गंगा सफाई में लगेंगे दस साल

Submitted by RuralWater on Mon, 06/08/2015 - 12:55
Source
नया इण्डिया, 06 जून 2015
गंगा सफाई के मुद्दे पर केन्द्रीय मन्त्री उमा भारती और पार्टी के ही सांसद एमएम जोशी एकदूसरे से भिड़े

.जयपुर, वार्ता/डेस्क। केन्द्रीय जल संसाधन मन्त्री उमा भारती ने गंगा को साफ करने के अभियान में देरी के लिये अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के आरोप के बाद कहा कि गंगा को साफ करने में दस वर्ष लगेंगे।

जल क्रान्ति अभियान की शुरुआत करने के अवसर पर आयोजित समारोह में केन्द्रीय मन्त्री ने कहा कि जर्मनी और इंग्लैंड में नदियों को साफ करने में 27 से 40 वर्ष लगे लेकिन हम गंगा को दस वर्ष में साफ कर देंगे। उन्होंने कहा कि चार वर्ष में बीस हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे तथा गंगा में समाहित होने वाली यमुना और चंबल नदियों में भी सफाई का कार्य साथ-साथ चलेगा। उन्होंने कहा कि जर्मनी और इंग्लैंड से भी नदियों को साफ करने की तकनीक सीखेंगे। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता जोशी से मुलाकात कर नमामि गंगे अभियान में कमियों को सुधारने के लिये मार्गदर्शन लेगी।

भारती ने कहा कि गंगा में आने वाले प्रदूषित पानी को रोकने के लिये शहरी विकास मन्त्रालय को जिम्मेदारी सौंपी गई है जिससे गंगा को साफ करने के अभियान में मदद मिलेगी। गंगा में परिवहन के लिये नावें चलाने की योजना पर उन्होंने कहा कि नदी में पानी रहेगा, तभी नावें चलाई जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि पानी के संकट को दूर करने के लिये एक बड़ी योजना तैयार की गई है जिसमें जलीय असन्तुलन दूर किया जाएगा। विलुप्त नदी सरस्वती की चर्चा करते हुए कहा कि मुझे पता चला है कि इस नदी के मार्ग को ढूँढ लिया है जिसमें हरियाणा में और राजस्थान में बहुत कम गहराई में पानी मिल रहा है इससे गुजरात का संकट भी हल हो सकता है। शारदा यमुना लिंक योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसका पानी दिल्ली, राजस्थान पार करते हुए गुजरात जाएगा जिस पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि आठ जून को दिल्ली में आयोजित बैठक में कम पानी में खेती के बारे में विचार-विमर्श किया जाएगा।

पानी संकट के समाधान के लिये जनआन्दोलन की आवश्यकता बताते हुए उन्होंने कहा कि कम पानी से खेती की तकनीक इजराईल से सीखी जाएगी तथा इसके लिये राजस्थान के नौजवानों को भेजा जाएगा। भारती ने कहा कि महाराष्ट्र का पानी गुजरात भेजने का मुद्दा बनाया जा रहा है जबकि असलियत यह है कि समुद्र में व्यर्थ बहने वाले पानी को गुजरात को दिया जाए।

हर मुद्दे को भगवा से जोड़ने का विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि आस्था अपनी जगह है लेकिन इसके पीछे विकास के उद्देश्य को नहीं भूलना चाहिए। भारती ने “नमामि गंगे” योजना पर पूर्व केन्द्रीय मन्त्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी की टिप्पणी को गम्भीरता से लेते हुए कहा है कि वह उनसे मुलाकात कर सुझाव लेंगी। जोशी ने शुक्रवार को न्यूज चैनल्स में “नमामि गंगे” योजना पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि एक वर्ष में इस योजना पर कुछ भी नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा था कि गंगा जितनी मैली होगी, राजनीति भी उतनी ही मैली होगी।

उमा भारती से जोशी के बयान के बारे में शुक्रवार को जब पत्रकारों ने पूछा तो उन्होंने कहा कि वह भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं तथा गंगा के किनारे से दो बार सांसद रहे हैं, उनसे मिलकर वह “नमामि गंगे” योजना के बारे में सुझाव लेंगी। उन्होंने कहा कि योजना में क्या कमियाँ रही हैं तथा उन्हें कैसे दूर किया जा सकता है। इस बारे में वह वरिष्ठ नेता की राय जानेंगी। केन्द्रीय मन्त्री ने कहा कि हमारे देश में जो चीज रोजी रोटी से जुड़ी होती है उसे भी हम आस्था से जोड़ लेते हैं गंगा भी 50 करोड़ लोगों को रोजी-रोटी देती है इसलिये आस्था से जुड़ गई है।

जोशी ने उड़ाई खिल्ली


वाराणसी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं सांसद मुरली मनोहर जोशी ने नमामि गंगे योजना की खिल्ली उड़ाकर मोदी सरकार के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जोशी ने गुरुवार देर शाम यहाँ एक समारोह में कहा कि राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबन्धन (एनडीए) सरकार गंगा को एक साथ साफ करने के बजाय यह महती काम टुकड़ों में करना चाहती है। उन्होंने कहा कि ऐसे तो गंगा 50 साल में भी निर्मल नहीं होगी। पूर्व केन्द्रीय मन्त्री ने केन्द्रीय भूतल परिवहन मन्त्री नितिन गडकरी का नाम लिये बगैर कहा कि गंगा में जल परिवहन शुरू करने की योजना बनाने वालों को भूगोल और भूगर्भ का ज्ञान ही नहीं है। जोशी ने कहा कि पंडित मदन मोहन मालवीय ने भी गंगा में बड़ी नाव और जहाज से यातायात शुरू करने की असफल कोशिश की थी। उन्होंने कहा कि गंगा में जहाज या बड़ी नाव चलाने लायक पानी तो होना चाहिए।

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