'आओ जानें, अपना पानी' अभियान

Submitted by Hindi on Thu, 12/30/2010 - 10:40

अभियान में निकले चौंकाने वाले तथ्य


भारत नदियों का देश कहा जाता है। यहां पानी के विभिन्न प्रकार के स्रोत व उनकी परम्परा मौजूद रही है। पानी की इसी परम्परा ने भारतीय समाज को एक सभ्य व प्रकृति के साथ जीने वाला बनाया है। भारत के कुल करीब साढे़ छः लाख गांवों में करीब 50 लाख तालाब व अन्य जलस्रोत मौजूद हैं। लेकिन वर्तमान में ये अधिकतर दयनीय हालत में हैं।

इंटरनेशनल वाटर एशोसिएशन, यूके व वर्ल्ड एन्वायरन्मेंट फेडरेशन, नीदरलैण्ड के सहयोग से सम्पूर्ण विश्व में संचालित कार्यक्रम वर्ल्ड वाटर मॉनिटिरिंग डे में नीर फाउंडेशन को लगातार दूसरे वर्ष भी शामिल होने का मौका मिला। गौरतलब है कि वर्ष 2009 में अपने बेहतर कार्य के लिए संस्था को वाटर चैम्पियन अवार्ड भी मिला था।

वर्ष 2010 के कार्यक्रम में संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली व उत्तराखण्ड राज्यों के करीब 30 जनपदों में वहां के जल स्रोत शामिल किए गए। इसमें उत्तर प्रदेश के (मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, बागपत, बुलंदशहर, मुरादाबाद, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, बिजनौर, अलीगढ़, आगरा व लखनऊ जनपद), मध्यप्रदेश के भोपाल, राजस्थान के जयपुर, उत्तराखण्ड के देहरादून, हरिद्धार, कोटद्धार व नैनीताल तथा पंजाब व हरियाणा के क्रमशः मानसा, भटिंडा व पानीपत तथा दिल्ली आदि जनपदों के जलस्रोत व नदियों के परीक्षण किए गए।

संस्था द्वारा इस कार्यक्रम में 30 स्कूलों के करीब 4000 बच्चों व विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के करीब 1000 सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया।

यह परीक्षण जून से प्रारम्भ होकर नवम्बर माह में पूर्ण हो गए। इस दौरान बच्चों व सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा गंगा नदी, यमुना नदी, हिण्डन नदी, काली पूर्वी नदी, काली पश्चिमी नदी, कृष्णा नदी, धमोला नदी, बूढ़ी गंगा, अरिल नदी, गोमती नदी, पांवधोई, सहस्रधारा, सौंग नदी, अपर गंगा नहर, मध्य गंगा नहर, लोअर गंगा नहर, संजय गांधी क्षील, महाभारतकालीन गांधारी तालाब, ऐतिहासिक नवलदेह कुआं, पौराणिक श्रृंगऋषि का आश्रम, हैण्डपम्प, सब्मर्सिबल पम्प, टोटी का पानी, डैम, नालों व विभिन्न तालाबों के करीब 300 स्थानों के करीब 1450 नमूनों का परीक्षण किया गया। इसमें नदियों के 530, हैण्डपम्प के 195, टोटी के पानी के 370, तालाबों के 160, सब्मर्सिबल पम्प के 50, डैम के 15, झीलों के 20 तथा नहर व नालों के करीब 50 नमूने शामिल थे।

तालाबों, झीलों, नहरों, डैम, टोटी व सब्मर्सिबल पम्प के नमूनों में कहीं-कहीं ही ऑक्सीजन की कमी पाई गई। ये सभी परीक्षण एक विशेष प्रकार की वाटर टेस्टिंग किट द्वारा किए गए। इन परिक्षणों में मुख्य रूप से पानी का तापमान, उसकी टरबिडिटी, पीएच मूल्य व डिसाल्वड ऑक्सीजन के परीक्षण किए गए, साथ ही परीक्षण करते समय का तापमान, मौसम की जानकारी, लांगीटयूड व लैटीटयूड, परीक्षण का समय, स्थान व दिनांक सहित वर्ल्ड वाटर मानिटिरिंग डे द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रपत्र के अनुसार जानकारियां जुटाई गईं।

