एंटीबायोटिक और बैक्टीरिया प्रतिरोध

Submitted by editorial on Mon, 09/03/2018 - 13:57
Source
विज्ञान प्रगति, अगस्त, 2018

एंटीबायोटिकएंटीबायोटिक (फोटो साभार - किस पीएनजी)पिछले दशकों में बैक्टीरिया प्रतिरोध में हुई वृद्धि को दुनिया भर में देखा गया है। जीवाणुरोधी प्रतिरोध को बैक्टीरियल जीनोम (Bacterial Genome) के चयनात्मक एंटीबायोटिक दबाव के तहत और पर्यावरण के चयनात्मक दबाव द्वारा तेजी से होते देखा गया है। प्रतिरोध किसी भी एंटीबायोटिक से विकसित हो सकता है। व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं को सतत रूप से चुनना मल्टीरेजिस्टेंस उपभेदों (Multi Resistant strains) में वृद्धि का एक महत्त्वपूर्ण कारक है। प्रतिरोधी म्यूटेंट (Resistant mutants) आमतौर पर एक ऐसे वातावरण में जीवित रहते हैं जिसमें कई एंटीमाइक्रोबियल (Antimicrobial) मौजूद हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध के लिये नई रणनीति एक प्रमुख समस्या है।

दुनिया में मौजूद रोगों में, संक्रमण दूसरा प्रमुख कारण है और इस संक्रमण का स्थान विकसित देशोें में नम्बर तीन और भारत में चौथा नम्बर है। दुनिया भर में बैक्टीरिया के संक्रमण से हर साल 17 लाख लोग मर जाते हैं। आज सभी देशों के लिये दवा प्रतिरोध (Drug resistance) चेतावनियों की आवश्यकता है।

संक्रमित भोजन के कारण बहुतायत लोग अस्पताल में भर्ती होते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है। इस संक्रमण के लिये कई रोगजनक सूक्ष्मजीव जिम्मेदार है।

एंटीबायोटिक दवाइयाँ ऐसी दवाएँ हैं, जो इन हानिकारक सूक्ष्मजीवों के विकास को कम करती हैं या नष्ट करती हैं, जैसे-बैक्टीरिया, कवक और परजीवी। एंटीबायोटिक्स कम अणुभार वाले यौगिक हैं, जिनमें से अधिकांश प्राकृतिक उत्पाद से उत्पन्न होते हैं और रोगजनकों के विरुद्ध कम सान्द्रता पर सक्रिय होते हैं। एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic resistance) मुख्य रूप से तब होता है, जब ये सूक्ष्म जीव दवाओं के अनुकूल हो जाते हैं और इसकी उपस्थिति में निरन्तर वृद्धि करते है।

रोग नियंत्रण और रोकथाम केन्द्र (Centers for Disease Control and Prevention - CDC) ने एंटीबायोटिक प्रतिरोध पर अपनी हाल ही की रिपोर्ट प्रकाशित की है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण संक्रमण के परिणामस्वरूप दुनिया भर में करीब 10 मिलियन लोग बीमार हो जाते हैं और 23,00,000 मर जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 114 देशों के आँकड़ों को देखते हुए इस मुद्दे पर अपने पहले वैश्विक सर्वेक्षण की भी घोषण की।

WHO ने बताया कि मुख्य रूप से सात बैक्टीरिया कई सामान्य संक्रमणों जैसे डायरिया, निमोनिया, मूत्र पथ के संक्रमण सेप्सिस (Sepsis) और गोनोरिया (Gonorrhea) के लिये जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सामान्य जीवाणु प्रतिरोध दुनिया के कई हिस्सों में चेतावनी के स्तर पर पहुँच गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में पहले से ही कुछ आम संक्रमण उपचार विकल्पों के बाहर है। यहाँ चर्चा का विषय है कि लगभग एक सदी पहले एंटीबायोटिक दवाओं की खोज हुई थी, फिर एंटीबायोटिक प्रतिरोध का क्या कारण है?

