जापान ने कैसे पाया कोरोना पर काबू ?

Submitted by HindiWater on Sat, 04/04/2020 - 08:05

मैं लगातार सोच रहा हूं कि जब जापान जनवरी में चीन से लग्जरी जहाज डायमंड प्रिंसेस की वजह से कोरोना से प्रभावित होने वाला पहला देश था, अब तक यह यूरोपीय देशों की तरह स्टेज-4 में चला गया होगा। जब जापान में कोरोनावायरस फैला तो मेरे माता-पिता ने मुझे कुछ महीनों के लिए भारत वापस आने और सब सामान्य होने के बाद वापस जाने को कहा, लेकिन जापान में अब तक सब कुछ सामान्य है। हम रोजाना दफ्तर जा रहे हैं। सभी आवश्यक सेवाएं मिल रही हैं। कोई भी रेस्टोरेंट बंद नहीं है। कोई मॉल बंद नहीं है। मेट्रो ट्रेन सामान्य रूप से चलती है। बुलेट ट्रेन सामान्य रूप से चलती है। सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाएं खुली हैं। इसके अलावा जापान में इटली से भी ज्यादा बुजुर्ग हैं। टोक्यो में सबसे ज्यादा विदेशी रहते हैं। बहुत सारे विदेशियों के साथ टोक्यो पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। विदेशियों को अभी भी अंदर आने दिया जाता है। अगर कहीं रोक लगी है तो वह है स्कूल और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर।

मैं लॉकडाउन चेन को तोड़ने के बारे में सुन रहा हूं। भारत जैसे घनी आबादी वाले देश में लॉकडाउन क्यों नाकाम है और टोक्यो दुनिया का सबसे घनी आबादी वाला शहर है और इसे कैसे नियंत्रित किया जाता है ?  हम हमेशा की तरह सामान्य जीवन जी रहे हैं। जब मैं भारत से अपडेट और समाचार देखता हूं तो केवल डर लगता है।

  • जापानी लोग जब यात्रा करते हैं या बाहर आते हैं तो मास्क पहनते हैं। आमतौर पर हम सामान्य दिनों में 60 प्रतिशत मास्क पहनकर देखते हैं यहां तक कि बहुत कम ठंड में भी लोग मास्क पहनते हैं। यह उनकी संस्कृति थी, जिसने प्रसार को रोकने और कोरोनावायरस की चेन को तोड़ने में मदद की।
  • जापानी लोग ऐसे जीवन जीते हैं, जहां वह दूसरों को परेशान नहीं करते हैं। वे कहीं गंदगी नहीं फैलाते कूड़ा करकट या थूकने के लिए डस्टबिन का ही इस्तेमाल करते हैं। स्वच्छता उनकी संस्कृति का हिस्सा है। उन्हें सिखाया गया है कि स्कूलों में शिक्षा हासिल करने से पहले कैसे स्वच्छ और सार्वजनिक व्यवहार किया जाए।
  • वे हाथ मिला ले मिलाने के लिए नहीं बल्कि नमस्कार करने के लिए झुकते।
  • यह हाथ धोना संस्कृति का एक हिस्सा है। हमारे पास सार्वजनिक शौचालय कार्यालय प्रवेशद्वार और आमतौर पर सार्वजनिक स्थल पर साबुन और सैनिटाइजर है। सैनिटाइजर का उपयोग करना बहुत आम है, जो वायरस के प्रसार को रोकता है। मैंने सैनिटाइजर का उपयोग कभी नहीं किया, लेकिन पिछले 2 महीनों से मैं कार्यालय में प्रवेश करने से पहले सैनिटाइजर का उपयोग करता रहा हूं। एक एलिवेटर का उपयोग कर रहा हूं। जिस क्षण मैं सैनिटाइजर का उपयोग करता हूं।
  • टॉयलेट में मैंने देखा कि लोग अपने हाथों को धोते हैं और सिंक के एरिया को भी साफ करते हैं। और अगले व्यक्ति को इसका उपयोग करने के लिए आरामदायक बनाते हैं। सार्वजनिक मेट्रो स्टेशनों में भी यह एकसामान्य प्रथा है।
  • वे बाहर जाने पर कभी-कभी अपने हाथों को साफ करने के लिए गीले टिशू के पैकेट रखते हैं।
  • सामान्य तौर पर सभी के साथ दूरी बनाए रखते हैं।

इस संस्कृति के चलते जापान को लॉकडाउन को रोकने में मदद मिली। इसके लिए बहुत साधना की जरूरत है। यह नियम जापानी संस्कृति का हिस्सा थे। जिस कार्य पूर्णता के साथ अभ्यास करते थे। जापान से कुछ सीखना है।

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