साज-सज्जा ऐसी कि घर दे ठंडक का एहसास

Submitted by Hindi on Thu, 11/11/2010 - 10:10
Source
दैनिक ट्रिब्यून, जून 2010

पिछले कुछ दशकों से हमारे देश के छोटे-बड़े शहरों में विशालाकार, बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो रही हैं। हम प्राय: उन इमारतों को सर्दी के मौसम के लिहाज से फर्निश करते हैं। हममें से कई लोग आजकल जगह की कमी के कारण फ्लैटों में रहते हैं। फ्लैटों में हर बार मौसम के अनुकूल फर्निश करना और घर की बनावट में बदलाव करना सम्भव नहीं होता। इसके बावजूद गर्मी के इन दिनों में हम अपने घरों के इंटीरियर में कई तरह के बदलाव कर सकते हैं। जो लोग अपनी जमीन लेकर अपना घर बनाते हैं उनके सामने मौसम के अनुकूल घर बनाने के ज्यादा विकल्प होते हैं।

यदि हम अपनी जमीन पर अपना घर बनाते हैं तो हमारा प्रयास रहता है कि घर में एक छोटा सा ऐसा स्पेस हो जिसे हम कोर्टयार्ड या आंगन कह सकें। इसके लिए आमतौर पर लोग भले ही कम स्थान निकाल पाएं लेकिन एक फ्रंट लॉन चाहते हैं।

मौसम के अनुकूल घर के लिए दीवारें ऐसी बनाई जानी चाहिए, जिसमें घर के भीतर की ऊर्जा बाहर की ओर जाए। पुराने समय में दीवारें मिट्टी की बनाई जाती थीं। ये बाहर से पत्थर की और अंदर से मिट्टी की बनाई जाती थीं। मिट्टी की दीवारों से घर के भीतर ठंडापन बना रहता था। आजकल भले ही इस तरह की दीवारें बना पाना संभव न हो लेकिन इंसुलेटिड वॉल्स बनानी चाहिए जिसमें दो दीवारों के बीच थोड़ा गैप रखा जाता है। इसमें घर के भीतर का तापमान 3 से 4 डिग्री कम रहता है। इंसुलेटिड वॉल्स उत्तर से आने वाली ऊर्जा के लिए कारगर साबित होती हैं।

दीवारों को रंगने के लिए भी आजकल कई तरह के ऑप्शंस मार्केट में हैं। प्लास्टिक पेंट में चूंकि कई तरह के रसायन होते हैं जिसके कारण अब बड़े नगरों में कुलीन वर्ग के लोग इसे न अपनाकर इसकी बजाय चूने को ज्यादा महत्व देते हैं। चूना पर्यावरणीय दृष्टिï से अनुकूल होता है। गर्मी में यह ठंडक देता है। इसके अलावा इसे हर साल कराना आसान होता है। इसलिए इसका चलन फिर से बढ़ गया है।

सूर्य की तेज रोशनी से घर को बचाने के लिए घर के पश्चिमी भाग को ज्यादा मजबूत बनाना जरूरी है। इन दिनों मरुस्थल से आने वाली हवाएं (वेस्टरलाइज) ज्यादा गर्म होती हैं। जबकि उत्तर में पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाली हवांए ठंडी होती हैं। इसलिए घर के पश्चिमी हिस्से में नीम जैसा ठंडी हवा देने वाला पेड़ लगाना चाहिए।गर्मी के इन खास दिनों में यदि हम अपने फ्लैट में रहते हैं तो अपने उस फ्लैट को हमें मौसम के अनुकूल बनाने के लिए थोड़ा अतिरिक्त प्रयास करना होगा। घर की तेज गर्मी को बाहर करने के लिए और बाहर की प्राकृतिक रोशनी का लाभ उठाने के लिए बांस या सरकंडे की चिक का उपयोग फायदेमंद होता है। चिक को घर की भीतरी खिड़कियों पर लगाने की बजाय हमें घर के बाहर लगाना चाहिए, जिससे तेज धूप, रोशनी और लू से बचा जा सके। पुराने घरों में ढलावदार सन शेड्स यानी छज्जे बनाये जाते थे, जिनसे घर की भीतर ठंडक बनी रहती थी। छोटे फ्लैटों में भी बालकनी के छज्जों से घर में आने वाली धूप और रोशनी कम हो जाती है। बड़े शहरों में छोटे फ्लैटों को ठंडा रखना आसान नहीं होता है। इन फ्लैटों का आर्किटेक्ट इस तरह के बनाया जाना चाहिए कि घर में प्रकाश और हवा की सही व्यवस्था रहे। छोटे फ्लैट में हवा और प्रकाश की आवाजाही के लिए यह जरूरी है कि घर को इस तरह से बनाया जाए कि जिससे यह ज्यादा स्थान वाला लगे।

गर्मी के दिनों में फर्श की साज-सज्जा के लिए बाजार में कई तरह की टाइल्स और स्टोन्स मिलते हैं जिनका इस्तेमाल फर्श के लिए हो सकता है। इसके अलावा बिक्र और सीमेंट टाइल्स भी अच्छे विकल्प हैं। गर्मी के इन खास दिनों में वॉल टू वॉल कारपेट का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। फर्श पर बैठने के लिए फोम के गद्दे न डालें क्योंकि फोम गर्मी के दिनों में गर्म लगते हैं। गर्मियों में ठंडे फर्श पर बैठें। यदि कुछ बिछाना चाहें तो चटाई या दरी बिछा सकते हैं। गर्मियों में सिर्फ और सिर्फ कॉटन की दरी बिछाएं और कॉटन ही पहनें।
 
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