एंटीबायोटिक प्रतिरोध का कारण एवं निवारण (prevention and prevention of antibiotic resistance)

एंटीबायोटिक प्रतिरोध नया नहीं है, एलेग्जेंडर फ्लेमिंग ने लगभग 70 साल पहले 1945 में अपने नोबल पुरस्कार स्वीकृति भाषण के बोलते हुए इस समस्या के लिये चेतावनी दी थी। रोगजन्य रोगाणुओं की मेटाबोलिक दर एंटीबायोटिक की उपस्थिति में इन्हें जीवित रहने में मदद करते हैं। जिसके फलस्वरूप जैवफिल्म्स (Biofilms) का निर्माण करते हैं। इनमें ग्राम पॉजिटिव स्टैफाइलोकोकस (gram positive staphylococcus) और स्ट्रैप्टोकोकस(streptococcus), ग्राम नेगेटिव स्यूडोमोनास (Gram negative pseudomonas) और मेटाबोलिक रूप से निष्क्रिय माइकोबैक्टीरिया (Metabolically dormant mycobacteria) शामिल हैं। ऐसी स्थिति में, कोशिकाभित्ति (Cell wall) की मोटाई अक्सर बढ़ जाती है, जिससे एंटीबायोटिक को कोशिका में जाने में मुश्किल होती है। कुछ मामलों में एंटीबायोटिक प्रतिरोधों को एंटीबायोटिक के संयोजन से कम किया जा सकता है। इसका उपयोग वैकल्पिक चिकित्सा प्रतिरोध की प्रगति को धीमा करने के लिये हो सकता है।

बिना सोचे समझे एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग बैक्टीरिया पर जैविक दबाव बनाता है, जो कि बैक्टीरिया प्रतिरोध को बढ़ावा देता है। जब रोग को रोकने का इलाज करने की आवश्यकता होती है, तब एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल हमेशा किया जाना चाहिए। लेकिन विश्लेषण से पता चला है कि 50% एंटीबायोटिक दवाओं को तब दिया जाता है, जब उनकी आवश्यकता नहीं होती है या उनका दुरुपयोग किया जाता है (उदाहरण, रोगी को गलत खुराक दी जाती है) अनजाने में एंटीबायोटिक दवाओं का यह अनुचित उपयोग, एंटीबायोटिक दवाओं के प्रतिरोध को बढ़ावा देता है।

डॉक्टर वायरल संक्रमण जैसे-अतिसार और फ्लू के लिये बहुत सारे एंटीबायोटिक औषधियाँ लिखते हैं। दुर्भाग्य से ये सभी गलतफहमियाँ भी मीडिया और दूसरों के द्वारा समर्थित एवं सार्वजनिक हैं। कैंसर का उपचार (Surgery and immunosuppressive therapy), किसी प्रकार की सर्जरी (वैकल्पिक और आघात से), यहाँ तक कि सरल घाव प्रबन्धन भी ज्यादा खतरनाक और अधिक कठिन विकल्प बन जाएगा, यदि हम उपयुक्त समय पर संक्रमण को रोकने के लिये एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग नहीं कर सके।

खाद्य उत्पादक जानवरों से प्राप्त भोजन भी प्रतिरोधी बैक्टीरिया का एक स्रोत हो सकता है। इसलिये खाद्य उत्पादक जानवरों में एंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और गलत उपयोग ने भी एंटीबायोटिक प्रतिरोध में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रकार भोज्य पदार्थ उत्पादक पशुओं में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग सीमित होना चाहिए।

अब समस्या अधिक गम्भीर हो गई है, क्योंकि नए एंटीबायोटिक्स का विकास धीमे हो रहा है, जबकि इसकी माँग विश्व स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। इसलिये उच्च दक्षता वाले नए एंटीबायोटिक्स को जल्द ही खोजा जाना चाहिए।

दशकों तक एक ही प्रकार की एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग, जीवाणुओं को विकसित करने और उनके प्रतिरोध को विकसित करने में मददगार है। ऐसे कुछ नए संक्रमण हैं, जो वर्तमान में एमआरएसए (methicillin-resistant staphylococcus aureus - MRSA) जैसी एंटीबायोटिक दवाओं के लिये प्रतिरोधी हैं। इसलिये सिर्फ ऐसे एंटीबायोटिक का विकास पर्याप्त नहीं है, जो पेट्री डिश पर बैक्टीरिया को मारता है। यह जटिल होना चाहिए जो बैक्टीरिया प्रतिरोध को कम करता हो।

समस्या यह है कि नए एंटीबायोटिक का विकास अधिक जटिल, महंगा और लम्बी प्रक्रिया बन गया है। नई एंटीबायोटिक दवाओं की पहचान करने के समय सरलता से प्राप्त होने वाले एंटीबायोटिक को पहले चुना जाता है। इस प्रकार आर्थिक कारक, एक प्रमुख कारक के रूप में नई एंटीबायोटिक दवाओं के विकास में हस्तक्षेप करते हैं।

