नदियां हमें बचानी होंगी

Submitted by admin on Tue, 04/08/2014 - 15:49
Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की पत्रिका 'जल चेतना', जुलाई 2013

देखों नदियां धधक रही हैं,
हमको आगे आना होगा।
तालाब कुएं सब सूख रहे हैं
इनको हमें बचाना होगा।
निर्मल-निर्मल पानी है देखो,
हमकों क्या-क्या नहीं देते हैं
इनसे ही जीवन है अपना,
अमृत रस ये देते हैं,
गंदगी का है परचम भारी
हमें इसे मिटाना होगा।
देखों नदियां धधक रही हैं,
हमको आगे आना होगा।
नदियों से ही पानी मिलता,
पानी से मिलती हरियाली।
हरियाली से ही बनते जंगल,
और जंगल से मिलती खुशहाली।
सब कुछ हमें ये नदियां देतीं
इन्हें संरक्षित करना होगा।
देखों नदियां सूख रही हैं,
हमकों आगे आना होगा।
जल स्रोत सब नष्ट हो रहे हैं,
इन्हें हमें बचाना होगा।
बूढ़े, बच्चे, नव-जवान
सबको ही आगे आना होगा
गांव-गांव के नालों (गदेरों) को
आज हमें बचाना होगा।
जीवन हैं अपनी ये नदियां,
बच्चे-बच्चे को बताना होगा।
देखों नदियां सूख रही हैं
हमको आगे आना होगा।
बच्चे ही हैं देश की ताकत
इनको ही आगे आना होगा।
ऐसे बर्बाद न करो यह पानी
गांव-गांव में जाकर यह बताना होगा,
जैवविविधता नष्ट हो रही है
इसको हमें बचाना होगा।
देखों नदियां भी अब कह रही हैं,
इंसानों जरा तरस तो खाना
जलजीव सब तड़प रहे हैं
इन्हें हमें बचाना होगा।
मानव की करतूतों से ही
जलस्तर हो रहा है कम,
इसके अत्याचारों से ही नदियां
तोड़ न दें कहीं अपना दम।
इन करतूतों पर रोक लगाकर
नदियां हमें बचानी होंगी।
देखों नदियां धधक रही हैं,
हमको आगे आना होगा।
तालाब-कुएं सब सूख रहे हैं
इनको हमें बचाना होगा।

सम्पर्क
श्री राहुल पुरोहित, कक्षा-12, रा.इ.का. गोपेश्वर (चमोली)

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