भूजल में उभरते हुए दूषित पदार्थ और उनके निवारण

Submitted by HindiWater on Mon, 03/30/2020 - 13:01
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की

सारांश

उभरते हुए दूषित पदार्थ (Emerging Contaminants) वे रसायन हैं जो पेयजल आपूर्ति में लेश सीमा तक संसूचित किये गये हैं और जिनके मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव अभी तक ज्ञात नहीं हैं। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद, पेट्रोलियम उत्पाद, कीटनाशक, हर्बिसाइड्स और अंतःस्रावी विघटनकारी यौगिक शामिल हैं। इन दूषित पदार्थों में जहरीली धातुएं, वी0¨0सी0 और कीटनाशक शामिल हैं। शहरीकरण, अद्योगिकीकरण और बदलती जीवन शैली, उभरते हुए प्रदूषण के कारण भूजल प्रदूषण की समस्या को बढ़ाती है। कृषि क्षेत्र में उर्वरकों, कीटनाशकों, कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग भी भूजल प्रदूषण को बढ़ावा देता है। उभरते दूषित पदार्थों के विश्लेषण के लिए उच्च कोटि इंस्ट्रूमेंटेशन की आवश्यकता है जैसे कि आई0सी0पी0-एम0एस0, जी0सी0-एम0एस0/एम0एस0। वर्तमान पत्र में, उभरते हुए दूषित पदार्थ के स्रोतों जैसे फार्मास्यूटिकल्स, व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों, पेट्रोलियम उत्पादों (BETEX, MTBE आदि), कीटनाशकों और उनके रासायनिक व्यवहारों की विस्तार से चर्चा की गई है। इसके अलावा, भूजल में उभरते हुए प्रदूषणों के निवारण के लिए उपलब्ध विभिन्न तरीकों पर भी चर्चा की गई है। यह अनुमान लगाया जा सकता है कि पारंपरिक पंप-एंड-ट्रीटमेंट सर्वाधिक प्रचलित भूजल उपचार तकनीक है। हालांकि, अत्यधिक लागत और पंप-एंड-ट्रीट सिस्टम द्वारा उपचार की गैर-विश्वसनीयता के कारण, आजकल नई प्रौद्योगिकियां, विशेष रूप से मिट्टी वाष्प निष्कर्षण (एस0वी00) के साथ वायु प्रसार (Air Sparging) ज्यादा प्रभावशाली साबित हुई है। वायु प्रसार की केस स्टडी बहुत कम समय में बड़े अनुपात में दूषित सांद्रता को कम करने की अपनी क्षमता को प्रदर्शित करती है।

Abstract

Emerging contaminants are the chemicals that have been detected in global drinking water supplies at trace levels and for which the risk to human health is not yet known. They include pharmaceuticals, personal care products, pesticides, herbicides and endocrine disrupting compounds. These material include toxic metals, Volatile organic compounds (VOCs) and pesticides. Urbanization, industrialization and changing life style further aggravates the problem of groundwater pollution. Indiscriminate use of fertilizers, pesticides, insecticides in agricultural field also increase groundwater contamination. Analysis of emerging contaminants requires high level advanced intrumentations viz; ICP-MS, GC-MS/MS, FTIR etc. In the present paper, the sources of emerging contaminants viz; pharmaceuticals, personal care products, petroleum products (BETEX, MTBE etc.), pesticides, herbicides and their chemical behaviour are discussed in details. Besides this, different techniques available for remediation of emerging pollutants from groundwater have also been discussed. Conventional pump-and-treat is the groundwater remediation technology most frequently used in the past. However, due to excessive costs and the non-reliability of remediation with pump-and-treat systems, the newer technologies, particularly air sparging with SVE and subsequent treatment, now dominate. The case studies of air sparging demonstrate its capability of reducing contaminant concentrations in large proportions in a short span of time.

