉलोनियाँ ऐसी है, जो हाल ही में बनी अथवा बसी हैं। शहर के बाहरी क्षेत्रों और आस-पास के ग्रामीण इलाकों को जोड़कर इन्हें कॉलोनियों की शक्ल दी गई है। लेकिन ढेर सारी कॉलोनियाँ ऐसी हैं, जो बरसों से नगर निगम सीमा क्षेत्र में आती हैं । मसलन वार्ड नं. 15 बैरसिया रोड पर बनी पी.एण्ड टी. कॉलोनी तथा न्यू सिन्धी कॉलोनी। इन्हें बने 40 से 50 बरस के करीब हो गए हैं लेकिन आज भी यहाँ के बाशिंदे कुएँ, बावड़ी के पानी पर निर्भर है।

सिंधी कॉलोनी, शांतिनगर कॉलोनी में जनता के सहयोग से टंकी बनाई गई है, जहाँ आस-पास के कुओं का पानी इकट्ठा करके सप्लाई किया जाता है। यही हालात रेलवे स्टेशन के करीब बसी कॉलोनी पुष्पा नगर, नवीन नगर, कृष्णा नगर, खुशीपुरा जैसी अन्सल अपार्टमेंट, श्यामला आवासीय कॉलोनी सहित अनेकों क्षेत्रों की हैं। शांतिनगर कॉलोनी में नगर निगम घर-घर पानी सप्लाई तो नहीं करती है, लेकिन क्षेत्र की बड़ी टंकी में एक कनेक्शन नगर निगम ने जरूर दे दिया है, जिसके आधार पर उसे पानी प्रदान करने वाले क्षेत्र में जोड़ दिया गया है।

यह हालात केवल प्राइवेट अथवा निजी क्षेत्रों के नहीं हैं बल्कि शहर की सरकारी कॉलोनियों के बाशिदें भी जल समस्या से जूझ रहे हैं। सुल्तानिया और इंदिरा गांधी जैसे सार्वजनिक और अनिवार्य क्षेत्र में भी पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

यही हालत दूरदर्शन कॉलोनी, रीजनल कॉलेज कैम्पस, टी.टी.टी, आई, डिपो चौराहा, ए.जी. कॉलोनी, इन्कम टैक्स कॉलोनी, 23 और 25वीं बटालियन, वायरलेस कॉलोनी, रेलवे स्टेशन, रेलवे क्वाटर, आकाशवाणी, एम.पी.ई.बी. ऑफिस आदि इलाकों में टंकी में बोर अथवा कुएँ का पानी इकट्ठा कर सप्लाई किया जा रहा है। भोपाल नगर निगम सीमा के अन्तर्गत 70 वार्ड आते हैं, जिन्हें 14 जोन में बाँटा गया है। इनमें से सबसे बुरे हालात जोन नं. 13 के हैं। यहाँ की करीब 120 बस्तियाँ ऐसी हैं जहाँ नगर निगम का पानी नहीं पहुँचाया गया है। जे. के. रोड पर बनी और बसी नई कॉलोनिया, मिनाल रेसीडेन्सी, सिद्धार्थ लेक सिटी, ऋषीपुरम, रीगल होम्स, लवकुश नगर, सुखसागर इसी जोन के अन्तर्गत आती है। इसी प्रकार जोन-14 में ऐसी कॉलोनियों की संख्या करीब 55 है। केवल 6 जोन ऐसे हैं जहाँ नगर, निगम शत- प्रतिशत पानी की सप्लाई करता है।

भोपाल की आबादी करीब 25 लाख है, जिनमें से नल कनेक्शन लगाए गए हैं, ढाई लाख के लगभग। राजधानी के इन परिवारों के लिये पानी की खपत होती हैं 46 एम.जी.डी.। इसमें 33.5 एम.जी.डी. की पूर्ति होती है कोलार से बाकी 12.5 एम.जी.डी. पानी मुहैया कराया जाता है बड़े तालाब से। इसी प्रकार 5 से 10 प्रतिशत पानी उपलब्ध कराया जाता है अन्य स्रोतों से। पिछले कुछ समय से जिस प्रकार शहर का विस्तार हुआ है, जनसंख्या जिस तेजी से बढ़ी है उसको देखते हुए नगर निगम भी मजबूर हो जाता है। वर्तमान स्थिति में तो नगर निगम को उन क्षेत्रों में ही पानी सप्लाई करने में दिक्कत आ रही है, जहाँ नियमित पानी दिया जाता रहा है। शहर भर में पिछले एक साल से एक दिन छोड़कर पानी की सप्लाई की जा रही है। ऐसे हालात में नए क्षेत्रों में पानी देना लगभग असंभव ही है।

नगर निगम का कहना है कि लोगों ने ऐसी कॉलोनियों में मकान खरीद लिये जहाँ पानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे, जबकि निजी कॉलोनी बनाने वाले बिल्डरों का दावा था कि जल्द ही बस्तियों में नगर निगम का पानी सप्लाई होने लगेगा। लोगों ने भी आनन-फानन में मकान खरीद लिये परन्तु अब इन क्षेत्रों में आए दिन पानी को लेकर झगड़े आम होते जा रहे हैं। गर्मियों में स्थिति बद से बदतर हो जाती है। पिछले साल ही भोपाल में पानी के झगड़ों ने उग्र रूप धारण कर लिया था, जिसमें कई लोग मारे गए थे। इस आपसी खींचतान का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ता है।

शहर में जलस्तर में आ रही गिरावट भी चिन्ता का विषय है। निजी कॉलोनियों में जिस तरह ट्यूबवेल का उपयोग किया जा रहा है, उससे भी जमीनी जलस्तर लगातार गिर रहा है, शहर का पानी दूषित और प्रदूषित हो रहा है। बैंरसिया रोड क्षेत्र में तो सॉलिड वेस्ट की वजह से पानी सर्वाधिक दूषित है। ऐसी स्थिति में ट्यूबवेल, कुओं, बावड़ियों का पानी नागरिकों के लिये कितना सुरक्षित हो सकता है। इसका अन्दाजा लगाया जा सकता है। इस 30 से 35 प्रतिशत आबादी को अब एक ही आसरा और सहारा दिखता है, नर्मदा मैया का। नगर निगम का दावा है कि नर्मदा का पानी आने के बाद पूरे शहर को 12 मीटर प्रेशर के साथ 24 घंटे पानी उपलब्ध हो सकेगा। इसी के चलते पिछले एक बरस से राजधानी के बांशिदे नर्मदा मैया की बाट जोह रहे है। सरकारी दावों और वादों पर यदि यकीन किया जाता तो अब तक तो नर्मदा का पानी घर-घर तक पहुँच चुका होता, लेकिन नगरवासियों ने आस नहीं छोड़ी है।

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