बुन्देलखण्ड : ग्रामोदय अभियान का सच

Submitted by RuralWater on Sun, 04/24/2016 - 14:11
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नया इण्डिया, 19 अप्रैल 2016

लोगों को पता नहीं इस अभियान में क्या होना है और कब होना है। लोगों की भागीदारी भी नहीं।

गँवई माहौल के लिहाज से बुन्देलखण्ड को देश का एक अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में ग्रामोदय अभियान यहाँ शत-प्रतिशत सफल होता दिखना चाहिए। लेकिन सच्चाई कुछ और है। बुन्देलखण्ड की कई ग्राम पंयायतों में 14 अप्रैल को हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण की सूचना लोगों को नहीं थी। इस हालात में उनके सम्बोधन का कोरम पूरा नहीं हुआ। दूसरी ओर, कुछ ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों को सही ट्रेनिंग नहीं मिल पाने से अभियान के सबसे अहम कार्यक्रम ‘ग्राम संसद’ से वे अंजान दिखे।

केन्द्र सरकार के ‘ग्रामोदय से भारत उदय अभियान’ को सफल बनाने की बातें खूब हुईं। पर 14 से 16 अप्रैल तक चले पहले फेज में जनता और नेताओं की भागीदारी उनकी कम दिलचस्पी को बयाँ कर रही है। हालांकि रस्म अदायगी के तौर पर दलितों के मसीहा डॉ. भीमराव अम्बेडकर का प्रचार-प्रसार लगभग हरेक पंचायतों में चला, लेकिन कार्यक्रमों में दलितों की ही गैरमौजूदगी आपसी समानता और भाईचारे के सन्देश को धत्ता बनाती दिखी।

गँवई माहौल के लिहाज से बुन्देलखण्ड को देश का एक अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे में ग्रामोदय अभियान यहाँ शत-प्रतिशत सफल होता दिखना चाहिए। लेकिन सच्चाई कुछ और है। बुन्देलखण्ड की कई ग्राम पंयायतों में 14 अप्रैल को हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण की सूचना लोगों को नहीं थी। इस हालात में उनके सम्बोधन का कोरम पूरा नहीं हुआ। दूसरी ओर, कुछ ग्राम पंचायतों में जनप्रतिनिधियों को सही ट्रेनिंग नहीं मिल पाने से अभियान के सबसे अहम कार्यक्रम ‘ग्राम संसद’ से वे अंजान दिखे।

इसका कारण पूछे जाने पर लोगों ने माना कि न तो गाँव में इसकी सही जानकारी मिल पाई और न ही गाँव के प्रमुख लोगों को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है। गाँव के जिम्मेदार लोगों की मानें तो अधिकारी खुद ग्राम सभाओं को सही ढंग से चलाने में दिलचस्पी नहीं लेते, तो वहीं जिम्मेदार अधिकारी अभियान के पहले फेज को ‘जल्दबाजी में तैयार’ किया गया बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश करते दिख रहे हैं। राजधानी के आसपास के कई इलाकों में भी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अँगुलियों पर गिने जा सकने वाले लोगों की मौजूदगी दर्ज हुई।

कोरम पूरा करने के लिये आते-जाते कई लोगों से हस्ताक्षर कराए जाने के मामले भी सामने आये। राजधानी भोपाल से सटे रातीबड़ और बैरसिया नगर पालिका क्षेत्र में अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान कई जगहों पर ग्राम पंचायतों में लोगों को कार्यक्रम के बारे में सूचना नहीं मिलने की शिकायतें मिलीं। अधिकारी के मुताबिक कई ग्राम पंचायतों में उन्होंने खुद जाकर प्रधानमंत्री के सम्बोधन के लिये टीवी चलवाए। वहीं लगभग सात ग्राम पंचायतों में एक भी महिला की मौजूदगी नहीं दिखाई दी।

बीना जनपद पंचायत के ग्राम बामौरा में स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक कार्यक्रम के बारे में उसी दिन मुनादी हुई, जिसके चलते लोगों को सूचना नहीं मिली। यहाँ जिस स्थान पर कार्यक्रम के प्रसारण की व्यवस्था की गई थी, वहाँ कुल संख्या 5600 के मुकाबले कोरम के 10 फीसदी यानी 56 लोगों के भी ठीक से बैठने की व्यवस्था नहीं थी। बामौरा सरपंच मुन्नी बाई ने पूरे कार्यक्रम के बारे में कोई भी जानकारी होने से स्पष्ट इन्कार कर दिया।

कार्यक्रम के दौरान कोरम पूरा नहीं होने से सम्बन्धित सवाल के जवाब में बामौरा ग्राम पंचायत के नोडल अधिकारी आरके ओझा ने लापरवाह अन्दाज में कहा कि कार्यक्रम के दिन गाँव में स्थानीय बाजार लगा होने के कारण ग्रामीणों का रुझान उस ओर रहा और इसके चलते लोग कार्यक्रम में नहीं पहुँचे।

नजदीकी गौहर ग्राम पंचायत के सरपंच श्याम मनोहर पटेल स्वयं कार्यक्रम में मौजूद ही नहीं रहे। पटेल के स्थान पर कार्यक्रम की व्यवस्थाएँ सम्भालने वाली सचिव सुनीता दीक्षित के मुताबिक अभियान के लिये सभी कार्यक्रम तय कर लिये गए हैं, लेकिन क्या कार्यक्रम तय किये गए हैं, इस बारे में पूछे जाने पर वे ‘ग्राम संसद’ समेत सभी आयोजनों से अंजान दिखीं।

नजदीकी ग्राम पंचायत सनाई के सचिव शिवचरण सेन को अभियान के नोडल अधिकारी के बारे में ही पता नहीं था। तो वहीं विंधई ग्राम पंचायत के सचिव कैलाश प्रसाद चौरसिया ने प्रधानमंत्री के सम्बोधन के दौरान कुल 600 में से 40 लोगों की मौजूदगी की जानकारी दी, वे भी कार्यक्रम में एक समय पर मौजूद नहीं रहे। लगभग सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं और दलितों की मौजूदगी न के बराबर रही। हालांकि कोरम पूरा करने के लिये महिलाओं से भी हस्ताक्षर करवाने जैसी स्थितियाँ देखने को मिलीं।

अभियान के पहले फेज में लोगों की कमी को एक हद तक मानते हुए बीना अनुविभागीय दंडाधिकारी रजनी सिंह ने कहा कि कार्यक्रम के बारे में एक-दो दिन पहले ही सूचना मिली थी और ऐसे में कई स्थानों पर हो सकता है कि मुनादी नहीं होने से लोगों तक सूचना नहीं पहुँची हो।

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