प्रस्तावना

भूजल मानव गतिविधियों और पारिस्थितिक तंत्र का समर्थन करने वाला एक केंद्रीय संसाधन है। दूषित भूजल पीने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। सेप्टिक टैंक कचरे के संदूषण के कारण हेपेटाइटिस और पेचिश जैसे रोग हो सकते हैं। कूप जल में उपस्थित विषाक्त पदार्थ आपूर्ति में विषाक्तता को बढ़ाती है। दूषित भूजल से वन्यजीवों को भी नुकसान हो सकता है। कुछ अन्य प्रकार के कैंसर भी प्रदूषित पानी के दीर्घकाल तक प्रयोग में आने से हो सकते हैं। शहरीकरण, औद्योगीकरण और बदलती जीवन शैली भूजल प्रदूषण की समस्या को और बढ़ाती है। कृषि क्षेत्र में उर्वरकों, कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से भी भूजल प्रदूषण बढ़ता है।

भारत में, शहरीकरण और तेजी से जनसंख्या वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों के शोषण की दर में वृद्धि और नगरपालिका ठोस कचरे (MSW) के उत्पादन द्वारा पर्यावरण के क्षरण को बढ़ावा दिया है। विकासशील देशों के अधिकांश शहरों के लिए नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट (MSW) का निपटान एक बड़ी समस्या है। भारत में, ज्यादातर शहरों के निचले इलाकों में नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट का इधर-उधर फेंकना आम बात है। अनियंत्रित तरीके से कचरे को फेंकना आसपास के वातावरण के लिए कई तरह की समस्याएं पैदा करता है। भूजल प्रदूषण नगरपालिका ठोस कचरे को फेंकने के गंभीर प्रभावों में से एक है। कचरा स्थल के पास के भूजल स्रोतों को लीचैट बहुत प्रभावित कर सकता है

उभरते हुए दूषित तत्व वे रसायन हैं जिनको वैश्विक पेयजल आपूर्ति में सूक्ष्म स्तर पर पाया गया है और जिनका मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम अभी तक ज्ञात नहीं है इनमें फार्मास्यूटिकल्स, व्यक्तिगत देखभाल उत्पाद, कीटनाशक, हर्बिसाइड्स, जहरीले धातु, वीओसी और अंतःस्रावी विघटनकारी यौगिक शामिल हैं।

पर्यावरण में उपस्थित उभरते हुए प्रदूषक

उभरते हुए संदूषक (ECs), जिन्हें उभरते हुए कार्बनिक संदूषक और उभरते सरोकारों के प्रदूषक (CECs) के रूप में भी जाना जाता है, दुनिया भर में जल निकायों में पाये जाने वाले प्राकृतिक और सिंथेटिक रसायनों और उनके परिवर्तन उत्पादों का एक समूह है, जिनकी वर्तमान में पर्यावरण में जाँच नहीं होती हैं लेकिन उनमें पर्यावरणीय क्षति, पारिस्थितिक तंत्र और मानव स्वास्थ्य पर संदिग्ध हानिकारक प्रभाव पैदा करने की एक उच्च क्षमता है ।

उभरते हुए प्रदूषक के स्रोत

उभरते हुए संदूषक विभिन्न स्रोत्रों से मिलते हैं:-

  • एल्ड्रिन, डीडीटी, डीडीई, डीडीडी, कुल बीएचसी, मेथोक्सीक्लोर, एंडोसल्फान कृषि गतिविधियाँ
  • वी.अ¨.सी.-क्लोरोमीथेन-एडहेसिव रिमूवर्स और एयरोसोल स्प्रे पेंट
  • टेट्राक्लोरोइथेन-ड्राई क्लीनिंग
  • बेंज़ीन, क्लोरोबेंज़ीन-तंबाकू स्मोक, स्टोर्ड फ्यूल्स, कार का एग्जॉस्ट, ज्वालामुखी, फारेस्ट फायर्स, प्रोडक्शन ऑफ़ प्लास्टिक, रेसिंस और सिंथेटिक फाइबर्स
  • बी.टी.ई.उक्स. (BTEX) बेंजीन; टोलीन; इथाइलबेन्जीन; और ओ. अॅम., और पी-जाइलीन)-पेट्रोलियम उत्पाद का रिसाव
  • एम.टी.बी.ई. (MTBE) अंडरग्राउंड गैसोलीन स्टोरेज टैंक्स से रिसाव
  • उभरते हुए संदूषकों का पता लगाना

