भारत में हरियाणा राज्य के मेवात जिले में मृदा प्रदूषण के संबंध में भारी धातुओं का आंकलन

Submitted by UrbanWater on Thu, 03/19/2020 - 15:08
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान,रुड़की

 मृदा प्रदूषण मृदा प्रदूषण

सारांश

मृदा में भारी धातुओं का आंकलन मानव स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि ये धातुएं या तो कृषि फसलों को प्रदूषित कर सकती हैं या भूजल में गहराई तक जा सकती हैं। मेवात जिले की मृदा में ऐसा कोई अध्ययन नहीं किया गया है। वर्तमान अध्ययन में मृदा की भारी धातु प्रदूषण विशेषताओं की जाँच के लिए हरियाणा राज्य के मेवात जिले के दो ब्लाक से 15 मृदा नमूने और 3 विशिष्ट मृदा प्रोफाइल एकत्र किए गए एवं इनका आर्सेनिक ;( As), (cu),कॉपर;(cd)कैडमियम; (zn),जिंक; (Fe),आयरन ;(Mm)मैंगनीज और (Ni)निकल; की मात्रा के लिए विश्लेषण किया गया है। मृदा में आर्सेनिक, कैडमियम एवं निकल की सांद्रता विषाक्तता के स्तर से कम एवं आयरन, मैंगनीज, जिंक और कॉपर की सांद्रता विषाक्तता के स्तर से अधिक पाई गई है। परिणामों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि अध्ययन क्षेत्र में मृदा भारी धातुओं जैसे आयरन, मैंगनीज, जिंक एवं कॉपर द्वारा प्रदूषित है। प्रमुख घटक विश्लेषण के आधार पर भारी धातुओं को अलग-अलग समूहों में प्राकृतिक या मानवजनित स्रोतों के मध्य पृथक किया गया है।

Abstract

Assessment of heavy metals in soils is important in context of human health as these may either pollute the agricultural crops or may move deeper into the groundwater. There has been no such work been carried out in the soils of Mewat district. In the present study, to investigate the soil heavy metal pollution characteristics 15 samples and 3 typical soil profiles were collected from 2 blocks of Mewat district, Haryana and were analyzed for contents of Arsenic (As), copper(Cu), cadmium (Cd), zinc(Zn), iron (Fe), manganese (Mn) and nickel(Ni). Concentrations of As, Cd and Ni in soils are less than their toxicity levels while concentrations of Fe, Mn, Zn and Cu are found exceeding the toxicity levels. Based on the results, soil in the study area is polluted by heavy metals viz. Fe, Mn, Zn and Cu. According to principal component analysis, distinct groups of heavy metals were discriminated between natural or anthropogenic sources.888 Keywords: Heavy metals, soils, Mewat, Haryana, risk assessment

 प्रस्तावना

मृदा में भारी धातु प्रदूषण विश्व भर में और स्थलीय पारिस्थितिकी प्रणाली में विद्यमान है, मृदा इसके लिए महत्त्वपूर्ण लिंक प्रदान करती है (1,2) और सामान्यतः इसे या तो भूरसायनिक या प्राकृतिक स्रोतों या मानवजनित स्रोतों जैसे कृषि रसायन एवं खनिज उर्वरकों, औद्योगिक अवशेष, गंदा तलछट इत्यादि में से किसी एक के द्वारा उत्पन्न माना गया है (3,4,5,6)। बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, कृषि संबंधी गतिविधियों के परिणामस्वरूप, कृषि मृदा में भारी धातु प्रदूषण एक चिंता का विषय है, क्योंकि इसके कारण विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं (7,8)। मृदा में उनकी गतिशीलता एवं गहरी परतों में उच्च सांद्रता के कारण भूजल दूषित हो सकता है (9,10)। इसलिए मृदा में भारी धातु प्रदूषण का आंकलन करना महत्त्वपूर्ण हो गया है। 

अध्ययन क्षेत्र

1500 वर्ग कि.मी. के भौगोलिक क्षेत्रफल में फैला हुआ हरियाणा का मेवात जिला एक अर्धशुष्क क्षेत्र है (चित्र 1), जिसकी जनसंख्या 10,89,406 (2011-जनगणना, 11) है। यह अपर्याप्त सदाबहार सतही जल स्रोतों के साथ एक मुख्य कृषि क्षेत्र है। इस क्षेत्र में भूजल, सिंचाई और घरेलू उपयोग के लिए जल का मुख्य स्रोत है। इस क्षेत्र में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें गेहूँ, बाजरा और सरसों, एवं सब्जी फसलें जैसे प्याज, टमाटर, बैंगन, मिर्च इत्यादि है। मेवात में वर्ष भर में 23 से 25 दिनों की सीमित अवधि में 577 मि.मी. तक वार्षिक वर्षा होती है।