इन सभी जलस्रोतों को इसलिए चुना गया क्योंकि इन पर ही इस क्षेत्र की सम्पूर्ण आबादी घरेलू, कृषि व उद्योगों के लिए आधारित है। परिक्षणों से बहुत ही चैंकाने वाले तथ्य निकलकर सामने आए। यमुना, कृष्णा, काली, धमोला, अरिल, गोमती तथा हिण्डन नदियां पूरी तरह से मृत हो चुकी हैं। इनमें बहने वाले पानी में अत्यधिक प्रदूषण की मात्रा घुल चुकी है। जबकि गंगा नदी, सहस्रधारा, सौंग नदी व पांवधोई तथा भूजल अभी साफ-सुथरा नजर आता है।

परीक्षण में ‘केवी पब्लिक स्कूल, परीक्षितगढ़’ द्वारा गंगा नदी, गांधारी तालाब व ऐतिहासिक नवलदेह के कुएं तथा परीक्षितगढ़ के आस-पास के गांवों के हैण्डपम्पों के 50 नमूनों के परीक्षण किए गए। गंगा नदी के 15 नमूनों में के परीक्षण में पीएच की मात्रा सामान्य अर्थात 7 से 7.5 के बीच रहा, डिसाल्वड ऑक्सीजन 4,00 पीपीएम व टरबिडिटी 40 जेटीयू तथा तापमान 22 से 24 के बीच निकल कर आया। इसी प्रकार परीक्षितगढ़ के आस-पास के गांवों, पूठी, सिखैडा, अगवानपुर, बढ़ला, रैदरा, चितमाना, रामनगर व कैली आदि गांवों के हैण्डपम्पों के नमूनों में पीएच का मान 7 से 8 के बीच रहा जबकि डिसाल्वड ऑक्सीजन 0,00 पीपीएम तथा टरबिडिटी 0 जेटीयू ही रही तथा इन नमूनों का तापमान 18 से 28 के बीच रहा। जबकि गांधारी सरोवर व नवलदेह कुएं के नमूनों का पीएच 6 से 7 के बीच, डीओ 0 पीपीएम तथा टरबिडिटी 40 जेटीयू रही। इन दोनों जलस्रोतों का तापमान बच्चों द्वारा 22 से 28 के बीच रिकार्ड किया गया। परीक्षण में अपर गंगा कैनाल, मध्य गंगा कैनाल व लोअर गंगा कैनाल सहित परीक्षितगढ़ के रजवाहे के नमूनों को भी गंगा के पानी की तरह सामान्य ही पाया गया।

हिण्डन व कृष्णी नदी के नमूनों का परीक्षण किया गया। इन नदियों सहित यमुना, धमोला, व काली पूर्वी व काली पश्चिमी नदियों के नमूनों के परीक्षण में संस्था के कार्यकर्ता भी साथ रहे। इन नदियों के अतिरिक्त बेघराजपुर के नाले का भी परीक्षण किया गया। इन सभी नदियों में अगर काली पश्चिम नदी के दस नमूनों के आंकड़ों को छोड दें कमोवेश सभी नदियों की स्थिति दयनीय बन चुकी है, अर्थात सभी नदियां नाला बन चुकी हैं जिनमें कि कैमिकल्स मिले पानी के अतिरिक्त कुछ भी नहीं बह रहा है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हिण्डन, काली पूर्वी, कृश्णी व धमौला में अपना पानी नहीं बल्कि ये नदियां उद्योगों द्वारा जमीन के नीचे से निकाले जाने वाले शुद्ध पानी को औद्योगिक प्रक्रिया में प्रदूषित करने के पश्चात जब नदियों में छोड़ा जाता है तब जाकर इन नदियों में पानी आ रहा है।