लंबे समय से उभरते हुए संदूषकों की उपस्थिति की बात कही जाती रही है। संदूषकों की सांद्रता मिली ग्राम/लीटर से नैनो ग्राम/लीटर तक और कभी-कभी इससे भी कम होती है लेकिन ऐसे कम सांद्रता वाले इन संदूषकों की खोज, पहचान और निगरानी केवल पिछले दशक के दौरान ही नए परिष्कृत पहचान विधियों और विश्लेषणात्मक प्रौद्योगिकियों के विकास के कारण संभव हो पायी है । इस समूह में यौगिकों और रसायनों की सूची काफी बड़ी है और नए वाणिज्यिक रसायनों, उपयोग में बदलाव और वर्तमान में व्यापक उपयोग में रसायनों के निपटान और इस वर्गीकरण का हिस्सा बनने वाले नए अणुओं की पहचान के साथ संदूषकों की सूची का विस्तार हो रहा है। इन संदूषकों की निम्न स्तर सांद्रता का पता लगाने के लिए उन्नत इंस्ट्रूमेंटेशन अर्थात; ICP-MS, ICP-MS/MS. GC-MS. GC-MS/MS  की आवश्यकता होती है।

उभरते हुए संदूषकों के उपचार हेतु उपलब्ध तकनीक

मिट्टी और भूजल संदूषण का आम मार्ग भूमिगत भंडारण टैंक, जिनका उपयोग गैस स्टेशनों, वाणिज्यिक, औद्योगिक और आवासीय यौगिकों द्वारा किया जाता है, का रिसाव है। उपसतह माध्यम को किसी भी तरह के खतरनाक संदूषण से बचाया जाना चाहिए क्योंकि मिट्टी प्रदूषकों के लिए एक स्थायी निवास के रूप में कार्य करती है और जल विज्ञान चक्र की गतिशीलता उन्हें भूजल जलभृत् तक पहुंचाती है। किसी विशेष दूषित साइट को मौजूदा स्थितियों में इष्टतम उपचार की अनुमति देने के लिए विभिन्न प्रक्रियाओं के संय¨जन की आवश्यकता हो सकती है। एक सुरक्षित और स्वीकार्य स्तर तक संदूषण को कम करने के लिए जैविक, भौतिक और रासायनिक प्रौद्योगिकियों का एक दूसरे के साथ संयोजन में उपयोग किया जा सकता है। भले ही दूषित साइटों के उपचार के लिए कई प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं, लेकिन चयन दूषित और साइट की विशेषताओं, नियामक आवश्यकताओं, लागतों और समय पर निर्भर करता है। चूँकि अधिकांश उपचारात्मक प्रौद्योगिकियां साइट-विशेष हैं, उपयुक्त तकनीकों का चयन अक्सर मुश्किल होता है, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, दूषित साइट का सफल उपचार, संदूषको और मिट्टी के गुणों और सिस्टम के प्रदर्शन के आधार पर रीमेडिएशन टेक्नोलॉजी के संचालन के उचित चयन, डिजाइन और समायोजन पर निर्भर करता है।

तेल उत्पादन, वितरण और उपभोग की प्रक्रिया में हर बिंदु पर, पेट्रोलियम उत्पादों का भंडारण हमेशा टैंकों में संग्रहीत किया जाता रहा है। तेल फैलने की क्षमता महत्वपूर्ण है और कई बार बिखरे हुए तेल के प्रभाव पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन जाते है। भूमिगत और ज़मीन के ऊपर के भंडारण टैंकों का रिसाव, पेट्रोलियम अपशिष्टों का अनुचित निपटान और आकस्मिक फैलाव पेट्रोलियम उत्पादों द्वारा मिट्टी और भूजल संदूषण के प्रमुख कारण हैं। पिछले दो दशकों में पेट्रलियम उत्पादों से दूषित साइटों का उपचार करने के लिए अलग-अलग सुधारात्मक प्रौद्योगिकियां संयुक्त राज्य अमेरिका में विकसित हुई हैं।

