जल चिकित्सा एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति

Submitted by admin on Thu, 04/17/2014 - 13:26
Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की पत्रिका 'जल चेतना', जुलाई 2013

संसार में जितनी भी चिकित्सा पद्धतियां हैं उनमें जल चिकित्सा सबसे प्राचीन है। प्राकृतिक, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में इसका काफी महत्ता बताई गई है। अब तो इसे एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में भी अपनाया जा रहा है। जापान में तो जल चिकित्सा पद्धति काफी लोकप्रिय है। तथा अनेक रोगों का उपचार इससे किया जा रहा है। यह किसी औषधि से कम नहीं है।जल प्रकृति का अनुपम और अनमोल उपहार है। यदि धरती पर जल नहीं होता तो आज जीवन संभव नहीं होता। जल केवल प्यास बुझाने की वस्तु मात्र नहीं है। अपितु यह जीवनदाता है यानि इंसान की मूल जरूरत है। इसके बगैर एक सप्ताह भी जिंदा रहना मुश्किल है। हमारे शरीर में 70 प्रतिशत जल का भाग है। यही कारण है कि इसकी कमी जहां अनेक रोगों का कारण बनती है, वहीं इसकी समुचित मात्रा रोगों से निजात दिलाती है।
संसार में जितनी भी चिकित्सा पद्धतियां हैं उनमें जल चिकित्सा सबसे प्राचीन है। प्राकृतिक, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों में इसका काफी महत्ता बताई गई है। अब तो इसे एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में भी अपनाया जा रहा है। जापान में तो जल चिकित्सा पद्धति काफी लोकप्रिय है। तथा अनेक रोगों का उपचार इससे किया जा रहा है। यह किसी औषधि से कम नहीं है।

जल को आप साधारण वस्तु न समझें। क्या आप जानते हैं कि यह हमारे शरीर को किस तरह से स्वस्थ और निरोगी रखकर दीर्घायु बनाता है। आइए, डालते हैं जल के औषधीय गुणों पर एक नजर।

