क्या इंसान के मल से फैल सकता है कोरोना ?

Submitted by HindiWater on Tue, 03/31/2020 - 15:15

कुछ दिन पहले महानायक अमिताभ बच्चन ने लैंसेट पत्रिका में छपे एक अध्ययन का हवाला देते हुए वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने मानव मल में कोरोना का वायरस पाए जाने की बात कही थी। वीडियो को उन्होंने ट्वीटर पर शेयर भी किया। जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रीट्वीट भी किया। लेकिन स्वास्थ मंत्रालय ने इस प्रकार से कोरोना फैलने की बात से इनकार कर दिया। अभी भी दुनिया भर में इस शोध की चर्चा हो रही है और बीजिंग तथा अमेरिका में कोरोना के संक्रमित मरीज के मल में कोरोना वायरस पाया गया है। ऐसे में हर कोई अब इसके पुख्ता प्रमाण जुटाने में लगा है, लेकिन जब तक मानव मल में कोरोना मिलने की बात प्रमाणित नहीं हो जाती, हमें हर तरह से स्वच्छता बनाए रखनी होगी। 

रूमेटोलाॅजिस्ट और क्लिनिकल इम्यूनोलाॅजिस्ट डाॅ. स्कंद शुक्ला के अनुसार सार्स-सीओवी 2 के नाम से ही ‘रेस्पिरेटरी’ विशेषण लगा हुआ है। ये विषाणु हवा में मौजूद ड्राॅपलेट (सूक्ष्म बूंदों) व इन ड्राॅपलेट्स के वस्तुओं पर बैठ जाने के बाद उन्हें छूने से फैल सकता है। कोविड 19 के लक्षण भी मुख्य रूप से श्वसन-तंत्र से जुड़े होते हैं, लेकिन पिछले कुछ समय में की गई अनेक केस-स्टडी में पेट संबंधी लक्षण भी पाए गए हैं और मल के नमूनों में भी विषाणु के आरएनए और पूरे विषाणुओं की पुष्टि हुई है। सार्स सीओवी 2 का मनुष्य के पाचन-तंत्र से कैसा और क्या संबंध बन रहा है, यह अभी हम जानने लगे हैं। पूरी तरह जानने में समय लगेगा। आशंका है कि सार्स-सीओवी 2 से संक्रमित लक्षणहीन लोग (बच्चे और वयस्क) मल में विषाणु छोड़ रहे हों। इनमें से अनेक ऐसे हैं, जिनके नाक और गले से लिए गए आरटीपीसीआर जांच के नमूने विषाणु के लिए नेगेटिव हो चुके हैं। यानी नाक और गले में विषाणु नहीं मिले, लेकिन मल में ये विषाणु पाया जाता है। जब तक पूरी तरह कुछ स्पष्ट न हो, स्वच्छता के हर आयाम बेहद जरूरी है।

भारत जैसे देशों में स्वच्छता बनाए रखना हमेशा से चुनौती भरा रहा है। सरकारों ने करोड़ों घरों से शौचालय बनवाए हैं, जिसमें सबसे अधिक बीते 6 सालों में स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत बनाए गए हैं। इसने एक तरह से पूरे देश की तस्वीर ही बदल दी। इन शौचालयों के आधार पर कुछ शहरों को, तो राज्यों को खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया गया, लेकिन धरातल पर स्थिति पूरी भिन्न है और खुले में शौच से मुक्ति केवल फाइलों में ही है। ऐेसे में ग्रामीण ही नहीं बल्कि शहरी इलाकों में बड़े पैमाने पर खुले में शौच की जाती है। सार्वजनिक स्थानों पर शौचालयों की स्थिति भी काफी खराब है। कूड़ा निस्तारण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और न ही नगर निकाय ठीक प्रकार से कूड़े का निस्तारण कर पा रहे हैं। देश के अधिकांश नगर निकाय कूड़े का प्रबंधन करने के बजाए, खुले में या डंपिंग ग्राउंड में कचरा फेंक देते हैं और वो वहां सड़ता रहता है। इसके अलावा आज भी देश के तमाम इलाके ऐसे हैं, जहां लोग खुले में ही शौच करते हैं। कई ग्रामीण इलाकों में शौचालय तो बनवाए गए है, लेकिन शौचालयों के उपयोग के प्रति उनमें अभी भी जागरुकता का अभाव है। शौचालयों के सफाई रखने के मामले में भी हम काफी पिछड़े हैं। ऐेसे में जब एक ये प्रमाणित नहीं हो जाता कि मानव मल में भी कोरोना वायरस जीवित रहते हैं, हर किसी को स्वच्छता के सभी आयामों को अपनाना होगा। पूर्ण रूप से स्वच्छ रहना होगा और साथ ही खुले में शौच का बहिष्कार करने की भी आवश्यकता है।


 

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