एयर स्पार्जिंग

पिछले 15 वर्षों से भूजल में घुलित वी00सी0 द्वारा दूषित साइटों के उपचार हेतु इन सीटू एयर स्पार्जिंग तकनीक का प्रयोग हो रहा है (एडम्स एंड रेड्डी, 2003) इसमें भूजल संदूषकों का वायुमंडलीय हवा को दबाव से भूजल के संतृप्त क्षेत्र में इंजेक्ट करके वाष्पीकरण और उपसतह ऑक्सीजन सांद्रता को बढ़ाकर जैव निम्नीकरण को बढ़ावा देना शामिल है (जी.डब्ल्यू.आर.टी.ए.सी.,1996) बैनर और अन्य, 2002)। एयर स्पार्जिंग के दौरान होने वाले तीन दूषित निष्कासन तंत्रों में शामिल हैं: (1) घुलित वी00सी0 की इन सीटू स्ट्राइपिंग (2) केशिका फिंरज में भूमि जल स्तर के नीचे मौजूद और फंसे हुए दूषित पदार्थों का वाष्पीकरण, और (3) एरोबिक बायोडीग्रेडेशन (नयेर, 1996) एयर स्पार्जिंग सक्रिय भूजल पम्पिंग के बिना दूषित मिट्टी और भूजल को उपचारित करने का एक साधन है (बास और अन्य, 2000) यह तकनीक गैसोलीन और अन्य ईंधन घटकों और क्लोरीनयुक्त सॉल्वैंट्स सहित वाष्पशील और अर्ध-वाष्पशील मिट्टी और भूजल दूषित पदार्थों की एक विस्तृत श्रृंखला को उपचारित करती है (जी0डब्ल्यू0आर0टी00सी0,1996ए)। एयर स्पार्जिंग तकनीकों का उपयोग करते हुए पेट्रोलियम दूषित मिट्टी/भूजल उपचार के लिए उपचार लागत यूएस $20-यूएस $50 प्रति क्यूबिक यार्ड मिट्टी होती है (यू0एस00पी00, 1995)

भूजल पम्प और उपचार तकनीक

पिछले दशक के दौरान, दूषित जलभृत के उपचार पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया है। एक दूषित जलभृत की सफाई के लिए सबसे आम तकनीकों में से एक तकनीक पम्प-एन्ड-ट्रीट है (बेयर और सन, 1998; थीस और अन्य, 2003) जहां दूषित जलभृत में विभिन्न स्थानों पर निष्कर्षण कुओं को बनाया जाता है और संदूषित पानी को पंप करके निकाला जाता है। बाद में विभिन्न उपचार तकनीकों द्वारा पम्प किए गए पानी से संदूषको को हटा दिया जाता है (मैके और चेरी, 1989; झैंग और वैंग, 2002) एक बार उपचार के बाद, भूजल को या तो जलभृत में फिर से इंजेक्ट किया जाता है या सतह पानी स्रोत में, जैसे की झील या नदी में, या नगरपालिका के सीवेज प्लांट में डिस्चार्ज किया जाता है। पम्प-एन्ड-ट्रीट सिस्टम को दो अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया जा सकता हैः प्रदूषण को फैलने से रोकने के लिए और दूषित द्रव्यमान को हटाने के लिए (सुथेरसन,1997; बेयर और अन्य, 2002) आज, पम्प-एन्ड-ट्रीट सिस्टम को अब भूजल सुधारात्मक प्रणालियों के बीच सबसे अच्छा या सबसे लोकप्रिय विकल्प नहीं माना जाता है क्योंकि सफाई के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक समय और प्रणाली का अप्रभावी होना है, हालांकि वे अभी भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण संदूषण वाले क्षेत्रों में उपयोगी हैं, (¨एर्स और अन्य, 1997; बेयर और अन्य, 2002)

पम्प-एन्ड-ट्रीट सिस्टम उन साइटों पर लागू किया जा सकता है जिनमें विभिन्न प्रकार का दूषित पानी होता है, जिसमें वी00सी0, एस0वी00सी, ईंधन और घुलित धातुएं शामिल हैं (सी0पी000, 1998) यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पम्प-और-ट्रीटमेंट प्रौद्योगिकियां खंडित चट्टान या मिट्टी की साइटों पर लागू नहीं होती हैं और यह उन दूषित पदार्थों के लिए एक अपेक्षाकृत खराब विकल्प है जो मिट्टी को सोखता है या जिनके पास कम घुलनशीलता है (पसिफि़क नार्थवेस्ट नेशनल लेबोरेटरी, 1994; झैंग और वैंग, 2002) सतही उपचार इकाइयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण लागत परिचालन लागत (ऊर्जा, रखरखाव, आदि) है, जो पारंपरिक रूप से साइट और दूषित विशेषताओं के आधार पर यूएस $1 से यूएस $100 प्रति 1000 गैलन भूजल तक होती है। इसलिए पम्प और ट्रीटमेंट तकनीकों को प्रमुख उपचार विकल्प के रूप में चुनने से पहले किसी साईट की सावधानीपूर्वक जांच करना महत्वपूर्ण है।

