कोरोना के बीच मध्य प्रदेश के 100 निकायों में गहराया जल संकट

Submitted by HindiWater on Wed, 04/15/2020 - 08:27

प्रतीकात्मक फोटो - News Track English

पिछले साल अच्छी बारिश होने के कारण अभी तक ये माना जा रहा था कि इस वर्ष मध्य प्रदेश में जल संकट नहीं गहराएगा, लेकिन गर्मियां शुरू होते ही मध्य प्रदेश में जल संकट गहराने लगा हैै। सौ से अधिक नगरीय शहर अभी से जल संकट का सामना कर रहे हैं। कई इलाकों में तो दो दिन छोड़कर एक बार पानी की सप्लाई की जा रही है। जिन इलाकों में पानी की सप्लाई की भी जा रही है, वहां लोगों को जरूरत के अनुरूप पर्याप्त पानी नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में कोरोना के संकट के बीच पानी की किल्लत लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गई है और जनता पर दोहरी मार पड़ रही है। 

कोरोना वायरस दुनिया भर में काफी तेजी से फैल रहा है। भारत में इसके फैलने की गति पहले काफी धीमी थी, लेकिन यहां भी ये काफी तेजी से फैलता जा रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, दिल्ली और उत्तरप्रदेश की तरह ही मध्य प्रदेश के लिए कोरोना समस्या बना हुआ है। मध्य प्रदेश में कोरोना के कारण 730 लोग अभी तक संक्रमित हो चुके हैं, जबकि करीब 50 लोगों की मौत हो चुकी है और संक्रितों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां इंदौर और भोपाल में सबसे ज्यादा मामले हैं। इंदौर तो माना कोरोना का हाॅटस्पाॅट बन गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण को कम करने के लिए लोगों से नियमित तौर पर स्वच्छता बनाए रखने के साथ ही अच्छे से हाथों को साबुन और पानी से धोने की अपील भी जा रही है। इसके अलावा किसी कार्य से बाहर से आने वाले लोगों को घर में प्रवेश करते ही नहाने या पहने हुए कपड़ों को धोने की हिदायत दी जा रही है। सरकार भी कोरोना को रोकने के पूरे प्रयास कर रही है और बिजली, पानी तथा अन्य जरूरी सामग्रियों की कमी न होने के प्रति जनता का आश्वस्त भी किया है, लेकिन ऐसे में समय में जब पानी की जरूरत सबसे ज्यादा है, तब मध्य प्रदेश में भारी जल संकट खड़ा हो गया है।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार मध्य प्रदेश के 378 नगरीय निकायों में से 297 निकायों को ही रोजाना पानी की सप्लाई की जा रही है। कई निकायों में 50 प्रतिशत बोर या तो सूख गए हैं, या जल स्तर गिरने के कारण पर्याप्त जलापूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण आष्टा, जावर, पिछोर, विजयपुर, कुरावर, कोठरी, जावद, भीकनगांव, खरगोन, बागली, देवास, सोनकक्ष, आगर, आमला, जोबट, पंधाना, गौतमपुरा, देपालपुर, करैरा, माकडोन, शुजालपुर, राजगढ़, बिछुआ, डोंगरपरासिया, चांद, पर्डुंना, हाटपिपल्या, टोंकखुर्द, सुसनेर, बड़ागांव, मुलताई, जीरापुर, राजपुर, धार, डही और मेघनगर में पानी की समस्या खड़ी हो गई है। सरदारपुर, सुवासरा, टोंकखुर्द और मेघनगर में लोगों को हर तीसरे दिन पानी दिया जा रहा है।

जलस्तर गिरने से घरों में दिए जाने वाले पानी की सप्लाई में भी गिरावट आई है। पानी का प्रेशर इतना कम है कि दो-तीन मंजिला इमारत में काफी धीमी गति से चढ़ता है। यदि भवन इससे भी ऊंचा है तो काफी समस्या खड़ी हो जाती है। ऊपरी इलाकों में भी पानी का प्रेशर काफी कम है। 70 निकायों में पानी की सप्लाई एक दिन छोड़कर की जा रही है। ऐसे में लोगों के सामने समस्या खड़ी हो गई है कि वे पानी का उपयोग पीने और खाना पकाने सहित अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए करें या हाथ धोने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए। फिलहाल लोगों की समस्या के समाधान के लिए सौ निकायों में पानी की सप्लाई आंशिक रूप से टैंकरों से की जा रही है। 160 निकायों ने तो अभी तक आगामी महीनों में टैंकरों से पानी की सप्लाई के लिए अतिरिक्त राशि की मांग की है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिलहाल लोगों की समस्या कम नहीं होने वाली। हालाकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पेयजल आपूर्ति को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने निर्धारित मापदंड के अनुसार ही प्रति व्यक्ति जलापूर्ति करने के लिए कहा है। 


लेखक - हिमांशु भट्ट (8057170025)

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