 चित्र 1: नमूना स्थलों को दर्शाता अध्ययन क्षेत्र चित्र 1: नमूना स्थलों को दर्शाता अध्ययन क्षेत्र

क्रियाविधि

नगीना ब्लॉक में अत्यधिक लवणता की समस्या है और ताऊडू ब्लॉक में भूजल स्तर कम हो रहा है (12) एवं लवणता की समस्या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जलगुणवत्ता को भी प्रभावित कर रही है (13)। नगीना ब्लॉक में लवणता क्षेत्र अरावली पर्वतमाला की ओर शुद्ध जल क्षेत्र में विस्तारित हो रहा है (14)। इस बात को ध्यान में रखकर नगीना और ताऊडू नामक ब्लॉकों में तीन स्थलों जैसे उल्हेटा, करहेड़ा/घागस और ताऊडू से कृषि मृदा नमूने एकत्रित किए गए। मृदा नमूनों को 5 अलग-अलग गहराइयों जैसे 0-30 सेमी, 30-60 सेमी., 60-90, सेमी., 90-120 सेमी., 120-150 सेमी. से एकत्र किया गया। सी.एस.एस.आर.आई. (आई.सी.ए.आर.) करनाल की केन्द्रीय विश्लेषणात्मक सुविधा, में आई सी पी-ओ ई एस ;( ICP–OES) (सिमदजु निर्मित) उपकरण पर मृदा नमूनों को हवा में सुखा कर, पीसकर As, Fe, Mn, Cd, Ni, Cu और zn के लिये विश्लेषित किया गया।

यह उपकरण उत्सर्जन के सिद्वांत पर आधारित है और इसमें ज्ञात किये जाने वाले तत्व के विकिरणों के लक्षणों की तीव्रता का मापन किया जाता है। आर्गन नमूना वाहक गैस की तरह कार्य करती है और कॉइल में रेडियो आवृत्ति जनरेटर द्वारा पैदा दोलायमान चुंबकीय क्षेत्र के साथ अंतःक्रिया करके प्लाज्मा उत्पन्न करने में मदद करती है। जल नमूनों को नेब्यूलाइजर द्वारा ऐस्परेट करा कर प्लाज्मा में अंतःक्षिप्त किया जाता है, जिससे नमूने के भीतर उत्तेजित तटस्थ परमाणु या आयन विशिष्ट तरंग दैध्र्य के विकिरण का उत्सर्जन करते हैं। उत्सर्जित विकिरण को प्रकाश ट्यूब द्वारा एक स्पेक्ट्रोमीटर की स्लिट के प्रवेश द्वार द्वारा देखा जाता है, जो कि विवर्तन जाली को रोशन करता है। विकिरण को इसके घटक तरंग दैध्र्य में पृथक किया जाता है और एक फोटो गुणक टयूब पर रिकार्ड किया जाता है। फोटो गुणक ट्यूब पड़ने वाले प्रकाश की तीव्रता के समानुपाती एक सिगनल पैदा करती है। इस सिगनल को मापन तंत्र द्वारा संसाधित किया जाता है। इसका उपयोग जल, मृदा और पौधों के अर्क में मौजूद 50 से अधिक तत्वों के आंकलन में किया जाता है। यह एक ही समय में कम्प्यूटर के माध्यम से उपकरण को कैलिबे्रट करने के दौरान चुने गये सभी तत्वों को मापता है।

मृदा गठन उल्हेटा में दुमटी बालू से रेतमय दुमट तक है, करहेड़ा/घागस में रेतमय दुमट से सादमय दुमट तक है और ताऊडू में रेतमय दुमट है। प्रधान घटक विश्लेषण (पीसीए) एक बहुचर मूल्यांकन तकनीक है जिसमें बड़े विचरणों की व्याख्या की जाती है लेकिन समूह बनाने के लिए चरों की संख्या कम कर दी जाती है और इस तकनीक का उपयोग भारी धातु संदूषण के स्थानिक एंव सामयिक प्रतिरूपों के आंकलन में उपयोग किया गया है (15)।