निष्क्रिय/प्रतिक्रियाशील उपचार दीवारें

इन सीटू उपचार दीवारों का उपयोग एक उभरती हुई तकनीक है जिसे पिछले कुछ वर्षों में ही विकसित और कार्यान्वित किया गया है। उपचार की दीवारें खतरनाक अपशिष्ट स्थलों पर पाए जाने वाले दूषित भूजल के उपचार के लिए भूमिगत रूप से स्थापित संरचनाएं हैं (सुथेरसन,1997; बिरके और अन्य, 2003)। दीवार की संरचना के माध्यम से दूषित पदार्थों को ले जाने के लिए उपचार की दीवारें पानी की प्राकृतिक गति पर निर्भर करती हैं (नय्यर, 1996) जैसे ही दूषित भूजल उपचार की दीवार से गुजरता है, दूषित पदार्थ या तो उपचार की दीवार में फंस जाते हैं या दीवार से बाहर निकलने वाले हानिरहित पदार्थों में बदल जाते हैं (यू0एस00पी00,1996ए) निष्क्रिय उपचार दीवारों के लिए लक्षित संदूषक समूह में वी00सी0, एस0वी00सी0 और अकार्बनिक आते हैं (एफ़0आर0 टी0आर0, 1999ए)।

दो मुख्य प्रकार की उपचार दीवारें

पारगम्य प्रतिक्रियाशील खाईः यह उपचार की दीवारों का सबसे सरल रूप है और इसमें एक खाई होती है जो प्लूम की पूरी चौड़ाई में फैली होती है। सिस्टम को एक खाई खोदकर और पारगम्य सामग्री के साथ भरकर स्थापित किया जाता है । जैसे ही दूषित प्लूम दीवार के माध्यम से आगे बढ़ता है, दूषित पदार्थों को विभिन्न द्रव्यमान हस्तांतरण प्रक्रियाओं जैसे एयर स्ट्राइपिंग, एस0वी00 और अवशोषण जैसी विभिन्न स्थानांतरण प्रक्रियाओं द्वारा संदूषकों को हटा दिया जाता है (सुथेरसन, 1997; बिरके और अन्य, 2003)

फनल और गेट सिस्टम: जब खाई खोदने के लिए दूषित प्लूम बहुत बड़े या बहुत गहरे होते हैं तब इसका मुख्य रूप से उपयोग किया जाता है। इस समस्या को दूर करने के लिए, प्लूम के उपचार के लिए कम पारगम्यता वाली कट-ऑफ दीवारों से युक्त एक सिस्टम को एक छोटे से प्रतिक्रियाशील दीवार पर दूषित भूजल को फनल में स्थापित किया जाता है। फनल और गेट सिस्टम के साथ काम करते समय, गेट का उपयोग प्रतिक्रियाशील दीवार के माध्यम से दूषित भूजल को पारित करने के लिए किया जाता है, और फनल का उपयोग सिस्टम में अपने गेट के माध्यम से पानी को बल देने के लिए किया जाता है। उपचार की दीवारों का उपयोग अक्सर वी00सी0, एस0वी00सी0 और अकार्बनिक द्वारा दूषित भूजल के लिए होता है। यह तकनीक अन्य ईंधन हाइड्रोकार्बन के उपचार में अप्रभावी है (एफ़0आर0टी0आर0,1999; बिरके और अन्य, 2003) उपचारित दीवारों का उपयोग करने की पूरी लागत उपलब्ध नहीं है। हालांकि, लागत को प्रतिक्रियाशील मीडिया और भूजल में संदूषक सांद्रता पर निर्भर माना जाता है।

