भाषा का जल

Published on
1 min read

भाषा के जल की नदी है
जैसे यह जल है भाषा का
जैसे भाषा ही जल है
जैसे कबीर का कूप है कहीं आसपास
जैसे कूप में जल नहीं
भाषा है कबीर की

इस नदी में नाव है एक
इस तरह इस नदी में
जल के अलावा भी कुछ है
इस तरह नदी के जल को
सहूलियत से बरतने के लिए
भाषा पतवार है

जल की भाषा नाव की भाषा से अलग है
नदी की गहराई पतवार की पहुंच से दूर
भाषा की नदी में नाव डूबने का है खतरा

अब कभी
भाषा के जल में नाव डोलती है
कभी नहीं

अब कभी
नदी की सांवली गहराई में दिखती पतवार
कभी नहीं
अब कभी
कबीर के कूप की भाषा में हम जल ढूंढते
कभी
नदी, भाषा और जल से परे कबीर।

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

संबंधित कहानियां

No stories found.
India Water Portal - Hindi
hindi.indiawaterportal.org