जंतर मंतर पर महापंचायत की तैयारी

Submitted by Hindi on Fri, 04/29/2011 - 09:21
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मान मंदिर सेवा संस्थान द्रस्ट

देश के सभी भागों से भारी समर्थन गृह मंत्रालय द्वारा गठित समिति का वज़ीराबाद दौरा - एक और विफलता


ताजेवाला पर हथिनीकुंड बाँध का दौरा करने के बाद यमुना जी की खराब स्थिति के कारण पिछले 15 दिनों से जंतर मंतर पर बैठे प्रदर्शनकारियों की मनोदशा काफी बिगड़ गई है। उल्लेखनीय है कि हथिनीकुंड बाँध से पानी की 160 क्यूसेक की राशि (जिसमें दिल्ली तक नदी तल को भरने की क्षमता भी नहीं है) की रिहाई सुनिश्चित है, परन्तु वहाँ से एक बूँद भी पानी नहीं छोड़ा जा रहा। सरकार द्वारा किया गया सब छल स्पष्ट है, और अब आगे जनता ठगी नहीं जाएगी।

हथिनीकुंड बाँध पर यमुना जी की खराब स्थिति देखने के बावजूद, आज ही सरकार द्वारा गठित समिति के सदस्य पहले से निर्धारित वज़ीराबाद बाँध का दौरा करने व इस परिदृश्य की और साफ तस्वीर सामने लाने के लिए गए। यह पुन: उल्लेखनीय है कि वज़ीराबाद बाँध में पानी की 140 क्यूसेक की राशि की रिहाई सुनिश्चित है। समिति के सदस्यों में केन्द्रीय जल आयोग, योजना आयोग, हरियाणा सिंचाई विभाग, दिल्ली जल बोर्ड, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के उच्च अधिकार कार्मिकों सहित भारतीय किसान यूनियन (भानू) के राष्ट्रीय संरक्षक - जय कृष्ण दास बाबा, भानू के राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव - राजेंद्र प्रसाद शास्त्री, स्वामी नारायण दास बाबा और राधा प्रिय (अपर नितेश दूबे) वज़ीराबाद गए।

राजेंद्र प्रसाद जी ने बताया कि वज़ीराबाद पर भी पानी की रिहाई का निरीक्षण निराशाजनक साबित हुआ। वहाँ पर प्रदूषित जल को देखकर जब समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से पूछा तो उन्होंने स्वयं ही इस तथ्य को स्वीकार किया कि पिछले एक वर्ष से नजफगढ़ नाले में पानी नहीं छोड़ा गया। अधिकारियों ने कहा कि जिस नहर से नजफगढ़ नाले में पानी डाला जाना चाहिए वह पूरी तरह से सूखी है। राजेंद्र प्रसाद जी ने यह भी कहा कि यह उच्चतम न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन की खराब नीयत दिखाता है। यह हरियाणा सरकार की गलत मंशा की एक स्पष्ट तस्वीर को दर्शाता है।

राधा प्रिय जी ने कहा कि हथिनीकुंड बाँध से 160 क्यूसेक्स जल की व नजफगढ़ नाले में 140 क्यूसेक्स जल की रिहाई की अभिपुष्टि केवल मूर्ख बनाने वाली बात है। इस से जंतर-मंतर पर बैठे किसान व् साधू-संत बहुत निराश हुए हैं। सरकार इस मामले पर विचार करने का धोखा दे रही है। उचित समाधान (पूरी नदी में पानी की पर्याप्त मात्रा, नदी में मलजल जाने से रोकना) का क्रियान्वयन कहीं भी मौजूद नहीं है।पूरी यमुना नदी में केवल न्यूनतम जल प्रवाह के उद्देश्य से, ताकि इसके पर्यावरण को बनाए रखा जा सके, जंतर-मंतर पर धरनारत किसानों और साधुओं ने 1 मई को जंतर-मंतर पर ही एक महापंचायत बुलाई है, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से किसान आएँगे और इस आन्दोलन में भाग लेंगे। हजारों किसानों ने 1 मई को उनके जंतर मंतर पर आने की पुष्टि की है। सरकार को पानी को रिहा करने की फिर से एक अंतिम चेतावनी दी गई है ताकि 1मई तक यमुना का पानी मथुरा तक पहुँच जाए। यदि 'पानी छोड़ो! यमुना नदी में यमुना नदी का पानी बहने दो' का अनुपालन विफल रहा तो यह आन्दोलन और भी उग्र रूप ले लेगा।

उल्लेखनीय है कि आगामी रविवार, यानि 1 मई को मुंबई में हजारों श्रद्धालु फिर से यमुना बचाओ अभियान के समर्थन में प्रदर्शन करेंगे। मथुरा-वृन्दावन में भी इसी रविवार को एक महापंचायत का आयोजन किया गया है।

इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप इस सरगर्म घटना को कवर करें और इस उत्कृष्ट सेवा का हिस्सा बनें चूंकि पानी सभी जीवित प्राणियों के अस्तित्व के लिए परमावश्यक है।

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