बायोइसर्लपिंग

बायोइसर्लपिंग एक नई तकनीक है जो हाइड्रोकार्बन संदूषकों के एरोबिक बायोरिमेडिशन को बढ़ावा देते हुए भूजल और मिट्टी से मुक्त उत्पाद को पुनप्र्राप्त करने के लिए बायोवेंटिंग और वैक्यूम-संवर्धित पंपिंग के तत्वों को जोड़ती है (सी0पी000,1998; एफ0आर0टी0आर0,1999)। बायोइसर्लपिंग सिस्टम में कुए होते हैं, जिसमें एक समायोज्य लंबाई की स्लरप ट्यूबलगी होती है। स्लरप ट्यूब को हल्के गैर-जलीय चरण तरल (LNAPL) परत में उतारा जाता है, जो वैक्यूम पंप से जुड़ा होता है, जिससे भूजल के साथ-साथ मुक्त उत्पाद निकला जाता है। यह उथले भूजल के साथ-साथ 30 मीटर के नीचे की भूजल साइटों पर लगाया जा सकता है (मिडवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, 1998; क्रेसप, 1999; येन और अन्य, 2003)

पराबैंगनी-ऑक्सीकरण उपचार

पराबैंगनी (यूवी)-ऑक्सीडेशन उपचार विधि भूजल उपचार की महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में से एक है। ये सिस्टम आमतौर पर यूवी प्रकाश के साथ ऑक्सीजन आधारित ऑक्सीडेंट (जैसे ओजोन या हाइड्रोजन पेरोक्साइड) का उपयोग करते हैं। इस प्रक्रिया में यूवी बल्ब एक रिएक्टर में रखे जाते हैं, जहां ऑक्सीडेंट भूजल में उपस्थित दूषित पदार्थों के संपर्क में आता है (असांत-दुआह, 1996; ब्रिल्ट्स और अन्य, 2003; लिआंग और अन्य, 2003)। यह तकनीक सभी प्रकार के पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू की जा सकती है। यह वी00सी0, एस0वी00सी0, एरोमेटिक्स, अल्कोहल, थैलेट्स, कीटोन, एल्डीहाइड्स, फिनोल, इथर, ग्लाइकोल्स पर भी काम करता है। ऑर्डिनेंस कंपाउंड्स, डाइऑक्सिन, पीसीबी, पीएएच, सीओडी, बीओडी, टीओसी और ऑर्गेनिक कार्बन के अन्य रूपों (जी0डब्ल्यू0आर0टी00सी0) पर भी काम करता है। इस तकनीक का उपयोग करने की अनुमानित लागत यूएस $10 से यूएस $50 प्रति 1000 गैलन उपचारित जल है।

बायोस्पार्जिंग

बायोस्पार्जिंग प्रक्रिया में, हवा और पोषक तत्वों को भौम जल स्तर के नीचे की मिट्टी में इंजेक्ट किया जाता है, जहां यह प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले जीवों द्वारा दूषित पदार्थों के क्षरण को बढ़ाएगा (यू0एस00पी00,1995; म्यूहेलबर्गर और अन्य, 1997; ब्राउन और अन्य,1999)। इस इन सीटू तकनीक में आम तौर पर देसी सूक्ष्मजीवों का उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग भूजल में घुले, या भौम जल स्तर के नीचे मिट्टी में अधिश¨षित पेट्रोलियम उत्पादों पर किया जा सकता है। इसका उपयोग अक्सर एस0वी00 के साथ संयोजन के रूप में किया जाता है, खासकर जब वाष्पशील मौजूद होते हैं (यू0एस00पी00,1998एय म्युएलबर्गर और अन्य, 1997; आर000जी0, 2000)। बायोस्पार्जिंग का उपयोग अधिकांश प्रकार के पेट्रोलियम दूषित स्थलों पर किया जा सकता है, लेकिन अधिक समय लेने के कारण यह भारी पेट्रोलियम पर कम से कम प्रभावी है (यू0एस00पी00, 1995)। इसका उपयोग अक्सर मिड-वेट और लाइटर पेट्रोलियम वाली साइटों पर किया जाता है (यू0एस00पी00,1998) म्यूहेलबर्गर और अन्य,1997; ब्राउन और अन्य, 1999)