सहारनपुर से मुजफरनगर, बागपत, मेरठ व गाजियाबाद होते हुए गौतमबुद्वनगर तक बहने वाली करीब 260 किलोमीटर लम्बी हिण्डन नदी के लिए 6 स्थानों सहारनपुर, कलीना, किनौनी, बालैनी, मोहननगर व तिलवाड़ा से तीस नमूने लिए गए। इन सभी नमूनों में डिसाल्वड ऑक्सीजन 8 पीपीएम, टरबिडिटि 100 व पीएच मान 8.5 से 10 तक पाई गई। गौरतलब है सहारनपुर से हिण्डन नदी के उद्गम स्थल से तथा तिलवाड़ा, गौतमबुद्वनगर उसके यमुना में मिलने से पहले के नमूने भी लिए गए थे।

चौंकाने वाला तथ्य यह भी था कि उद्गम से लेकर यमुना में मिलने तक हिण्डन में प्रदूषण का स्तर समान बना हुआ है अथवा बढ़ रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि हिण्डन का उद्गम ही स्टार पेपर मिल के नाले के प्रदूषित पानी से हो रहा है। इसी प्रकार सहारनपुर से बागपत तक बहने वाली करीब 78 किलोमीटर लम्बी कृश्णी नदी के वर्तमान उदगम स्थल भनेडा खेमचन्द से उसके हिण्डन में विलय हो जाने वाले स्थल बरनावा से 10 नमूनों के परीक्षण किए गए। इसी प्रकार सहारनपुर से शरकथाल गांव तक बहने वाली करीब 52 किलोमीटर लम्बी धमौला नदी के भी 10 नमूने उदगम व हिण्डन में विलय होने के स्थान से लिए गए। सहारनपुर से ही बहने वाली करीब 75 किलोमीटर लम्बी काली पश्चिम नदी के चन्दपुरा, मलीरा, शामली रोड, तबलशाहपीर, पुरबालियान, डबल व हिण्डन में विलय होने वाले स्थान पिठलोकर तक 35 नमूनों के परीक्षण किए गए। मुजफरनगर से मिलने वाले बेघराजपुर नाले से भी काली पश्चिमी में विलय होने के स्थान घासीपुरा तक 15 नमूनों के परीक्षण किए गए। कृश्णी व धमौला नदियों तथा बेघरापुर नाले के सभी नमूनों में हिण्डन की ही तरह डिसाल्वड ऑक्सीजन 8 पीपीएम, टरबिडिटि 100 जेटीयू व पीएच मान 8,5 से 10 तक पाया गया। काली पश्चिम नदी के कुल 35 नमूनों में से चन्दपुरा व मलीरा गांवों से लिए गए नमूनों में डिसाल्वड ऑक्सीजन 4 पीपीएम, टरबिडिटि 40 जेटीयू व पीएच मान 8 से 8.5 के बीच पाया गया, जबकि बाकि बचे 25 नमूनों की हालत दयनीय ही थी इन नमूनों में भी डिसाल्वड ऑक्सीजन 8 पीपीएम, टरबिडिटि 100 जेटीयू व पीएच मान 8.5 से 10 तक पाई। इन नदियों के धमौला नदी इन नमूनों में भी हिण्डन नदी के समान ही इन नदियों के नमूनों के परीक्षण से लगा कि इनमें बहने वाले में प्रदूषण का स्तर किट की मापन क्षमता से भी अधिक है।

मुजफरनगर से निकलकर मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, एटा व फरूखाबाद से होते हुए कन्नौज में जाकर गंगा में समाहित होने वाली काली पूर्वी नदी के 50 नमूनों के परीक्षण किए गए। ये नमूने धन्जू, जयभीमनगर, कौल, हापुड, बुलंदशहर, पहासू, अतरौली, कासगंज, फरूखाबाद व कन्नौज से लिए गए। इन सभी नमूनों में एक समान स्थिति निकलकर सामने आई। गौरतलब है कि काली पूर्वी नदी मुजफरनगर की जानसठ तहसील के अंतवाड़ा गांव से निकलती है, लेकिन वर्तमान में यह नदी दौराला से लावड़ रोड़ तक सूखी हुई है। इस नदी के नमूनों के परीक्षण में डिसाल्वड ऑक्सीजन 8 पीपीएम, टरबिडिटि 100 जेटीयू व पीएच मान 9 से 10 पाया गया। इस दौरान नदी के पानी का औसत तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस था।