परिणाम एवं चर्चा

तीनों नमूना स्थलों के लिए सभी नमूनों की औसत सांद्रता तालिका 1 में दर्शाई गई है। मेवात की मृदा में As,Cd, Ni, Cu, Fe, Mn एवं zn की औसत मात्रा क्रमशः 0.0271 ppm 0.0272 ppm 0.1182 ppm 41.1 ppm 511.5 ppm 567.9 ppm एवं 18.8 ppm पाई गई। सभी स्थलों के बीच में से उल्हेटा एवं करहेड़ा में As,Cd,Ni, की औसत मात्रा क्रमशः 0.0316 ppm 0.0306 ppm 0.1528 ppm एवं 0.0282 चचउए 0.0288 ppm 0.1192 ppm दर्ज की गई। ताऊडू में इन्हीं अवयवों की औसत मात्रा क्रमशः 0.0216 ppm 0.0222 ppm 0.0826 ppm है। आमतौर पर यह देखा गया कि 30 से 60 cm की गहराई पर As, Fe, Mn, Cd, Ni, Cu की सांद्रता अधिक पाई गई।

तालिका 1: मेवात की मृदा में भारी धातु सांद्रता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

स्थल

सांद्रता

As

Cd

Ni

Cu

Fe

Mn

Zn

उल्हेटा

न्यूनतम

0.0225

0.0212

0.1030

26.8

333.8

468.0

12.2

उच्चतम

0.0419

0.0399

0.2260

57.7

529.8

716.0

19.6

औसत

0.0316

0.0306

0.1528

39.8

441.6

580.0

15.7

करहेड़ा/घागस

न्यूनतम

0.0133

0.0138

0.0587

41.8

528.8

216.0

11.7

उच्चतम

0.0526

0.0527

0.2360

85.1

613.8

442.0

33.8

औसत

0.0282

0.0288

0.1192

55.6

565.8

359.0

18.8

ताऊडू

न्यूनतम

0.0178

0.0184

0.0650

20.0

403.8

667.0

9.2

उच्चतम

0.0244

0.0250

0.1020

33.5

644.8

888.0

35.7

औसत

0.0216

0.0222

0.0826

27.8

527.2

764.8

21.8

कुल

न्यूनतम

0.0133

0.0138

0.0587

20.0

333.8

216.0

9.2

उच्चतम

0.0526

0.0527

0.2360

85.1

644.8

888.0

35.7

औसत

0.0271

0.0272

0.1182

41.1

511.5

567.9

18.8

विषाक्तता सीमा (मिन्हास और सामरा, 2004) (16)

 

15.000

15.000

1.000

10.000

150.0

10.0

सहसंबंध

तीनों नमूना स्थलों के सहसंबंध की मैट्रिक्स को तालिका 2 से 4 में दर्शाया गया है। सभी स्थलों पर आर्सेनिक ;(As) का Cd एवं Ni के साथ मजबूत सकारात्मक सहसंबंध है। उल्हेटा में थ्म एवं ब्न और छप एवं डद के मध्य मजबूत सकारात्मक सह-संबंध पाया गया। उल्हेटा में As एवं Cd के साथ Mn का उच्च और सकारात्मक सह-संबंध भी पाया गया (तालिका 2)।

 

तालिका 2: उल्हेटा में भारी धातुओं के मध्य सहसंबंध

 

As

Cd

Ni

Cu

Fe

Mn

Zn

As

1

 

 

 

 

 

 

Cd

0.997

1

 

 

 

 

 

Ni

0.964

0.946

1

 

 

 

 

Cu

0.979

0.960

0.991

1

 

 

 

Fe

0.879

0.838

0.944

0.957

1

 

 

Mn

0.806

0.770

0.34

0.892

0.920

1

 

Zn

-0.545

-0.571

-0.598

-0.499

-0.337

-0.615

1

तालिका 3 करहेड़ा/घागस में भारी धातुओं के मध्य सहसंबंध

 

As

Cd

Ni

Cu

Fe

Mn

Zn

As

1

 

 

 

 

 

 

Cd

1.000

1

 

 

 

 

 

Ni

0.986

0.985

1

 

 

 

 

Cu

-0.371

-0.379

-0.246

1

 

 

 

Fe

0.500

0.508

0.352

-0.892

1

 

 

Mn

0.778

0.778

0.716

0.189

0.563

1

 

Zn

0.019

0.024

-0.130

-0.388

0.698

0.535

1

तालिका 4: ताऊडू में भारी धातुओं के मध्य सहसंबंध

 

As

Cd

Ni

Cu

Fe

Mn

Zn

As

1

 

 

 

 

 

 

Cd

1.000

1

 

 

 

 

 

Ni

0.971

0.975

1

 

 

 

 

Cu

-0.491

-0.506

-0.685

1

 

 

 

Fe

-0.481

-0.495

-0.663

0.958

1

 

 

Mn

-0.676

-0.681

-0.740

0.650

0.811

1

 

