हिंडन की बीमारी का इलाज नहीं इतना आसान

Submitted by admin on Mon, 03/03/2014 - 16:36
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नेशनल दुनिया, 28 फरवरी 2014
नदी को जहरीला बनाने में सौ से अधिक खतरनाक उद्योग भूमिका निभा रहे हैं, डीएम की गठित टीमें सिर्फ कागजों में दौड़ रही हैं।

नदी के प्रदूषण में भागीदारी निभा रहे उक्त उद्योगों की सूची वर्ष-2012 में तैयार कर ली गई थी, मगर सरकारी तंत्र ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत महसूस नहीं की। बढ़ते प्रदूषण के कारण नदी के भीतर और आसपास जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। जिलाधिकारी एस.वी.एस. रंगाराव ने कुछ समय पहले दो प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर प्रदूषणकारी कारखानों के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए थे। गाजियाबाद। प्राचीन हिंडन नदी को बीमार और जहरीला बनाने में सौ से ज्यादा उद्योग खतरनाक भूमिका निभा रहे हैं। इन छोटे-बड़े उद्योगों का उत्प्रवाह प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से नदी में मिलता है। यह सच्चाई सामने आने के बावजूद सरकारी स्तर पर सिर्फ औपचारिकता का निर्वहन किया जा रहा है। इन उद्योगों पर शिकंजा कसने की बजाए जिम्मेवार विभाग कागजी कार्ययोजना पर काम करते दिखाई दे रहे हैं।

प्राचीन हिंडन नदी में प्रदूषण की मार निरंतर बढ़ रही है। पर्यावरणप्रेमियों द्वारा खूब हो-हल्ला मचाए जाने के बाद भी सरकारी तंत्र महज खानापूर्ति करने में मशगूल है।

प्राचीन हिंडन नदी गाजियाबाद के अलावा, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, बागपत, सहारनपुर एवं मुजफ्फरनगर से होकर गुजरती है। इन क्षेत्रों में नदी ढाई सौ किमी. से ज्यादा का सफर तय करती है। नदी के आसपास करीब चार सौ गांव आबाद हैं। नदी में बढ़ते प्रदूषण की वजह से इन गांवों के जनजीवन पर विपरीत असर पड़ रहा है।

सूत्रों के मुताबिक गाजियाबाद शहर की सौ से अधिक औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित पानी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से नदी को दिन-रात प्रदूषित कर रहा है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इन उद्योगों की संख्या 105 है। इनमें एक्सपोर्ट, टेक्सटाइल्स, डाइंग, पाइप, साइकिल रिक्शा, रबर, मैन्यूफैक्चर्स, हार्डवेयर, इलेक्ट्रानिक्स, प्रिंटिंग, स्टील, फैब्रिक, वायर, फूड, पेपर, रसायन आदि के उद्योग शामिल हैं।

बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, ग्राम महरौली, कविनगर औद्योगिक क्षेत्र, मेरठ रोड औद्योगिक क्षेत्र, लोनी रोड औद्योगिक क्षेत्र, आनंद इंडस्ट्रीयल एस्टेट, मोहन नगर, भूरगढ़ी डासना, हापुड़ रोड, दुहाई, भाटिया मोड़ जीटीरोड, साउथ साइड ऑफ जीटीरोड आदि क्षेत्रों में इन उद्योगों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। इसके अलावा सात नालों का गंदा पानी भी सीधे हिंडन नदी की कोख में गिर रहा है। सूत्रों का कहना है कि नदी के प्रदूषण में भागीदारी निभा रहे उक्त उद्योगों की सूची वर्ष-2012 में तैयार कर ली गई थी, मगर सरकारी तंत्र ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत महसूस नहीं की।

बढ़ते प्रदूषण के कारण नदी के भीतर और आसपास जलीय जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। जिलाधिकारी एस.वी.एस. रंगाराव ने कुछ समय पहले दो प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर प्रदूषणकारी कारखानों के विरुद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए थे। इस टीम ने लोनी क्षेत्र में कुछेक कारखानों पर छापामार कार्यवाही कर खानापूर्ति कर दी।

एक टीम के प्रभारी रहे सिटी मजिस्ट्रेट श्री प्रकाश गुप्ता का हाल ही में गैर जनपद तबादला हो चुका है। सूत्रों का कहना है कि हिंडन नदी में प्रदूषण फैला रहे इन उद्योंगों की बावत जिला प्रशासन, नगर निगम एवं उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास पूरी रिपोर्ट है। हालांकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपनी रिपोर्ट में यह दावा कर चुका है कि ज्यादातर उद्योगों में ईटीपी प्लांट स्थापित है। नदी में प्रदूषण बढ़ने का कारण गैर जनपद के उद्योग हैं।

प्रदूषित हिंडन नदी

शहर में दो एसटीपी


शहर में दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित है। पहला इंदिरापुरम के समीप गांव कनावनी में और दूसरा प्रताप विहार में है। शहर में प्रतिदिन एकत्र सीवर को नालों के जरिए इन प्लांटों में पहुंचा कर ट्रीट करने का दावा किया जाता है। सूत्रों का कहना है कि विभिन्न स्थानों पर आपस में नाले न मिलने और लीकेज के कारण सीवर का पानी नालों से होकर हिंडन में पहुंच रहा है।

पुल पर लगाए गए जाल


हिंडन पुल के ऊपर से कोई नदी में कूड़ा-कचरा न फेंके इसके लिए वहां जाल लगाए गए हैं। इसके बावजूद वाहन चालक अक्सर पॉलीथीन में भरा कचरा अथवा पूजन सामग्री नदी में फेंक देते हैं।

हिंडन बैराज को भी जाल लगाकर कवर किया गया है। उधर, महापौर की कुर्सी पर विराजमान होने के बाद तेलूराम काम्बोज ने हिंडन नदी को प्राथमिकता के आधार पर प्रदूषण मुक्त कराने की घोषणा की थी। इस घोषणा पर अमल नहीं हो सका है। इसके पीछे अब नगर निगम की आर्थिक मजबूरियां गिनाई जा रही हैं।

वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की जरूरत


जनपद में 20 से 25 फरवरी तक ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता जागरूकता सप्ताह मनाया गया था। इस कार्यक्रम के पहले दिन आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष अजित पाल त्यागी ने हिंडन नदी में बढ़ते प्रदूषण पर गहरी चिंता जाहिर की थी। उन्होंने प्रदूषणकारी कारखानों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही एवं ग्राम करहैड़ा के समीप वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने की जरूरत पर जोर दिया था। ट्रीटमेंट प्लांट पर प्रशासन ने विचार का आश्वासन दिया है।

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