मूर्ति विसर्जन के बाद नदी से निकला 2 ट्राली कचरा

Submitted by HindiWater on Sat, 11/07/2020 - 12:58

मूर्ति विसर्जन से नदियां प्रदूषित हो रही है । इसे रोकने के लिए जहाँ केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मूर्ति विसर्जन के पुराने नियमों में बदलाव किए हैं। तो वही दूसरी तरफ देश के युवाओ ने भी नदियों को साफ करने का अभियान चला रखा है। 01 नवंबर मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस के अवसर पर विदिशा में बेतवा नदी पर वाटर कीपर अलायंस के युवाओं द्वारा विशेष सफाई अभियान चलाया गया। जिसके तहत लगभग 2 ट्राली से अधिक मूर्ति के स्ट्रक्चर्स एवं बड़ी मात्रा में कचरा को निकाला गया। इस बीच अपर बेतवा रिवर कीपर मनोज पांडे ने बताया की

दुर्गा विसर्जन के दौरान उनकी युवाओं की टीम ने बेतवा नदी से निरंतर मूर्ति के स्ट्रक्चर एवं जवारे और कचरा निकाला है। बेतवा को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिये सफाई अभियान लगातार चलाया जा रहा है। जैसे जैसे पानी कम होता जाएगा वैसे वैसे नदी से और मूर्तियों के स्ट्रक्चर बहार निकाले जाएंगे । वही अब तक नदी से 2 ट्रॉली कचरा निकाला जा चुका है 

देश की 323 नदियां है दूषित

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक ''देश की 323 नदियों के 351 हिस्से" प्रदूषित हैं। 17 प्रतिशत जल निकाय गंभीर रूप से प्रदूषित हैं।  ये इतना अधिक है कि पीने लायक भी नही है। बात करे यू पी की तो कानपुर में  गंगा का पानी पूरी तरह काला हो गया है और उत्तराखंड में गंगा 50 स्थानों में प्रदूषित है। बहुत कुछ यही हाल देश की अधिकतर नदियों का भी है।  इसीलिए जरूरी है नदियों को स्वच्छ और साफ रखा जाए।

देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है बेतवा 

साल 2018 में पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक बेतवा नदी देश की  38 सबसे प्रदूषित नदियों में से एक है। जिसमें  केमिकल ऑक्सीजन डिमांड करीब  250 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के आसपास पास है। जो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाने लायक है

मूर्तियों के निर्माण में केवल पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का होगा इस्तेमाल

दैनिक जागरण में 14 मई 2020 को छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सीपीसीबी ने साफ तौर पर कहा है कि मूर्तियों के निर्माण में केवल पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का होगा इस्तेमाल। सीपीसीबी ने कहा है कि एक बार इस्तेमाल करने योग्य प्लास्टिक और थर्मोकोल से मूर्तियां बनाने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी और केवल पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल मूर्तियां, पंडाल, ताजिया बनाने और सजाने में किया जा सकेगा, जिससे कि जलाशयों में प्रदूषण नहीं हो। संशोधित दिशानिर्देश मंगलवार को जारी किए गए, जिनमें कहा गया, 'मूर्तियों के आभूषण बनाने के लिए सूखे फूलों का उपयोग किया जा सकता है, वहीं मूर्तियों को आकर्षक बनाने के उद्देश्य से चमक लाने के लिए पेड़ों से निकलने वाला गोंदनुमा प्राकृतिक राल उपयोग में लाया जा सकता है।' देश में हर साल गणेश चतुर्थी और दुर्गा पूजा जैसे उत्सवों के दौरान मूर्ति विसर्जन के बाद जलाशय और नदियां प्रदूषित हो जाती हैं। ये मूर्तियां आमतौर पर पारंपरिक मिट्टी के बजाय रसायनिक पदार्थो की बनाई जाती हैं

बेतवा नदी भारत के मध्यप्रदेश राज्य में बहने वाली एक ऐसी नदी है जिसे यमुना की सहायक नदी के रूप में भी जाना जाता है जो हमीरपुर के पास यमुना में मिल जाती है यह नदी मध्य प्रदेश में रायसेन से निकलकर उत्तर पूर्व दिशा में भोपाल विदिशा, झांसी ,ललितपुर,के अलावा प्रदेश के और अधिक जिलों में भी बहती है इस नदी की  लंबाई करीबन  590 किलोमीटर है जिसके कारण यह बुल्देखण्ड कि सबसे बड़ी नदी के रूप में भी जानी जाती है।

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