भूजल परिसंचरण कुएं

भूजल परिसंचरण कुएं एक नई और विकासशील तकनीक है जिसका उपयोग भूजल और संतृप्त मिट्टी से दूषित पदार्थों को हटाने के लिए किया जाता है (यू0एस00पी00,1998सी)। यह डिजाइन में अपेक्षाकृत सरल है और इसमें रखरखाव की आवश्यकताएं कम हैं। भूजल परिसंचरण कुओं के पर्यायवाची में इन-वेल वेपर स्ट्रिपिंग, इन-वेल एयर स्ट्रिपिंग, इन-सीटू वेपर स्ट्रिपिंग, इन-सीटू एयर स्ट्रिपिंग और वैक्यूम वाष्प निष्कर्षण शामिल हैं। भूजल परिसंचरण की प्रक्रिया लगातार भूजल से वी00सी0 को सतह पर लाए बिना हटा देती है। इस तकनीक के लिए लक्षित संदूषक समूह हलोजेनेटेड वी00सी0, एस0वी00सी0 और ईंधन हैं।

क्षैतिज कुआँ तकनीक

क्षैतिज कुआँ तकनीक को मूल रूप से पेट्रोलियम उत्पादन और भूमिगत उपयोगिता स्थापना में उपयोग के लिए विकसित किया गया था, लेकिन इसे हाल ही में पर्यावरणीय उपचार के लिए अनुकूलित किया गया है। इस तकनीक का उपयोग वर्तमान में पर्यावरणीय उपचार अनुप्रयोगों जैसे कि इन सीटू बायोरेमेडिएशन, एयर स्पार्जिंग, वैक्यूम एक्सट्रैक्शन, साइल फ्लशिंग और मुफ्त उत्पाद रिकवरी में किया जाता है। दो सामान्य प्रकार के क्षैतिज कुओं को उपचार गतिविधियों के लिए लागू किया गया हैः खाई रूप से और डाइरेक्शनली-ड्रिल किए गए। खाई वाले क्षैतिज कुओं की ड्रिलिंग में अपेक्षाकृत बड़े व्यास बोरोहोल की खुदाई के साथ साथ कुआँ सामग्री और बैकफिल की स्थापना भी शामिल है। एक क्षैतिज कुएं की डाइरेक्शनल ड्रिलिंग एक छोटे व्यास वाले बोरहोल का उत्पादन करती है और यह ऊध्र्वाधर कुएं की स्थापना के समान है (जी0डब्लू0आर0टी00सी0,1996डी)। क्षैतिज कुएं की स्थापना की लागत साइट विशिष्ट कारकों के साथ बदलती है, यूएस $5000 से यूएस $850,000 प्रति कुएं तक है।

प्राकृतिक क्षीणन (Natural Attenuation)

प्राकृतिक क्षीणन, जिसे निष्क्रिय उपचार, इन-सीटू बायोरेमेडिएशन, आंतरिक पुनर्वितरण, बायोअटेनुअशन, और आंतरिक बायोरिमेडिशन के रूप में भी जाना जाता है। यह एक इन सीटू उपचार पद्धति है जो प्राकृतिक प्रक्रियाओं का उपयोग रासायनिक फैलाव से संदूषण के प्रसार को रोकने और दूषित स्थलों पर प्रदूषण की सान्द्रता और मात्रा को कम करने के लिए करती है। प्राकृतिक क्षीणन प्रक्रियाओं को अक्सर विनाशकारी या गैर-विनाशकारी के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। विनाशकारी प्रक्रियाएं संदूषण को नष्ट करती हैं, जबकि गैर-विनाशकारी प्रक्रियाएं संदूषण की सांद्रता में कमी का कारण बनती हैं (यू0एस00पी00,1996बी)। प्राकृतिक क्षीणन एक लागत प्रभावी उपचारात्मक तकनीक है। इसकी लागत मुख्य रूप से साइट मूल्यांकन और निगरानी की लागत से संबंधित है।

मृदा वाष्प निष्कर्षण (एस0वी00)

