पेड़ों को बचाने के लिए RTI को बनाया हथियार

Submitted by Hindi on Sat, 09/03/2011 - 17:38
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आईबीएन-7


नई दिल्ली। वृक्ष हमें जीवन देते हैं, वृक्षों से ही मानवता का इतिहास, वर्तमान और भविष्य जुड़ा है लेकिन समस्या जब खड़ी होती है जब मनुष्य के जीवन से पेड़ो की जिंदगी तबाह होने लगे। दिल्ली की फुटपाथों पर चलने के लिए बिछाई जा रही कंक्रीट और टाइल्स से पेड़ लगातार कमजोर हो रहे हैं और साथ ही उनके अनवरत गिरने का सिलसिला भी जारी है। इस मामले की गंभीरता समझते हुए दिल्ली के ही रोहिणी में रहने वाले अंकित ने अपनी हिम्मत का परिचय दिया। अंकित ने पेड़ो के जीवन को बढ़ाने के लिए RTI को हथियार की तरह इस्तेमाल किया।

अंकित बताते हैं मैं इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी में बी-टेक का स्टूडेंट हूं। मुझे हमेशा हरियाली और पेड़ों से लगाव रहा है। मेरी हमेशा कोशिश रहती है कि मैं अपने आसपास पेड़ों की हिफाजत कर सकूं। इसी कोशिश के दौरान मुझे दिल्ली में पेड़ों पर मंडरा रहा एक बड़ा खतरा नजर आया। दिल्ली के फुटपाथों पर लगे ये पेड़ यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं, लेकिन इन पेड़ों की जान खतरे में है। दरअसल इन पेड़ों के चारों तरफ कंकरीट यानि सीमेंट और गिट्टी डालकर पक्का बना दिया गया है। इससे इन पेड़ों का दम घुटता जा रहा है।

अंकित कहते हैं कि किसी भी पेड़ को जीने के लिए हवा और पानी की जरूरत होती है और अगर वो ही उससे छीन ली जाए तो मौत पक्की है। दिल्ली में धड़ल्ले से पेड़ों को चारो तरफ कांकरीट और टाइल बिछाई जा रहे है जिसकी वजह पेड़ों की जड़े कमजोर हो जाती है। ऐसा नहीं है कि सरकार इस खतरे से वाकिफ नहीं है। पेड़ों की हिफाजत के लिए भी सरकार की किताब में कानून मौजूद है। दिल्ली हाई कोर्ट और दिल्ली ट्री प्रीजर्वेशन एक्ट 1994 में साफ-साफ कहा गया है कि पेड़ों के आसपास 6-6 फीट की कच्ची जमीन रहनी चाहिए लेकिन हकी़कत में होता कुछ और ही है।

ऐसा नहीं है कि पेड़ों की ये हालत सिर्फ रोहिणी में है, बल्कि पूरी दिल्ली में ही पेड़ों के चारो ओर कंक्रीट का जाल बिछा दिया गया है। अंकित कहते हैं कि मैनें सोचा क्यों न जहां मैं रहता हूं वहीं से इन पेडों को बचाने का काम शुरू किया जाए। इसके लिए मैंने दो साल पहले पेड़ों के चारों ओर से कंक्रीट और टाइल्स हटाने के लिए एमसीडी और हॉरीटिकल्चर डिपार्टमेंट में पत्र दिया, लेकिन इन दोनों ही विभागों ने महीने भर तो मुझे कोई जवाब ही नहीं दिया। जब भी मैं वहां गया मुझे मायूसी ही हाथ लगी।

महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद आखिरकार मैनें दो बार RTI दायर की। RTI दायर करने के बाद भी मुझे वही रटा रटाया जवाब मिला वर्क इन प्रोग्रेस। सच्चाई ये थी पूरे रोहिणी में कहीं भी पेड़ों को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा था। इसके बाद अंकित MCD से मिले जवाब से संतुष्ट नहीं हुए इसलिए उन्होंने CIC में अपील की। अंकित बताते हैं कि CIC ने मेरे हक में फैसला सुनाया और जल्द ही ज्वाइंट इंस्पेक्शन रखने का फैसला का फरमान सुनाया। इसके बाद MCD के अधिकारी हरकत में आए और पेड़ों की सुरक्षा के लिए काम शुरू हो गया।

अंकित अपने किए गए प्रयास पर कहते हैं कि सिर्फ एक RTI का इस्तेमाल करने से ही वे करीबन 2000 पेड़ों को बचाने में कामयाब हुए। अब वे अपने किए जा रहे इस प्रयास में और भी लोगो को साथ जोड़ रहे हैं।
 

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