घर में शौचालय से बचते हैं 50 हजार प्रति वर्ष

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खुले में शौच करने वाले परिवार यदि अपने घर में शौचालय का निर्माण करते हैं तो वह 50 हजार रुपये प्रति वर्ष की बचत कर सकते हैं। यह आंकड़ा यूनिसेफ द्वारा किये गये सर्वे में सामने आया है। सर्वे के अनुसार स्वच्छता अभियान शुरू होने के बाद 430 प्रतिशत लोगों ने अपने घरों में शौचालय निर्माण पर खर्च किया है।

स्वच्छता ही सेवा है अभियान के तहत स्वच्छता मंत्रालय द्वारा आज राजधानी में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया परामर्श में स्वच्छता को लेकर किये गये सर्वे के आंकड़े पेश किये गये। मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में यूनिसेफ के वरिष्ठ अधिकारी निकोलस ओसबर्ट ने सर्वे के आंकड़े पेश करते हुए बताया कि भारत के 12 राज्यों के दस हजार परिवारों में यह सर्वे किया गया, सर्वे का आश्चर्यजनक परिणाम यह था कि यदि स्वच्छता अभियान पर एक रुपया खर्च किया जाता है तो एक परिवार को चार रुपये 30 पैसे की बचत बीमारियाँ न होने के कारण होती है।

सर्वे के अनुसार खुले में शौच करने से मुक्त गाँवों एवं कस्बों में साफ-सफाई के कारण बीमारियाँ कम होती हैं जिससे दवा, चिकित्सा पर खर्च कम होता है तथा मृत्यु दर भी कम होती है उन्होंने बताया कि एक परिवार जो घर में शौचालय का निर्माण करता है तो औसतन एक परिवार को प्रत्येक वर्ष 50 हजार रुपये की बचत होती है। उन्होंने बताया कि सर्वे के अनुसार शौचालयों पर किये गये खर्च की लागत का लाभ 430 प्रतिशत है। स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर ने स्वच्छ भारत मिशन की प्रगति का ब्यौरा देते हुए बताया कि अभी तक 5 राज्यों में लगभग 200 जिलों और देश भर में लगभग 2.4 लाख गाँवों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया कर दिया है। उन्होंने बताया कि गाँवों में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन के आधार पर 1.5 लाख गाँव स्वच्छता सूचकांक में बेहतर स्थान पर पहुँच गये हैं।

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