महाकवि गंगादास सरस्वती शिशु मन्दिर, हापुड के बच्चों द्वारा कुचेसर, उपेडा, रसूलपुर, बनखन्डा, ततारपुर, रामपुर, पूठा छेजा, सबली व खरखौदा गांवों से हैण्डपम्पों, सब्मर्सिबल पम्पों व तालाबों के 50 नमूनों के परीक्षण किए। हैण्डपम्पों व सब्मर्सिबल पम्पों के पानी में डिसाल्वड ऑक्सीजन 0 पीपीएम, टरबिडिटि 0 जेटीयू व पीएच मान 6 से 8 के बीच पाया गया, जबकि तालाब के नमूनों में डिसाल्वड ऑक्सीजन 0 पीपीएम, टरबिडिटि 40 जेटीयू व पीएच मान 6 से 8 के बीच पाया गया।

नीर फाउंडेशन द्वारा इस कार्य हेतु अलीगढ़ के रघुवीर सहाय इंटर कॉलिज व राजकीय कन्या इंटर कॉलेज, मेरठ के पीजीए इंटरनेशनल स्कूल, गॉडविन पब्लिक स्कूल, जे पी एकाडेमी, मणीदीप इण्टर कॉलिज, शांतिनिकेतन विधापीठ, श्री दयालेश्वर पब्लिक स्कूल, के वी पब्लिक स्कूल, परीक्षितगढ़, महाकवि गंगादास सरस्वती शिशु मन्दिर, हापुड़, डी ए वी पब्लिक स्कूल, बुढ़ाना, आत्मासेवानन्द कन्या विद्यालय, करनावल, दिल्ली के बाल भवन पब्लिक स्कूल, बाल भारती पब्लिक स्कूल व रेयान इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, आगरा के दयालबाग विश्वविद्यालय व सैंट जौंस इंटर कॉलिज, हरिद्धार के कृपाल कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय व दिल्ली पब्लिक स्कूल इसके अतिरिक्त जन कल्याण संस्था, मेरठ, नैचर फाउंडेशन, दिल्ली, ऐम, लखनऊ, हरीतिमा, अलीगढ़, शहजाद राय शौद्ध संस्थान, बागपत, लोकहित फाउंडेशन, देहरादून व समीक्षा गाजियाबाद जैसे गैर-सरकारी संगठन भी शामिल हुए। इन स्कूलों व संस्थाओं को उनके इंटरेस्ट को देखते हुए व उस क्षेत्र का होने के कारण इस कार्यक्रम में शामिल किया गया।

परिक्षणों के दौरान आस-पास के लोगों में एक उत्सुकता का माहौल दिखा। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम से जुड़ने के पश्चात बच्चे बहुत ही प्रसन्न नजर आए। प्रत्येक दिन बच्चों में परीक्षण के लिए उत्साह रहता था। इस कार्यक्रम से बच्चों ने जहां पानी के परीक्षण का तरीका सीखा वहीं उनको यह भी ज्ञात हो गया कि हमारे आस-पास के जलस्रोतों में किस प्रकार का पानी मौजूद है या हम किस प्रकार के पानी का उपयोग करते हैं। बच्चों और संस्थाओं ने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लालसा दिखी। अंत में कार्यक्रम में शामिल हुए स्कूलों व गैर-सरकारी संगठनों ने सही कहा कि हम पुनः इस कार्यक्रम में भागीदारी निभाना चाहेंगे।

 

 

रिपोर्ट का तकनीकी पक्ष -


 

 

जल स्रोत

कुल तापमान (जेटीयू)

कुल नमूनों की संख्या

डिग्री सेंटीग्रेट) कुल पीएच मान

कुल डिसाल्वड ऑक्सीजन (पीपीएम)

