केदारनाथः गौरीकुंड के तप्तकुंड का मूल स्रोत तल से 12 फीट नीचे पहुंचा

Submitted by HindiWater on Fri, 07/24/2020 - 22:37

केदारनाथ आपदा से पहले तत्पकुंड। फोटो - केदारनाथ-बद्रीनाथ मंदिर समिति

केदारनाथ यात्रा का मुख्य पड़ाव है गौरीकुंड। मां गौरा माई का मंदिर और तप्तकुंड यहां की शोभा बढ़ाते थे। तप्तकुंड का गर्म पानी यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सुकून देने का काम करता था। साल 2013 में आई भीषण आपदा के चलते सब तबाह हो गया था। इस दौरान तप्तकुंड भी पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। तीन साल पहले डीएम मंगेश घिल्डियाल की पहल पर तप्तकुंड का पुनर्निर्माण कार्य शुरू हुआ था। तप्तकुंड के पुनरोद्धार के काम में जुटे मजदूरों ने यहां गरम पानी के स्रोत को ढूंढने के लिए खुदाई की थी। भूजल आयोग की टीम की मौजूदगी में ये काम शुरू किया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि तप्तकुंड का मुख्य स्रोत अपने मूल स्थान से 150 मीटर आगे खिसक चुका है। पानी की गर्माहट अभी भी बरकरार है। तब सामने आया था कि इस पानी की गर्माहट 25 डिग्री से लेकर 45 डिग्री के बीच है। पानी की तीव्रता अभी भी पहले जैसी ही है। गढ़वाल मंडल विकास निगम के अधिकारियों के मुताबिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में तप्तकुंड को संरक्षित करने का काम आधुनिक तकनीकि से किया जा रहा है, लेकिन केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड के तप्तकुंड का तापमान सात से लेकर 10 डिग्री तक बढ़ गया है। यह 45 से 48 डिग्री के बीच रहता था, जो अब 55 डिग्री के करीब है। वहीं, स्रोत के स्राव में भी बढ़ोत्तरी हुई है। 40-60 एलपीएम का यह स्राव अब 80 एलपीएम पर जा पहुंचा है। स्राव बढ़ने का कारण दो तीन स्रोतों का जमीन के भीतर मिल जाना बताया जा रहा है।

तप्तकुंड का मूल स्रोत भी तल से 12 फीट नीचे पहुंच जाने की बात सामने आई है। दरअसल, डीएम ने तप्तकुंड के गर्म पानी की धाराओं और स्रोत के संरक्षण के लिए केंद्रीय जल आयोग और राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (एनआईएच) के विशेषज्ञों की राय मांगी थी। जिसके बाद उन्होंने गौरीकुंड पहुंच सर्वे किया तो स्रोत के नीचे पहुंचने की बात सामने आई। लेकिन यहां की सारी धाराएं सुरक्षित थीं। 

आपदा में पूरी तरह ध्वस्त हो गया था तप्त कुंड का स्त्रोत - फोटो : फाइल फोटो

बता दें कि सन् 2017 में गौरीकुंड कस्बे की सुरक्षा और तप्तकुंड के पुनरूद्धार का जिम्मा सिंचाई विभाग, केदारखंड डिवीजन को सौंपा गया था। उसने सुरक्षा दीवार की बुनियाद तैयार करने के लिए काफी गहराई तक खुदाई की थी। लेकिन उस वक्त स्रोत को खतरा बता दिया गया था, जिसके बाद डीएम ने विशेषज्ञों से सलाह मांगी थी।

तप्तकुंड को केदारनाथ पुनर्निर्माण का मास्टर प्लान तैयार कर रही फर्म के डिजाइन के आधार पर भव्य बनाया जाएगा। प्राकृतिक गर्म पानी के स्रोत के कुंड से प्रस्तावित स्नान कुंडों में पंप से पानी की सप्लाई और निकासी की जाएगी। तप्तकुंड के चारों ओर रंग बिरंगी लाइटों की व्यवस्था की जाएगी। जीएमवीएन के एई डीएस राणा का कहना है कि गौरीकुंड स्थित तप्तकुंड के गर्म पानी के स्रोत की गर्माहट के साथ ही स्राव पहले से अधिक हो गया है। कुछ समय पूर्व पर्यटन सचिव भी यहां निरीक्षण कर चुके हैं।

कार्यदायी संस्था गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) ने तप्तकुंड के लिए तीन करोड़, 57 लाख का रिवाइज एस्टीमेट उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद, देहरादून को भेजा है। बीते साल जारी 96 लाख रुपये से अवमुक्त 26 लाख रुपये में कुंड के चारों ओर कॉलम खड़े कर छत की स्लैब डाली गई है।

बदरी-केदार मंदिर समिति ने लिखा था पत्र

आपदा में ध्वस्त होते के बाद कुंड के गरम पानी का नदी के किनारे होने लगा था। इसके बाद बदरी-केदार मंदिर समिति द्वारा वाडिया भू-विज्ञान संस्थान को पत्र लिखा गया था। मांग की गई थी कि तप्तकुंड को उसके वास्तविक स्वरूप में लाया जाए। इसके बाद अक्तूबर 2016 में यहां विशेषज्ञों द्वारा सर्वे किया था। साल 2017 में एक बार फिर से गहन परीक्षण किया गया था। उस दौरान विशेषज्ञों ने कुछ खास बातें बताई थीं। उस दौरान विशेषज्ञों ने कहा था कि स्रोत तो सुरक्षित है ही, साथ ही यहां ऐसे कई और भी स्रोत हैं। बीते साल ही सिंचाई विभाग को तप्तकुंड के पुनरोद्धार की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद गढ़वाल मंडल विकास निगम को इसे सौंपा गया। 

माता पार्वती ने किया था कुंड का निर्माण

"गौरीकुंड" (Gaurikund) गौरी अर्थात माँ पार्वती का कुंड। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने अपने तप से इस कुंड का निर्माण किया था। तप्त कुंडों का औषधीय गुणों वाला जल चर्म रोगियों के लिए बेहद उपयोगी माना गया है। 'स्कंद पुराण' के केदारखंड में तप्त कुंडों की विस्तार से महत्ता बताई गई है।लेकिन अब ये पौराणिक कुंड ही खतरे में है।


 

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