1. पानी पीने से थकान दूर होती है। तथा राहत मिलती है। इसलिए जब भी थके-मांदे घर लौंटे तो एक गिलास पानी अवश्य पिएं।
2. यदि बुखार बहुत तेज हो तो रोगी को हर आधे घंटे में ठंडा पानी पिलाते रहना चाहिए।
3. यदि कोई व्यक्ति मूर्छित हो गया हो तो उसके चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारें या उसे शीतल जल से भरे टब में लिटा देना चाहिए।
4. यदि साइटिका की शिकायत हो तो ठंडे पानी से सुबह-शाम करना चाहिए।
5. बच्चों के सूखा रोग में प्रतिदिन ठंडे जल से स्नान कराने से लाभ होता है।
6. काली खांसी होने पर भी प्रतिदिन शीतल जल से ही स्नान करने से राहत मिलती है।
7. हिस्टीरिया में रोजाना शीतल जल से स्नान करने से दौरे की आकृति और तीव्रता कम हो जाती है।
8. आग से शरीर का कोई अंग जल या झुलस जाए तो तुरंत प्रभावित अंग पर ठंडा पानी का छिड़काव करें। यह छिड़काव तब तक करें जब तक कि जलन पूर्णतः बंद नहीं हो जाती।
9. अस्थमा या दमा रोग मे रोगी को रोजाना सुबह उठते ही एक गिलास ठंडा पानी पीना चाहिए।
10. जल हमारे शरीर शुद्धिकरण के लिए आवश्यक है। इसके अभाव में विजातीय तत्व शरीर से बाहर नहीं निकल पाते। पसीना और मूत्र तभी बनेगा जब आप पानी पिएंगे।
11. पानी का समुचित मात्रा में सेवन करने से खाए गए पोषक तत्वों का अवशोषण होता है।
12. रक्त बनाने में आंतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि छोटी एवं बड़ी आंत सक्रिय बनी रहे तो रक्त निर्माण निर्बाध गति से होता है।
13. जो लोग पानी पीने में कंजूसी बरतते हैं उन्हें कब्ज की शिकायत सदैव बनी रहती है। पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करने से आंतों की सक्रियता बढ़ती है तथा मल निष्कासन में परेशानी नहीं होती। बवासीर, फिशर तथा फ्रिश्चुला जैसी बीमारियां भी उन्हें घेरती हैं, जो पानी कम पीते हैं।
14. मोटापे से परेशान हो तो पानी डटकर पिएं। इससे पेट भरा-भरा लगता है और शरीर को खाद्य सामग्री की जरूरत कम पड़ती है।
15. गुर्दे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हैं। यदि आप पानी कम पीते हैं तो इससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है जबकि पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से वे भलीभांति कार्य करते हैं।
16. पीलिया रोग में भी जल का सेवन बहुत लाभदायक है। इससे रक्त में व्याप्त अशुद्धियां बाहर निकल जाती हैं।
17. जी घबराना, हृदय की धड़कन बढ़ने आदि पर घूंट-घूंट कर ठंडा जल पीने से तुरंत राहत मिलती है।
18. बुखार होने पर रोगी के माथे व पेट पर ठंडे पानी की पट्टी रखनी चाहिए। इससे बुखार उतरने में मदद मिलती है।
19. तांबे के बर्तन में रात भर रखा पानी सुबह पीने से पेट संबंधी रोगों का नाश होता है।
20. जो लोग पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करते हैं उन्हें बुढ़ापा देर से आता है। उनके चेहरे पर समय से पूर्व झुर्रियां भी नहीं पड़तीं।
21. गर्मियों में घर से बाहर निकलने पर लू लगने का अंदेशा रहता है। ऐसे में घर से निकलने से पूर्व एक गिलास ठंडा पानी पी लिया जाए तो लू से बचाव हो सकता है।
22. स्तनपान कराने वाली माताओं को पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए। इससे उनमें दूध की मात्रा बढ़ती है।
23. आंखों में छोटा-मोटा कीड़ा, कचरा आदि घुस गया हो तो साफ शीतल जल से आंख धोने से अवांछित वस्तु निकल जाएगी तथा आपको राहत मिलेगी।
24. नकसीर फूटने पर रोगी के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखें। इससे नाक से होने वाला रक्तस्राव बंद हो जाएगा।
25. प्रातः शीतल जल के छींटे आंखों पर मारने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।
26. महिलाओं को अपने स्तन पुष्ट करने के लिए स्नान करते समय ठंडा एवं गर्म जल बारी-बारी से स्तनों पर डालना चाहिए। इससे उनमें कसाव पैदा होता है।
27. आईफ्लू यानि कंजेक्टिवाइटिस होने पर दिन में कई बार साफ, शीतल जल से आंखें धोने से राहत मिलती है।
28. जल ही शरीर के तापक्रम को नियमित करके शरीर की गर्मी को समान रूप से बनाए रखता है।
29. रक्त को तरल व गतिशील बनाए रखने में जल विशेष उपयोगी है।
30. पर्याप्त मात्रा में जल पीने से ही शरीर की हड्डियां और जोड़ क्रियाशील रहते हैं।
31. डिहाइड्रेशन में तो जल का सेवन किस संजीवनी बूटी से कम नहीं उल्टी, दस्त, लू आदि की वजह से हुए डिहाइड्रेशन से जान भी जा सकती है। उल्टी-दस्त होने पर पानी में ‘ओआरएस’ का घोल बनाकर लेना चाहिए।
32. शरीर को जल की आवश्यकता प्राकृतिक बात है। यदि आप पानी नहीं पिएंगे तो जल की पूर्ति आपके रक्त, मांसपेशियों और विभिन्न कोशिकाओं से होती हैं। इससे अन्य शारीरिक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
33. जल में प्राकृतिक रूप से रोगों से लड़ने की शक्ति होती है। जो लोग समुचित मात्रा में जल का सेवन करते हैं वे रोगाणुओं के हमले से बचे रहते हैं।
34. शीतल जल से स्नान करने से न केवल शरीर में व्याप्त मैल, गंदगी ही दूर होती है अपितु ताजगी एवं स्फूर्ति का एहसास भी होता है।
35. जल के सेवन से शरीर की नाड़ियां उत्तेजित होती हैं तथा मांसपेशियां संकुचित।
36. जल की कमी से जोड़ों को आधार प्रदान करने वाली गद्दियों में लचीलापन समाप्त हो जाता है थथा वे सिकुड़ जाती हैं।
37. जल का सेवन नए ऊतकों के निर्माण में सहायक होता है तथा उन्हें सुरक्षात्मक कुशन प्रदान करता है।
38. शरीर में लगातार मेटाबोलिक क्रिया चलती रहती है जिसमें पानी की लगातार जरूरत होती है। इन्हीं क्रियाओं के फलस्वरूप हमें एनर्जी मिलती है। प्रातःकाल पिया गया पानी उषापान कहलाता है। इससे मनुष्य के यौवन और आयु में वृद्धि होती है।
39. जो लोग पानी कम पीते हैं उनकी याददाश्त कमजोर होती है।
40. पानी पीने से मुंह में लार और थूक बनता है। लार पाचन क्रिया में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
41. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बड़ी आंत के कैंसर से बचाता है।
42. समुचित मात्रा में पानी का सेवन स्तन कैंसर की आशंका कम करता है। पानी अधिक पीने से ब्लड कैंसर का खतरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है।
43. पथरी होने पर रात्रि भोजन के पश्चात् एक गिलास गर्म पानी पीना चाहिए।
44. यदि पैरों में सूजन आ गई हो तो गर्म पानी में थोड़ा सा नमक डालकर उसमें पैर डुबोकर रखें
45. यदि कमर या पीठ दर्द सताए तो गर्म पानी की थैली से सिकाई करने से लाभ होता है।
46. नमकीन पानी में नहाने से गठिया के दर्द में राहत मिल सकती है।हाल में हुए शोध से पता चलता है कि उच्च सांद्रता वाले नमक के घोल के सूजन के कारण फैली कोशिकाओं को राहत मिलती है और इससे किसी तरह का साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।
47. यदि टॉसिल्स बनने की शिकायत हो तो गर्म पानी में एक चुटकी नमक डालकर गरारे करने से लाभ होता है।
48. यदि कब्ज की शिकायत हो तो रात को सोते समय तथा सुबह उठने के बाद गर्म जल का सेवन करना चाहिए।
49. सर्दियों में कफ की शिकायत हो तो सूर्य तापित जल का सेवन करना चाहिए।

आप जो भी जल का सेवन करें, वह शुद्ध और कीटाणु रहित होना चाहिए। प्रदूषण जल बीमारियों का कारण बन सकता है। वैसे तो जब प्यास लगे, पानी पीना चाहिए लेकिन व्यायाम या संभोग के तुरंत पश्चात् नहीं पीना चाहिए। इसी प्रकार भोजन के तुरंत बाद, चाय, दूध पीने के तुरंत बाद, शौच के तुरंत बाद, तेज धूप से लौटने के तुरंत बाद तथा पके फल और मेवे खाने के तुरंत बाद पानी का सेवन नहीं करना चाहिए।

सम्पर्क :
डॉ. विनोद गुप्ता, रामटेकरी, 43/2, सुदामा नगर, मन्दसौर (मध्य प्रदेश) 458001
फो. 07422-224335, मो.09826042811,
ईमेलः anucomputer@rediffmail.com

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