मृदा वाष्प निष्कर्षण (एस0वी00), जिसे मृदा वेंटिंग या वैक्यूम निष्कर्षण के रूप में भी जाना जाता है, वी0¨0सी0 और एस0वी00सी0 से दूषित असंतृप्त मिट्टी को हटाने के लिए एक स्वीकृत, मान्यता प्राप्त, और लागत प्रभावी तकनीक है (सुथेरसन,1997; झन और पार्क, 2002; हैलमेस और अन्य, 2003) एस0वी00 तकनीक में मिट्टी के संदूषण के क्षेत्र में ऊध्र्वाधर और/या क्षैतिज कुओं की स्थापना शामिल है। वाष्पीकरण प्रक्रिया की सहायता के लिए अक्सर एयर ब्ल¨अरका उपयोग किया जाता है। दूषित द्रव्यमान के वाष्पशील घटकों को वाष्पित करने के लिए संदूषण के स्रोत के निकट कुओं के माध्यम से वैक्यूम लगाए जाते हैं जो बाद में एक निष्कर्षण कुँए के माध्यम से वापस ले लिए जाते हैं। निकाले गए वाष्प को वायुमंडल में छोड़ने से पहले आमतौर पर कार्बन अवशोषण के साथ उपचार किया जाता है (यू0एस00पी00,1995)। इस प्रक्रिया का उपयोग दूषित भूजल के उपचार के लिए भूजल पम्पिंग और एयर स्ट्राइपिंग के साथ भी किया जाता है। यूनाइटेड स्टेटस एनवायर्नमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी के अनुसार, एस0वी00 परिचालन लागत यूएस $20 से यूएस $50/टन दूषित मिट्टी होती है (यू0एस00पी00,1995,1998ब)।

निष्कर्ष

शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और बदलती जीवन शैली से उभरते हुए प्रदूषण के कारण भूजल प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है। उभरते दूषित पदार्थों का विश्लेषण कर उनके उपचार हेतु उत्कृष्ट तकनीक को अपनाये जाने की आवश्यकता है। पारम्परिक पम्प और ट्रीटमेंट तकनीक का उपयोग भूजल उपचार हेतु अतीत में किया जाता था। हालांकि, अत्यधिक लागत और पम्प-एन्ड-ट्रीट सिस्टम के द्वारा उपचार की गैर-विश्वसनीयता के कारण, नई प्रौद्योगिकियां, विशेष रूप से एस0वी00 के साथ एयर स्पार्जिंग का उपयोग अब प्रमुखता से होता है। विभिन्न केस स्टडी एयर स्पार्जिंग की बहुत कम समय में बड़े अनुपात में दूषित सांद्रता को कम करने की क्षमता को प्रदर्शित करता है। कई साइटों पर पम्प-एन्ड-ट्रीट के पूर्ण पैमाने के अनुप्रयोग की उपचार लागत यूएस $1 प्रति 1000 गैलन उपचारित पानी से कम है। हालांकि, कई स्थलों पर यह यूएस $100 प्रति 1000 गैलन उपचारित पानी के बराबर या ज्यादा है। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि उपचार लागत साईट और दूषित विशेषताओं पर निर्भर करती है। प्राय¨गिक अध्ययनों में भूजल परिसंचरण कुओं की आगामी प्रौद्योगिकी को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया गया है और प्रदर्शन उद्देश्यों के लिए कुछ साइटों पर इन प्रौद्योगिकियों का उपयोग पूर्ण पैमाने पर किया गया है। नई क्षैतिज कुआँ तकनीक को कई सुधारात्मक तकनीकों द्वारा अपनाया गया है और एस0वी00और अन्य उपचारात्मक प्रौद्योगिकियों इसके उपयोग ने उत्साहजनक परिणाम दिखाए हैं। ऊध्र्वाधर कुआँ तकनीक की तुलना में क्षैतिज कुआँ तकनीक का उपयोग करके दूषित पदार्थों को हटाने में पांच गुना वृद्धि हुई हैन इस तकनीक को अपनाने की दर में लगातार वृद्धि हो रही है। राज्य पर्यावरण एजेंसियों के अनुभव से संकेत मिलता है कि पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन से दूषित साइटों के लिए स्रोत हटाना, इन सीटू रीमेडिएशन (बायोवेटिंग/बायोरेमेडिएशन) और प्राकृतिक क्षीणन उपयुक्त और लागत प्रभावी उपचारात्मक तकनीक साबित हुई हैं।

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