बोरवेल जिंदा किया

Submitted by admin on Mon, 12/21/2009 - 15:29
कर्नाटक में डिग्री कॉलेज के प्रधानाचार्य शिवानाजय्या को प्राकृतिक खेती करने वाले किसान और एक लेखक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती पर दो पुस्तकें भी लिखी हैं, जिसे लोगों ने काफी सराहा है।

उनके पास 5 एकड़ की जमीन है। इस क्षेत्र में छिटपुट बारिश होती है। इसी कारण से किसान बोरवेल पर निर्भर रहते हैं। सन् 1990 में शिवा का यहां एक बोरवेल खुदा हुआ था, जिससे अगले चार वर्षों तक अच्छा पानी प्राप्त होता रहा। सन् 1994 में इसकी आपूर्ति में काफी कमी आई। इसके अगले वर्ष इन्होंने बोरवेल को 140 फीट से बढ़ाकर 180 फीट तक गहरा किया। फिर भी इसमें कोई सुधार नहीं आया। इस बोरवेल से 30 फीट की दूरी पर एक छोटी नदी बहती थी। सौभाग्यवश इसके चारों तरफ बंधा बना हुआ था, जिसमें आमतौर पर जनवरी के महीने तक पानी बना रहता है। परन्तु इस नदी से प्राकृतिक रूप से भूजल पुनर्भरण का कोई संकेत नहीं मिलता था। दो साल पहले उनके दिमाग में यह सवाल उठा कि क्यों नहीं छिद्रदार पाइप के सहारे नदी के जल से बोरवेल का पुनर्भरण किया जाए।

अत: उन्होंने इस नदी की सतह तक गहरी नाली खोदी, जिसका 30 फीट लंबा, 15 फीट गहरा और 8 फीट चौड़ा आकार था। इससे नदी का पानी बड़ी आसानी से छिद्रदार पाइप में पहुंचने लगा। अब इन्होंने बोरवेल के नीचे तक इस नदी के पानी की नियमित आपूर्ति करने के लिए इसमें पीवीसी का छिद्रदार पाइप लगा लिया है। इस खाई का मिट्टी से ढक दिया गया है।

इस पाइप में पत्तियों तथा अन्य सामिग्रयों के प्रवेश को रोकने के लिए इसके मुख पर जाली लगाई गई है। इसके अलावा इन्होंने इस पाइप के सबसे निचले छोर पर यानी इस नदी के तल पर गड्ढा बनाया है। इस जल पुनर्भरण व्यवस्था पर 1,100 रुपये का खर्च आया। एक साल बाद जब शिवा ने अपना पम्प चलाया तो वे अवाक रह गए, क्योंकि पानी पूरी तेजी से बाहर निकल रहा था। देखने में ऐसा लग रहा था मानो पहले से दुगुना पानी आ गया हो। आज इस बोरवेल से साल में छः महीने रोजाना एक घंटे के हिसाब से पानी लिया जाता है। फिर भी इसकी आपूर्ति में कोई कमी नहीं आई है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें : जी शिवानाजय्या, कडालीवना, जे सी पुरा,चिक्कानायकानाहल्ली टी के, जिला- टुमकुर 572214, कर्नाटक, फोन : (0816) 350039, स्रोत : श्री पद्रे, पोस्ट वानी नगर, वाया पेरला, केरल – 671552
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