कहा नदी ने

Published on
1 min read

चट्टानों से चूर-चूर होने का नाटक
चट्टानों को बहलाने के लिए नहीं है

पाला पड़ा
जनम लेते ही
चट्टानों से

पानी की चट्टानें भी
चट्टाने ही हैं

फिर आते गिरि-गह्वर, समतल
और विषम भी

आएगी फिर कोख
कंदरा-मग्न कपिल भी
फिर आएँगे सगर-पुत्र
फिर पछताएगी
पूरी वंशावली...और फिर
दुहराएगी वही कथा

फिर?
फिर क्या होगा?

मत पूछो यह
कहा
नदी ने।

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

संबंधित कहानियां

No stories found.
India Water Portal - Hindi
hindi.indiawaterportal.org