देखा गया है कि एक कम्पनी को एक प्रकार की एंटीबायोटिक के लिये मंजूरी मिलती है, लेकिन इसका उपयोग सम्पूर्ण बाजार में होता है। जब एंटीहाइपरटेंसिव(Antihypertensive) दवाओं को मंजूरी दी जाती है, तो वे फेफड़े या उच्च रक्तचाप के उपचार के लिये, गुर्दे की उच्च रक्तचाप के इलाज के लिये अनुमोदित नहीं होते हैं। वे केवल उच्च रक्तचाप का इलाज करने के लिये अनुमोदित हैं।

प्रतिरोध को दूर रखने के लिये नए एंटीबायोटिक्स का विकास एक सतत प्रक्रिया होनी चाहिए। बैक्टीरिया प्रतिरोध एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसमें बैक्टीरिया विकसित होता है। यह धीमा हो सकता है लेकिन पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता, इसलिये प्रतिरोधी विकास प्रक्रिया को पता करने के लिये नए एंटीबायोटिक का विकास हमेशा प्रतिरोधी बैक्टीरिया के साथ प्रवाह में होनी चाहिए।

जिस तरह एंटीबायोटिक दवाइयाँ निर्धारित और इस्तेमाल की जाती हैं, उसमें एक बड़ा बदलाव होना चाहिए, क्योंकि यह प्रतिरोध के लिये महत्त्वपूर्ण है। डब्ल्यूएचओ (WHO) के सुझावों के मुताबिक एंटीबायोटिक दवाइयाँ केवल तब दी जानी चाहिए, जब मरीजों को वास्तव में उनकी जरूरत हो। डॉक्टर को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे बीमारी का इलाज करने के लिये सही एंटीबायोटिक निर्धारित कर रहे हैं।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने की एक प्रमुख रणनीति संक्रमण को प्राथमिकता से रोकने में निहित है। संक्रमण को कम करने से एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग कम हो जाता है, जिससे प्रतिरोध की सम्भावना कम हो जाती है। की अभियानों द्वारा स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों को नियमित रूप से मदद और शिक्षित किया जाना चाहिए।

संक्रमण और एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को रोकने के सर्वोत्तम तरीकों पर ये सामान्य जागरुकता कार्यक्रम आम जनता को भी जागरूक करते हैं। एंटीबायोटिक दवाओं का गलत और अधिक उपयोग आधुनिक चिकित्सा लाभों के लिये एंटीबायोटिक दवाओं पर निर्भरता ने दवा प्रतिरोधों में योगदान दिया है।

यदि हम संक्रमण को रोकने के लिये महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हैं और इस प्रक्रिया में बदलाव करते हैं। तब प्रभावी एंटीबायोटिक दवाइयाँ हमें स्वस्थ रहने और लम्बे समय तक जीवित रहने में मदद करती हैं। नए शोध को लागू करने, नीतियों को नवीनीकृत करने और एंटीबायोटिक प्रतिरोध को प्रबन्धित करने के लिये कदमों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

एंटीबायोटिक प्रतिरोधी संक्रमण की खतरनाक संख्या यह खतरा दर्शाती है कि अगले 20 साल में हम 19वीं शताब्दी के माहौल में वापस जा सकते हैं जहाँ हर रोज संक्रमण हमें मार सकते हैं। चिकित्सकों को फ्लेमिंग के शब्दों ‘विवेकपूर्ण तरीके से एंटीबायोटिक दवाइयाँ इस्तेमाल करना अन्यथा उन्हें हमेशा के लिये खोना’ पर हमेशा ध्यान देना चाहिए। मरीजों को केवल तब ही एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करना चाहिए, जब वे डॉक्टर द्वारा निर्धारित की गई हों। मरीजों को पूरी तरह से डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए और दूसरों के साथ एंटीबायोटिक दवाएँ न तो साझा करें और न ही बचे हुए एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग करें।

सुश्री मधु यादव एवं श्री रमेन्द्र कुमार सिंह

जैवकार्बनिक शोध प्रयोगशाला रसायन विज्ञान विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय इलाहाबाद 211002 (उ.प्र)

ई-मेल- madhu_all@rediffmail.com

 

 

 

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