पानी भरना है तो सोने से पहले अलार्म लगाना न भूलें

Submitted by Hindi on Tue, 03/10/2015 - 12:00
Source
राजस्थान पत्रिका, 25 फरवरी 2015
राजधानी के 70 क्षेत्रों में तड़के तीन बजे होती है पानी सप्लाई
महापौर आलोक शर्मा ने बाणगंगा क्षेत्र में तड़के तीन बजे होने वाली पानी की सप्लाई का समय बदलने के भले ही निर्देश दे दिए हैं, लेकिन राजधानी के 70 क्षेत्रों के 50 हजार से अधिक लोग इसी तरह की दिक्कत का सामना कर रहे हैं। नर्मदा, कोलार के साथ ही बड़े तालाब से पर्याप्त पानी मिलने के बावजूद जलापूर्ति सिस्टम लड़खड़ाया हुआ है। यहाँ तड़के तीन बजे से जलापूर्ति शुरू कर दी जाती है, ऐसे में लोगों को आधी रात में जागने के लिए अलार्म लगाकर सोना पड़ता है। ये स्थिति तब है, जबकि नगर निगम जलापूर्ति व्यवस्था बेहतर करने के लिए तीन सालों में 800 करोड़ खर्च कर चुका है।

दिन में 12 बजे तक चलाते हैं पानी
राजधानी में जलापूर्ति का हाल ये है कि कुछ क्षेत्रों में आधी रात को पानी देकर रहवासियों की नींद खराब की जा रही है, तो कुछ क्षेत्रों में जलापूर्ति का समय दोपहर 12 बजे रखकर लोगों के दिन के कार्यक्रम बिगाड़े जा रहे हैं। दोपहर में जलापूर्ति वाले क्षेत्रों में बैरागढ़ प्रमुख है। यहाँ सुबह आठ बजे से 11 और दोपहर 12 बजे तक पानी सप्लाई की जाती है। बैरागढ़ के अलावा लालघाटी, विजयनगर, टीला जमालपुरा, करोंद में भी दोपहर में पानी की सप्लाई की जाती है।

इन क्षेत्रों के रहवासी कर रहे रतजगा
कोहेफिजा, अशोक कॉलोनी, मंगलवारा, सोमवारा
एमएसीटी, माता मन्दिर, राहुलनगर, हर्षवर्द्धन नगर
शास्त्री नगर, बाणगंगा, रविदासपुरा, सिलावटपुरा, जीटीबी कॉम्प्लेक्स, अहीरपुरा, कोलीपुरा
बाग फरहत अफ्जा, इंद्रानगर, खटीक कॉलोनी
अहाता सिकंदरी कुली, गुरु नानकपुरा, शिवनगर
कृष्णा नगर, इंद्रानगर, नूपुर कुंज, बाबा नगर
मुकद्दस नगर, जहांगीरबाद, जिंसी, जोगीपुरा, बीमा कॉलोनी, मोमिनपुरा, अंगूरबाग, सुदामा नगर, अर्जुननगर, अशोका गार्डेन लाजपतराय कॉलोनी, पंजाबी बाग।

पुराने शहर में अब भी एक दिन छोड़कर पानी
पानी सप्लाई का कुप्रबन्धन नए व पुराने शहर की जलापूर्ति व्यवस्था में भी नजर आता है। नये शहर में रोजाना पानी दिया जा रहा है, जबकि पुराने शहर में एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है। इसके चलते यहाँ की 8 लाख से अधिक आबादी को दो दिन तक पानी चलाना पड़ता है।

दस हजार उपभोक्ताओं पर सात कर्मचारी
दस हजार उपभोक्ताओं के घर जलापूर्ति के लिए छह कर्मचारी तैनात हैं। इनमें भी तकनीकीतौर पर दक्ष एक ही कर्मचारी है। 14 सब इंजीनियर हैं, जबकि वार्डवार नॉन टेक्निकल कर्मचारी में एक सुपरवाइजर, एक वॉल्वमैन, एक फिटर व तीन श्रमिक नियुक्त है।

पानी जरूरी इसलिए जागते हैं
प्रेमनगर निवासी अमिता शर्मा बताती हैं कि पानी सबसे जरूरी है, अब यह रात को भी आए तो हमें तो उठना ही पड़ेगा। निगम को इस पर ध्यान देना चाहिए।
बैरागढ़ के शीतलदास मंगतानी के अनुसार दोपहर के समय पानी देने की तुक समझ नहीं आती। सुबह छह बजे जलापूर्ति शुरू कर 10 बजे तक खत्म की जा सकती है।
जहाँगीराबाद निवासी मोहम्मद इरशाद के अनुसार सुबह साढ़े तीन बजे जल का समय है। दो दिन में एक बार जल आता है, वह भी सुबह साढ़े तीन बजे। यदि नहीं उठे तो फिर पानी के लिए भटको।

ये है गणित
275 एमएलडी रोजाना आपूर्ति
160 एमएलडी कोलार डेम से
100 एमएलडी नर्मदा से
27 एमएलडी बड़े तालाब से
170 लीटर प्रति व्यक्ति

जिम्मेदारों का कहना है
हमारे क्षेत्र में सुबह साढ़े तीन बजे पानी दिया जाता है। अब ये रूटीन बना रखा है, इसी के अनुसार पानी देते हैं। - एके रघुवंशी, इंचार्ज जोन-8, जलापूर्ति सिस्टम

हमारे यहाँ सुबह 11 बजे तक पानी दिया जाता है। अब यह क्षेत्रवार अलग-अलग समय में देते हैं। - शैलेंद्र श्रीवास्तव, इंचार्ज, जोन-1, जलापूर्ति सिस्टम

पानी सप्लाई की टाइमिंग ठीक कराएँगे
हमने बाणगंगा में भी साफ कह दिया था कि लोगों को परेशानी न हो, इस तरह की टाइमिंग रखें। यदि शहर में अन्य स्थानों पर भी टाइमिंग की वजह से लोग परेशान हैं, तो इसे ठीक कराएँगे। - आलोक शर्मा, महापौर

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