जल संरक्षण में जन भागीदारी

Submitted by admin on Tue, 04/29/2014 - 11:23
Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की पत्रिका 'जल चेतना', जुलाई 2013

हमारी पृथ्वी के सतह का 70 प्रतिशत भाग जलमग्न है। इस जल का 2.5 प्रतिशत जल का उपयोग ही मानव के द्वारा किया जाता है संपूर्ण जल का 97.5 प्रतिशत जल लवणीय होने के कारण मानव के लिए उपयोगी नहीं है। मानव द्वारा उपयोगी 2.5 प्रतिशत जल में से 1 प्रतिशत जल बर्फ के रूप में पाया जाता है। इसमें से 5 प्रतिशत जल नमी के रूप में एवं गहरे जलाशयों, नदी, नाले, तालाब आदि के रूप में पाया जाता है। बढ़ती जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन होने से आज मनुष्य के सामने कई समस्याएं उत्पन्न हुई हैं इनमें से जल संकट एक महत्वपूर्ण समस्या बन कर प्रकट हुई है। जल ही जीवन है। जल के बिना आज कुछ भी संभव नहीं है। जल के अभाव में जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

हमारे देश में शुद्ध पेयजल की एक गंभीर समस्या है। हमारा देश नदियों का देश होने के बाद भी इसके कई भागों में आज शुद्ध पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यह समस्या सरकार के साथ-साथ संपूर्ण मानव जाति के लिए एक चुनौती साबित हो रही है। बढ़ती जनसंख्या और औद्योगीकरण के तेजी से बढ़ने के कारण वन विनाश ने जल संकट को बढ़ावा दिया है।

पर्यावरण असंतुलन से जल संसाधनों के स्रोत घटने से पेयजल स्रोतों की संख्या में कमी आती चली जा रही है। इस कारण वनों का विनाश, ग्लेशियरों के सिमटने, प्राकृतिक आपदाओं-भूकंप भूस्खलन आदि के कारण पानी की मात्रा एवं गुणवत्ता में कमी आने लगी है।

इस अंधी दौड़ में हम भूल रहे हैं कि जैसे-जैसे पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का दिन-प्रतिदिन ह्रास होता चला जा रहा है और पर्यावरण असंतुलन बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां वातावरण में दिन प्रतिदिन हो रहे परिवर्तन के लिए पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं वहीं सरकार द्वारा इस दिशा में सराहनीय प्रयास किए जा रहे हैं। जो काफी हद तक जन संरक्षण में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

हमारी पृथ्वी के सतह का 70 प्रतिशत भाग जलमग्न है। इस जल का 2.5 प्रतिशत जल का उपयोग ही मानव के द्वारा किया जाता है संपूर्ण जल का 97.5 प्रतिशत जल लवणीय होने के कारण मानव के लिए उपयोगी नहीं है। मानव द्वारा उपयोगी 2.5 प्रतिशत जल में से 1 प्रतिशत जल बर्फ के रूप में पाया जाता है। इसमें से 5 प्रतिशत जल नमी के रूप में एवं गहरे जलाशयों, नदी, नाले, तालाब आदि के रूप में पाया जाता है। जिसका उपयोग विशेष तकनीकी के बिना संभव नहीं है।

अतः हम कह सकते हैं कि जल का मात्र 1 प्रतिशत हिस्सा ही मानव के लिए उपयोगी है। इसी 1 प्रतिशत हिस्सा से ही संपूर्ण विश्व में 70 प्रतिशत क्षेत्र की सिंचाई की जाती है तथा विश्व की 80 प्रतिशत आबादी अपने दैनिक क्रिया कलापों एवं पीने हेतु इसी जल पर निर्भर है। इसी जल का उपयोग बड़े उद्योग तथा कल कारखाने भी करते हैं।

अतः आज जल के महत्व को देखते हुए जल संरक्षण की दिशा में प्रत्येक मानव को आगे आना होगा और जल की एक-एक बूंद का संरक्षण करना होगा। इस दिशा में हमारे साथ-साथ मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेयजल की व्यवस्था मुकम्मल की जा रही है।

जल संसाधन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार तथा मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इस दिशा में लगातार कई परियोजना संचालित की जा रही हैं। केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल मिशन, एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना जल संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है तो दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में जलाभिषेक अभियान योजना जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल मिशन


यह योजना 1 अप्रैल 2009 को ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के पेयजल आपूर्ति विभाग के द्वारा प्रारंभ की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक हेतु पेयजल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल मिशन आज हमारे देश के प्रत्येक राज्य में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के लिए कार्य करता है। इसके लिए सरकार के द्वारा राष्ट्रीय पेयजल गुणवत्ता निगरानी तथा जांच कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं जिससे शुद्ध पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था मुकम्मल की जा सके। इस योजना के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत को जल परीक्षण फील्ड किट प्रदान की गई है जिससे ग्राम पंचायत स्तर पर जल के नमूने लेकर उनका परीक्षण किया जा सके।

एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम


हमारे देश के 329 मिलियन हेक्टेयर भौगोलिक क्षेत्र में से 146 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र है तथा 85 मी. हेक्टेयर वर्षा सिंचित कृषि योग्य भूमि है जिसमें पंचायत, राजस्व, वन एवं निजी स्वामित्व वाली अवक्रमित भूमि है। ऐसी सभी भूमि को इस वाटरशेड विकास परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है। एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम (वाटरशेड विकास परियोजना) आज जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

हमारे देश में ग्राम पंचायतों को प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन करने एवं ग्राम सभाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु इस दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इस कार्यक्रम को प्रभावी व सफल बनाने के लिए दूर संवेदी आंकड़ों एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग को प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के द्वारा जल संरक्षण के माध्यम से ग्रामीण विकास की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है।

जल संरक्षण के कार्यों को अपनाए जाने से कुछ सीमा तक जल संकट की समस्या हल हुई है। मध्य प्रदेश में इस योजना के तहत लगभग 300 विकास खंडों में यह योजना संचालित की जा रही है। वहीं मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के 8 विकासखंडों के लगभग 500 गांवों में यह योजना संचालित की जा रही है।

इस मिशन के द्वारा मिट्टी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं संवर्धन को आधार बना कर कार्य योजना बनाई गई है जो जल संरक्षण एवं भूमि सुधार के लिए वरदान साबित हो रही है। जिले में गर्मियों के दिनों में जल का स्तर भूमि के काफी नीचे चले जाने से जिले में मार्च, अप्रैल, मई एवं जून में पानी की कमी से जूझना पड़ता है। राजीव गांधी जल ग्रहण मिशन कार्यक्रम से जिले में जल संरक्षण एवं भूमि सुधार के अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

मनरेगा के तहत ग्रामीण जल स्रोतों को मिला जीवनदान


महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना वर्ष 2006 से प्रारंभ हुई थी। यह योजना जल संरक्षण की दिशा में आज एक नई ईबादत लिख रही है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में पेयजल की एक विकराल समस्या थी। जिसमें शिवपुरी जिला भी इस समस्या से जूझ रहा था। जिले के 200 से अधिक ग्राम पंचायतों में अप्रैल, मई, जून के महीने में पेयजल समस्या एक विकराल रूप धारण कर लेती थी।

इसी के साथ जिले में वर्षा, औसत से कम होने के कारण जिले में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न मिलने के कारण जिले के कई हिस्सों में फसलों से पर्याप्त मात्रा में अनाज का उत्पादन न होने से जिले में भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो जाती थी जिससे जिले की 75 प्रतिशत ग्रामीण लोग पलायन कर जाते थे। लेकिन आज सरकारी प्रयास से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी के कारण जिले में काफी हद तक पेयजल एवं सिंचाई की समस्या हल हुई है। वर्षा जल पर निर्भर खेती में कफिल धारा कूपों के प्रयास से सिंचाई की जा रही है। वहीं कुओं के जल स्तर में भी वृद्धि हुई है।

ग्रामीण क्षेत्र में मनरेगा के तहत जहां गांव में विकास कार्य हो रहे हैं, वहीं लोगों को रोजगार सुनिश्चित हो रहे हैं। लोग गांव में काम न होने के कारण शहर की तरफ पलायन कर जाते थे, आज लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो रहा है। आज मनरेगा की पेयजल व्यवस्था के तहत कुछ महत्वपूर्ण निर्माण भी हुए हैं जिससे काफी हद तक पेयजल समस्या का समाधान हुआ है।

जलाभिषेक अभियान योजना


मध्य प्रदेश में जलाभिषेक अभियान योजना जल संरक्षण की दिशा में वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत पुराने जल संरक्षण के संसाधन जैसे नदी, डैम, तालाब, बावड़ी, कुएं, नहर, नालों को प्राकृतिक रूप प्रदान किया जा रहा है जिससे जल की संरक्षण क्षमता को बढ़ाया जा सके। यह योजना जन भागीदारी (आम जनता) के द्वारा मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में संपन्न हो रही है।

इस योजना में आम नागरिक, सामाजिक संस्थाएं, स्कूल, कालेज के छात्र/छात्राओं के साथ स्कूल, कालेज प्रबंधन, चिकित्सक, जिला कलेक्टर, वकील एवं अन्य शासकीय कर्मचारी बढ़-चढ़ श्रमदान कर अपना योगदान प्रदान कर रहे हैं। जिससे आज मध्य प्रदेश के प्रत्येक जिले में जल संरक्षण के संसाधन को जीवनदान प्रदान किया जा रहा है। यह योजना जहां एक तरफ जल संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी कदम है वहीं इससे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्र की पेयजल की समस्या काफी हद तक कम हुई है।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के 8 विकासखंडों के लगभग 200 जल संसाधनों को इस योजना के तहत संरक्षण प्रदान किया जा रहा है। इस दिशा में सरकार के साथ-साथ आम नागरिक का प्रयास भी सराहनीय है।

सम्पर्क
श्री यशपाल सिंह नरवरिया, जलीयजीव, प्रयोगशाला, प्राणिकी अध्ययनशाला, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर म.प्र.

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