हिंद महासागर की गर्मी ने अफ्रीका में सूखे को दिया जन्म

Submitted by Hindi on Sat, 01/29/2011 - 12:28
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अमर उजाला कॉम्पैक्ट 29 जनवरी 2011
वैश्विक तापमान में वृद्घि तथा हिंद महासागर के लगातार गर्म होने के कारण पूर्वी अफ्रीका में सूखे की स्थिति पिछले 20 वर्षों से लगातार बढ़ रही है और यह स्थिति भविष्य में भी जारी रहने वाली है। यह बात एक नए शोध में सामने आई है, जो कि क्लाइमेट डायनेमिक्स में प्रकाशित हुआ है। यूएस जूलॉजिकल सर्वे और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने नए शोध में बताया कि पूर्वी अफ्रीका में सूखा तीव्र गति से अपना पांव पसार रहा है और यह स्थिति वैश्विक तापमान में लगातार वृद्घि की तरह आगे भी जारी रहेगी।

17.5 मिलियन से भी अधिक लोग सूखे के शिकार


अफ्रीका में 17.5 मिलियन से भी अधिक लोग सूखे की मार झेल रहे हैं। सूखे के कारण इन लोगों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख शोधकर्ता क्रिस फंक ने बताया कि मौसम परिवर्तन के कारण हिंद महासागर सबसे अधिक गर्म हो रहा है। इस कारण पूर्वी अफ्रीका में बारिश में काफी गिरावट आई है। वैश्विक तापमान में वृद्घि के पीछे इस स्थिति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। पूर्वी अफ्रीका में बारिश की कमी के कारण वहां सूखे की स्थिति बढ़ती जा रही है, जिसके कारण फसल का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। नतीजतन, वहां के लाखों लोगों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

प्रमुख शोधकर्ता क्रिस फंक


प्रमुख शोधकर्ता क्रिस फंक ने बताया कि वैश्विक तापमान में लगातार इजाफा हो रहा है और उनके शोध में इस बात का पता चला है कि केन्या, इथोपिया में बारिश की स्थिति में लगातार गिरावट आ रही है और यह स्थिति आगे भी जारी रहेगी। पूर्वी अफ्रीका के साथ भी यही स्थिति है। उन्होंने बताया कि पूर्वी अफ्रीका में मार्च से जून तक संतोषजनक वर्षा होती थी, लेकिन हिंद महासागर के बढ़ते तापमान के कारण इन महीनों में बारिश में काफी गिरावट आई है। इसके कारण कृषि का विकास नहीं हो पा रहा है, जबकि इन क्षेत्रों में जनसंख्या काफी तेजी के साथ बढ़ रही है।

वैश्विक तापमान में लगातार इजाफा


फंक ने बताया कि पिछले एक शतक में वैश्विक तापमान में काफी वृद्घि हुई है और हिंद महासागर सबसे तेजी से गर्म हुआ है। इसके कारण खासकर पूर्वी अफ्रीका की हवाएं काफी गर्म हो गईं और वहां आर्द्रता में भारी इजाफा हुआ है। इसके कारण इन क्षेत्रों में बारिश में भी काफी कमी आई है। एक अन्य शोधकर्ता पार्क विलियम्स ने बताया कि साल दर साल यह स्थिति और भी जटिल होती जा रही है।

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