कुल टरबिडिटि

1

गंगा नदी 170

4,00 4,00

23-26

7-8

बूढी गंगा नदी 30

4,00 40,00

24-26

7-8

2

हिण्डन नदी 50

8,00 100,00

24 से 30

10

3

यमुना नदी 50

8,00 100,00

14 से 18

10

4

कृश्णी नदी 50

8,00 100,00

24 से 30

10

5

काली पूर्व नदी 100

8,00 100,00

24 से 28

10

6

काली पश्चिम नदी 50

8,00 100,00

22 से 26

10

7

धमौला नदी 10

8,00 100,00

24 से 30

10

8

पांवधौई नदी 10

4,00 0,00

20

10

9

अरिल नदी 10

8,00 100,00

26

10

10

सौंग नदी 5

0,00 0,00

18

7

11

सहस्रधारा 5

0,00 0,00

18

7

गोमती नदी 10

8,00 40,00

22-24

8-9

12

हैण्डपम्प 195

0,00 0,00

18 से 28

7,5

13

सबर्मिबलपम्प 50

0,00 0,00

18 से 28

7,5

टोटी का पानी 370

0,00 0,00

18 से 26

7

झील (नैनी, लैस्डाउन व संजय गांधी) 15

4,00 40,00

14-16

7-8

14

तालाब 160

8,00 40,00

18 से 28

8

स्वर्ण मन्दिर तालाब 10

4,00 40,00

20

8

15

कुंआ नवलदेह 5

4,00 0,00

22

7,5

16

नहर@अपर, मध्य व लोअर 10

4,00 40,00

20 से 26

7-8

17

भंगेला नाला 10

8,00 100,00

22

10

डैम (कौलार, दाहोद व घोड़ा पछाड़) 15

4,00 40,00

20-30

8-9

 

 

खास बातें -


• जून 2010 से प्रारम्भ होकर नवम्बर 2010 माह तक चला अभियान।
• वर्ल्ड एन्वायरन्मेंट फेडरेशन, अमेरिका और इंटरनेशनल वाटर एशोसिएशन, नीदरलैण्ड का वर्ल्ड वाटर मानिटिरिंग डे के लिए साक्षा प्रयास।
• दुनिया के सभी 6 द्वीपों के करीब 80 देशों के करीब 2 लाख लोग ले चुके हैं इस अभियान में भाग।
• भारत से हुआ था मेरठ स्थित नीर फाउंडेशन का चयन।
• नीर फाउंडेशन द्वारा इस अभियान से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश व उत्तराखण्ड के स्कूल व गैर-सरकारी संगठन जोडे गए।
• नीर फाउंडेशन ने 30 किट के माध्यम से करीब 5000 स्कूली बच्चों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस अभियान से जोड़ा।
• इस दौरान गंगा, यमुना, हिण्डन, काली पूर्व, काली पश्चिम, कृश्णी, धमौला, पांवधोई, अरिल व बूढी गंगा नदियों, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से बहने वाली प्रमुख नहरों, नालों, तालाबों, ऐतिहासिक कुओं, हैण्डपम्पों, सब्मर्सिबल पम्पों सहित झील व डैम के करीब 1450 नमूने के परीक्षण किए गए।
• गांधारी तालाब व नवलदेह के कुएं का भी किया गया परीक्षण।
• तमाम जलस्रोतों के 200 स्थानों पर जाकर किए गए नमूनों के परीक्षण।
• गंगा को छोड़ सभी नदियों के पानी में भयंकर प्रदूषण।
• पीएच, डिसाल्वड ऑक्सीजन, टरबिडिटि व पानी के तापमान जैसे मानक किए गए टेस्ट।
• नीर फाउंडेशन द्वारा वर्ल्ड वाटर मॉनिटिरिंग डे कार्यालय को भेजी गई रिपोर्ट।
• प्रत्येक वर्ष चलाया जाता है यह अभियान।
• रिपोर्ट के आधार पर विश्व के सभी द्वीपों से चुने जाएंगे 12 वाटर चैम्पियन।
• नीर फाउंडेशन की वर्ष 2011 के लिए रहेगी विशेष रणनीति।

 

 

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