Zn

0.623

0.620

0.584

-0.249

-0.469

-0.897

1

करहेड़ा में Fe का As और Cd के साथ अच्छा और सकारात्मक सह-संबंध देखा गया जबकि Fe का Cu के साथ उच्च नकारात्मक सह-संबंध पाया गया (तालिका-3)। ताऊडू में Fe का Mn के साथ मजबूत सकारात्मक सह-संबंध है (तालिका 4)। इन सह संबंधों में विचरण विभिन्न स्रोतों से भारी धातुओं के योगदान के कारण हो सकता है।

भारी धातुओं का गहराई वितरण

उल्हेटा और ताऊडू में 30 सेमी. की गहराई तक भारी धातु की सांद्रता में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन इसके बाद वृद्धि धीरे-धीरे हुई है, जबकि करहेड़ा/घागस में सभी गहराई पर As, Fe, Mn एवं Cu की सांद्रता में निरंतर वृद्धि पाई गई है लेकिन Cd, Ni एवं Zn के लिए ये प्रवृत्ति समान नहीं है।

प्रधान घटक विश्लेषण(PCA)

प्रधान घटक विश्लेषण ; (PCA) की सांख्यिकी तालिका 5,6,7 में दर्शायी गई है जिसमें eigenvalue विचरण का प्रतिशत एवं संचयी विचरण शामिल है। यह देखा गया है कि उल्हेटा में केवल 1 कारक (तालिका 5) और 2 कारक (तालिका 6 एवं 7) की eigenvalue 1 से अधिक है। उल्हेटा में कारक 1 आंकड़ों में विचरण का 84.787% (तालिका 3), करहेड़ा में कारक 1 एवं 2 विचरण का क्रमश 61% और 21.656% जबकि ताऊडू में कारक 1 एवं 2 विचरण का क्रमशः 72.876% और 15.967%का मान दर्शाते हैं।

तालिका 5: उल्हेटा में कुल विचरण

 

F1

F2

F3

Eigen value

5.935

0.740

0.325

% विचरण

84.787

10.575

4.638

संचयी %

84.787

95.362

100.000

उल्हेटा में प्रधान घटक 1 ;(PCI) का 84.79% का योगदान , Cu, As, Cd, Ni एवं Mn द्वारा सकारात्मक रूप से और zn द्वारा नकारात्मक रूप से प्रभावित था जबकि PCI 2 का 10.58% का योगदान Zn, Fe, Cu, As, Cd द्वारा सकारात्मक रूप से और Nia एवं Mn द्वारा नकारात्मक रूप से प्रभावित था।

करहेड़ा में PCI 1 का 61% का योगदान Cu को छोड़कर बाकी सभी भारी धातुओं द्वारा सकारात्मक रूप से प्रभावित था, जबकि PCI 2 का 26.66% का योगदान Ze,Fn द्वारा सकारात्मक रूप से और Cu, As, Cd, Ni एवं Mn द्वारा नकारात्मक रूप से प्रभावित था।

ताऊडू में PCI 1 का 72.88%का योगदान As, Cd, Ni, Zn द्वारा सकारात्मक रूप से और Cu, Fe एवं Mn द्वारा नकारात्मक रूप से प्रभावित था जबकि PCI 2 का 15.97% का योगदान सभी भारी धातुओं द्वारा सकारात्मक रूप से प्रभावित था।

तालिका 6: करहेड़ा/घागस में कुल विचरण

 

F1

F2

F3

Eigen value

4.270

1.866

0.864

% विचरण

61.004

26.656

12.341

संचयी %

61.004

87.659

100.00

तालिका 7: ताऊडू में कुल विचरण

 

F1

F2

F3

Eigen value

5.101

1.118

0.781

% विचरण

72.876

15.967

11.157

संचयी %

72.876

88.843

100.000

निष्कर्ष

मेवात में मृदा नमूनों का गहराई के अनुरूप विश्लेषण दर्शाता है कि मृदा में As, Cd एवं Ni की सांद्रता उनके विषाक्तता के स्तर से कम है जबकि Fe, Mn, Zn एवं Cu की सांद्रता उनके विषाक्तता के स्तर से अधिक पाई गई। परिणामों के आधार पर अध्ययन क्षेत्र मे मृदा को भारी धातुओं द्वारा आंशिक रूप से प्रदूषित माना जा सकता है। प्रधान घटक विश्लेषण के अनुसार भारी धातुओं को अलग-अलग समूहों में प्राकृतिक या मानवजनित स्रोतों के मध्य पृथक किया गया। मृदा एवं फसल प्रबंधन की उचित पद्धतियों को अपनाकर पौधों द्वारा प्रदूषकों के फैलने को रोकने में मदद मिल सकती है एवं इन्हें मृदा में छोड़कर उपयुक्त तकनीक द्वारा उचित उपचार की आवश्यकता होती है।

Reference

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