पानी रे पानी अभियान के अन्तर्गत पानी पंचायत

Submitted by UrbanWater on Wed, 12/16/2020 - 09:08

अविरल नदी, फोटो : needpix.comबिहार की नदियाँ, फोटो : needpix.com

बिहार राज्य में गंगा दशहरा (एक जून 2020) से राज्य के पानी के पारम्परिक स्रोतों को जिन्दा करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए जन अभियान चलाया जा रहा है। गंगा दशहरा के बाद, इस अभियान के अन्तर्गत अनेक कार्यक्रम संचालित हुए हैं। उनमें मुख्य हैं - नदी चेतना यात्रा, पर्यावरण की पाठशाला, नौ अगस्त 2020 (बिहार पृथ्वी दिवस) पर वृक्षारोपण इत्यादि उल्लेखनीय हैं। इन कार्यक्रमों में सम्बन्धित समाज और स्कूली बच्चों के साथ-साथ वन विभाग के अमले ने भी भागीदारी की है। नदी चेतना यात्रा का आगाज एक जून से हुआ। उसे दिशा देने और जनहितैषी बनाने में पद्मश्री अनिल जोशी, बिहार की बाढ़ों पर असाधारण समझ रखने वाले दिनेश मिश्र, जल पुरुष के नाम से विख्यात राजेन्द्र सिंह, मध्यप्रदेश के भूजलविद के. जी. व्यास का योगदान उल्लेखनीय रहा है। इस अभियान में पर्यावरण (खासकर जल, जंगल और जीवन) में विशेष रुचि रखने वाले केन्द्र सरकार के सीनियर प्रशासनिक अधिकारी यथा सी. के. मिश्रा और राजीव रंजन मिश्र तथा बिहार राज्य के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ है। 

पानी रे पानी अभियान के आयोजक पंकज मालवीय और उनकी टीम के सदस्यों यथा प्रीति सिंह यादव, आकृति और जय के प्रयासों से समाज में पानी और जंगल के प्रति चेतना बढ़ी है। अभियान से लोग जुडे हैं। नदी कछार की यात्राओं ने जल प्रवाह और भूजल दोहन के सम्बन्ध को समझने में मदद की है। नदी के उदगम की यात्रा ने जंगल और नदियों के साथ-साथ आजीविका के सम्बन्ध को भी रेखांकित किया है। नदियों में लगातर बढ़ते प्रदूषण को समझा गया है। इन आयोजनों में समय-समय पर बिहार सरकार के सीनियर अधिकारियों, वन विभाग के मैदानी अमले के साथ-साथ स्थानीय समाज तथा नदी चेतना यात्रा के प्रतिभागियों ने खुलकर भागीदारी की है। संयुक्त वन प्रबंध पर वन विभाग के अधिकारियों और प्रतिभागियों से चर्चा में मध्यप्रदेश के वन विभाग के पूर्व मुखिया श्री बी.एम.एस राठौर ने भी भागीदारी की है। उल्लेखनीय है कि बी.एम.एस राठौर की पहचान संयुक्त वन प्रबंध की अवधारणा के जनक के तौर पर पूरे देश में है। इसके अलावा, नदी चेतना यात्रा के प्रतिभागियों को नदी विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से के. जी. व्यास ने अवगत कराया। 

बिहार विधान सभा के हालिया चुनाव के बाद, पानी रे पानी अभियान, नई तैयारी से अपनी पारी प्रारंभ कर रहा है। अभियान की समन्वयक प्रीति यादव के अनुसार 23 दिसम्बर 2020 से 25 दिसम्बर 2020 के बीच वर्चुअल मंच पर पानी पंचायत 2020 कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 2020 में संचालित गतिविधियों की एक कडी है। इसके अन्तर्गत 2020 की गतिविधियों पर दृष्टि डालते हुए आने वाले साल की गतिविधियों की रूपरेखा तय की जावेगी। करोना महामारी के प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार के  के सभी दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा और तीन दिन तक वर्चुअल मंच पर सारी गतिविधियों को संचालित किया जावेगा। 

उल्लेखनीय है कि नदी चेतना यात्राओं ने कछार में भूजल दोहन और नदी के बरसात के बाद के प्रवाह की घटती मात्रा पर अच्छी-खासी समझ विकसित की है। पानी में बढ़ते प्रदूषण के कारणों और जंगल की भूमिका को समझा है। बिहार की धरती के नीचे मौजूद एक्वीफरों पर समझ बनाई है। पानी रे पानी अभियान के लोग उस समझ को और बेहतर वैज्ञानिक आधार प्रदान करने तथा अपनी अगली रणनीति तय करने के लिए संवाद आयोजित कर रहा है। इस संवाद के दौरान बिहार सरकार के अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। 

पानी पंचायत 2020 में दिनांक 24 दिसम्बर 2020 को संकट में है भूजल और नदी का रिश्ता विषय पर विशेषज्ञ पैनल विचार प्रस्तुत करेगा और अपने सुझाव देगा। विशेषज्ञ पैनल के प्रतिभागी हैं - बाढ़ विशेषज्ञ दिनेश मिश्र, भीमराव विश्वविद्यालय लखनऊ के प्रोफेसर वेंकटेश दत्ता, केन्द्रीय भूजल बोर्ड के वी. के. त्रिवेदी, लखनऊ विश्वविद्यालय के विभूति राय, केन्द्रीय भूजल बोर्ड के आर. के सिन्हा, विश्व र्बैंक के सलाहकार के. एस. मणी, सी.डीआर.आई के प्रदीप श्रीवास्तव, वाटर एड के फारुख रहमान और मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व सलाहकार के. जी व्यास। पानी रे पानी इन विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर अपनी रणनीति तय करेगा और नदी चेतना यात्रा को बेहतर बनाने के लिए भरसक प्रयास करेगा। उम्मीद है इस अभियान के अनुभव देश के अन्य इलाकों में नदियों की बेहतरी के लिए काम करने वाले लोगों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। 
 

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