डूबने का दंश झेलते विस्थापित

Submitted by RuralWater on Sun, 11/20/2016 - 10:54


धार। पुनर्वास स्थल पर बसे विस्थापितों के सामने इन दिनों जलसंकट की स्थिति निर्मित हो गई है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (एनवीडीए) द्वारा पुनर्वास स्थल पर भूखण्ड देकर विस्थापितों को बसा तो दिया, किन्तु उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को कौन पूरा करेगा, इसकी कोई व्यवस्था नहीं की। इस कारण पुनर्वास स्थल पर बसे विस्थापितों के सामने ये भी समस्या खड़ी हो गई है कि जाएँ तो कहाँ जाएँ? जो उनकी समस्या का निराकरण कर दें। पेयजल मुहैया कराने को लेकर विस्थापित शनिवार को नगर परिषद में पहुँचे व ज्ञापन सौंपा।

खुजावा पुनर्वास स्थल पर बसे ग्राम पंचायत हतनावर के विस्थापित शनिवार को नगर परिषद पहुँचे व ज्ञापन सौंपा। इसमें माँग की गई कि उन्हें भी पेयजल उपलब्ध कराया जाये। ज्ञापन में कहा गया कि पुनर्वास स्थल पर करीब 150 मकान हैं, जिनके सामने पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है। पुनर्वास स्थल पर बनी टंकी से उन्हें पेयजल नहीं दिया जा रहा है।

वहीं पुनर्वास स्थल पर जल वितरण करने वाले कर्मचारी पर पैसे लेकर पानी छोड़ने का आरोप भी लगाया गया। विस्थापितों के साथ जनपद सदस्य मानसिंह, मुकेश पाल, तेरसिंह बलराम, बबलू, नवनीत, सुरेश राजु, दिपक, कलाबाई व अन्य लोग शामिल थे। नगर परिषद में विस्थापितों ने लेखापाल मनोज भावसार को ज्ञापन सौंपा। इसके पश्चात विस्थापित भूअर्जन कार्यालय में भी ज्ञापन देने पहुँचे।

 

शहर व ग्राम बसाए एक साथ


मनावर मार्ग पर एनवीडीए द्वारा नगर के वार्ड एक व ग्राम पंचायत हतनावर के डूब प्रभावितों के लिये पुनर्वास स्थल विकसित किया था। जहाँ दोनों स्थानों के विस्थापितों को भूखण्ड आवंटित किये गए थे। यानि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लिये सम्मिलित पुनर्वास स्थल का निर्माण किया। विस्थापन के बाद नगर वार्ड एक के विस्थापितों के लिये नगर परिषद द्वारा नियमानुसार पेयजल की व्यवस्था की। जिसका टैक्स भी नगर परिषद विस्थापितों से लेती है। वहीं नियमित रूप से खुजावा के नागरिकों को पेयजल उपलब्ध कराती हैै।

 

कौन उपलब्ध कराएगा पेयजल


चूँकि नगर के वार्ड एक के विस्थापित नगर के नागरिक हैं, उनका राशन कार्ड भी यही का है। वो लोग नगर परिषद को समस्त कर (टैक्स) भी जमा करते हैं, इसलिये उन्हें मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराना नगर परिषद की जिम्मेदारी है। दूसरी ओर ग्राम पंचायत हतनावर के विस्थापित अब भी ग्राम पंचायत की ही श्रेणी में आते हैं। इसलिये न तो वो नगर परिषद को किसी प्रकार का टैक्स दे रहे हैं और न उनका कोई रिकॉर्ड नगर परिषद के पास है।

ऐसे में ग्राम के विस्थापितों के सामने असमंजस की स्थिति निर्मित हो गई है कि उन्हें पेयजल उपलब्ध कौन कराएगा। सूत्रों के अनुसार उक्त पुनर्वास स्थल पर जो पेयजल लाइन एनवीडीए ने डाली थी, उसमें से कई लोगों ने अवैध रूप से कनेक्शन ले लिये थे। जिन्हें गत दिवस नगर परिषद द्वारा विच्छेद कर दिये गए। इस कारण सम्बन्धित विस्थापितों को पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में गैर कानूनी रूप से लगे नल कनेक्शन के लिये नगर परिषद को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

 

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