दिल्ली में महज पांच फीट नीचे मीठा पानी

Submitted by admin on Sun, 05/04/2014 - 10:32
Source
दैनिक भास्कर, 04 मई 2014
1. बेहतर जल प्रबंधन के जरिए कायम की मिसाल
डीडीए-डीयू के संयुक्त प्रयास से यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में ऊपर आया जलस्तर
बुराड़ी-वजीराबाद में हजारों मकानों के निर्माण के बावजूद जलस्तर में सुधार


दिल्ली के अधिकांश क्षेत्रों का जलस्तर भले ही 100 फीट नीचे तक चला गया हो, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग एक के पास विकसित किए गए यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क में महज चार से पांच फीट नीचे मीठा पानी मिल जाएगा। यह कमाल दिल्ली विकास प्राधिकरण एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एन्वायरमेंटल मैनेजमेंट ऑफ डिग्रेडेड इकोसिस्टम के संयुक्त प्रयास से हुआ है।

खास बात यह है कि बुराड़ी और वजीराबाद क्षेत्र में पिछले 10 सालों के दौरान हजारों मकानों का निर्माण हो गया और बड़े पैमाने पर यहां पर भूजल का दोहन किया गया, बावजूद इसके पार्क का जलस्तर महज पांच फीट नीचे है।

यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क के इंचार्ज (साइंटिस्ट) फैयाज ए. खुद्दसर का कहना है कि वर्ष 2003 में बायोडायवर्सिटी पार्क का विकास कार्य शुरू हुआ। शुरू में यहां की मिट्टी बहुत खारी थी, लेकिन भूजल में नमक की मात्रा 14 हजार ईसी (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) थी, जो स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक होता है, लेकिन आज यहां पर भूजल में नमक की मात्रा घटकर 4 हजार से 8 हजार ईसी के बीच आ गया है।

इसके अलावा बंजर जमीन को सुधारने के लिए यहां पर घास की 150 प्रजातियां, लगभग एक दर्जन जंगली दलहन प्रजाति की वनस्पतियां लगाई गईं। जिससे यहां पर हरियाली विकसित हुई। यमुना नदी की दूरी महज डेढ़ किलोमीटर होना भी जलस्तर के लिए बेहतर साबित हुआ।

आदर्श वॉटर बॉडीज का अकाल


दिल्ली सरकार से प्राप्त आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली की लगभग 911 जलाशयों में से 169 जलाशयों पर अतिक्रमण हो चुका है। एलजी द्वारा गठित द्वारका वाटर बॉडी कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एवं पर्यावरणविद दीवान सिंह कहते हैं कि अब तो दिल्ली में आदर्श जलाशय नाममात्र के रह गए हैं।

यदि सरकार चाहे तो दिल्ली का जलस्तर सुधारा जा सकता है। इस बाबत रेन वाटर ड्रेन से अतिक्रमण हटाकर इसे साफ करना होगा और योजनाबद्ध तरीके से विकसित की गई कॉलोनियों में इस योजना को कारगर ढंग से लागू किया जाए।

ऐसे किया गया जल प्रबंधन


सबसे पहले 457 एकड़ में फैले यमुना बायोडायवर्सिटी पार्क का जल प्रबंधन किया गया। इसके तहत यहां पर दो बड़े जलाशयों का निर्माण किया गया। बड़े जलाशय को 1.8 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और दूसरे गहरे जलाशय को लगभग 7 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया।

जलाशय से निकाली गई मिट्टी का पार्क के अंदर छोटे-छोटे टीले बनाने में उपयोग किया गया और पार्क की बनावट ऐसी की गई कि बारिश का पानी सीधे जलाशयों में इकट्ठा होता रहे।

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