मध्यकालीन भारत में सिंचाई

Author:
Published on
1 min read

मध्यकालीन भारत में आप्लावन नहरों के निर्माण में तेज प्रगति की गई। नदियों पर बांधों का निर्माण करके पानी को अवरुद्ध किया गया। ऐसा करने से पानी का स्तर ऊंचा उठ गया और खेतों तक पानी ले जाने के लिए नहरों का निर्माण किया गया। इन बांधों का निर्माण राज्य और निजी स्रोतों--दोनों द्वारा किया गया। गियासुद्दीन तुगलक (1220-1250) को ऐसा पहला शासक होने का गौरव प्राप्त है जिसने नहरें खोदने को प्रोत्साहन दिया। तथापि फ्रज तुगलक (1351-86) को, जो कि केन्द्रीय एशियाई अनुभव से प्रेरित था उन्नीसवीं शताब्दी से पूर्व सबसे बड़ा नहर निर्माता माना गया था। ऐसा कहा जाता है कि दक्षिण भारत में पंद्रहवीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य की उन्नति और विस्तार के पीछे सिंचाई एक प्रमुख कारण रहा था।

यह बात ध्यान देने योग्य है कि अपवादात्मक मामलों को छोड़कर अंग्रेजी साम्राज्य के आगमन से पूर्व अधिकांश नहर सिंचाई अपवर्तनात्मक प्रकृति की थी। सिंचाई को बढ़ावा देने के माध्यम से राज्य ने राजस्व बढ़ाने का प्रयास किया और उर्वर भूमि के लिए पुरस्कारों तथा विभिन्न श्रेणियों के लिए अन्य अधिकारों के माध्यम से संरक्षण प्रदान करने का प्रयास किया। सिंचाई ने रोजगार अवसरों में भीवृद्धि कर दी थी तथा सेना और अधिकारी-तंत्र को बनाए रखने के लिए अधिशेष के सृजन में मदद भीकी थी। क्योंकि कृषि-विकास अर्थव्यवस्था का मूलाधार था इसलिए सिंचाई प्रणालियों की ओर विशेष ध्यान दिया गया। यह बात इस तथ्य से पता चलती है कि सभी विशाल, शक्तिशाली और स्थिर साम्राज्यों ने सिंचाई विकास की ओर ध्यान दिया।

लेटेस्ट अपडेट्स के लिए हमारे व्हाट्सऐप चैनल को फॉलो करें

संबंधित कहानियां

No stories found.
India Water Portal - Hindi
hindi.indiawaterportal.org