सात खामियाँ दूर है नर्मदा का पानी

Submitted by Hindi on Sun, 03/08/2015 - 16:35
Source
राजस्थान पत्रिका, 03 मार्च 2015
पाँच साल में 800 करोड़ खर्च होने के बाद भी नहीं मिल पा रहा शहर को पानी

पाँच साल में करीब 800 करोड़ रुपए खर्च कर दिए गए, बावजूद नर्मदा का पानी शहर की प्यास नहीं बुझा पा रहा। इसकी वजह है प्रोजेक्ट में खामियाँ और बाधाएँ।

हालत ये हैं कि जहाँ जलापूर्ति नेटवर्क बिछा दिया गया है, वहाँ ओवरहेड टैंक से कनेट्किविटी नहीं है और जहाँ कनेक्टिविटी हो चुकी है, वहाँ ग्रेविटी के अनुसार डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क नहीं बिछाए जाने से पानी आगे नहीं बढ़ पा रहा। कुछ कॉलोनियों में पानी भी पहुँच रहा, तो यहाँ मीटर से बिलिंग नहीं हो पा रही। सबसे अधिक दिक्कत कवर्ड कैम्पस, कॉलोनियों व कॉम्पलेक्स के रहवासियों को हो रही है। उन्हें नगर निगम बल्क कनेक्शन दे रहा है, लेकिन दरें तय नहीं होने से कनेक्शन लेना ही इनकी पहुँच के बाहर है। इस तरह सात खामियाँ ऐसी हैं, जो तत्काल दूर किए जाने की आवश्यकता है।

ये बाधाएँ-खामियाँ दूर हों तो मिले राहत


1. मेन्टेनेन्स
नर्मदा पाइप लाइन के रख-रखाव के लिए निगम के पास न कोई बजट है और न कोई अलग से टीम। इस कारण नियमानुसार मेन्टेनेन्स नहीं हो रहा।

2. रेस्टोरेशन नहीं
नर्मदा लाइन के लिए हो रही खुदाई को रेस्टोर करने के लिए नगर निगम को एजेन्सी तक नहीं मिल पाई है। इसके लिए दरें तीन बार रिवाइज कर प्रति वर्गमीटर 600 रुपए तक पहुँचा दी। स्थिति यह है कि पाइप लाइन खुदाई के बाद कई क्षेत्रों में तो एक माह से गड्ढे नहीं भरे गए।

3. कुशल स्टाफ नहीं
नर्मदा जलापूर्ति के लिए कुशल स्टाफ नहीं है। मौजूदा स्टाफ को भी ट्रेनिंग नहीं दी, ऐसे में परम्परागत तकनीक से ही काम किया जा रहा है, जिससे लाइन खराब होने का खतरा है।

4. अलग-अलग कन्सल्टेन्सी
नगर निगम और पीएचई ने इस प्रोजेक्ट को अलग-अलग मॉनीटिरिंग व कन्सल्टिन्ग से कराया है। फिलहाल प्रोजेक्ट निगम के पास है, लेकिन पीएचई के काम की पूरी जानकारी नगर निगम के पास नहीं है। जो परेशानी का सबब बनी हुई है।

5. टंकियों से कनेक्शन नहीं
नर्मदा का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ओवरहेड टैन्क से अब तक पूरी तरह नहीं जोड़ा जा सकता है। कहीं टंकियाँ बनाने की खामियाँ हैं, तो कहीं नटवर्क की दिक्कत है।

6. बल्क कनेक्शन की दरें
कॉलोनियों, कॉम्पलेक्स में बल्क नेक्शन की दरें लोगों को भ्रमित कर रही है। कॉलोनी के हिसाब से अलग-अलग बिल भेजे जा रहे हैं। कनेक्शन के लिए कहीं दस लाख रुपए तक बिल दिए गए, तो कहीं दो लाख रुपए माँगे जा रहे हैं।

7. मीटर से बिलिंग नहीं
घरेलू नल कनेक्शन की मीटर से बिलिंग कैसे होगी। इसकी रूप-रेखा अब तक तय नहीं है। मीटर से पानी पहुँच रहा है और बिलिंग पुराने तरीके से हो रही है।

नर्मदा से अभी यहाँ वॉटर सप्लाई का दावा
83 किमी लम्बी फीडर मेन लाइन से मिसरोद जोन, करोद, गैस राहत जोन, अयोध्या जोन, आकाशवाणी जोन में पानी पहुँचाया जा रहा। इसमें गैस राहत फीडर से 19 टंकियाँ, अयोध्या फीडर से पाँच टंकियांँ, करोद फीडर से सात टंकियाँ व आकाशवाणी फीडर से श्यामला फिल्टर प्लाण्ट व पुराने भोपाल के कुछ क्षेत्रों को जोड़कर जलापूर्ति की जा रही है।

1. 300 करोड़ रुपए में शाहगंज से भोपाल पहुँची पाइप लाइन
2. 75 किमी लम्बी बिछाई गई पाइप लाइन
3. 415 करोड़ रुपए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर खर्च
4. 700 किमी लम्बा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बिछाया
5. 62 नए ओवरहेड टैंक बनाए गए

हमारे क्षेत्र में नर्मदा लाइन में पानी की मीटरिंग के लिए मीटर लगाए थे, लेकिन फोर्स से उखड़ गए। हमने तो इन्हें निकाल दिया है, अब जब मीटर से बिलिंग होगी, तब देखेंगे। - इरफान अली, ऐशबाग

नर्मदा बड़ा प्रोजेक्ट है, लेकिन इसके जमीनी काम पर ध्यान नहीं दिया। राशि तो खर्च हो गई, लेकिन लोगों को पानी नहीं मिल रहा। इस प्रोजेक्ट की खामियाँ तत्काल दूर की जानी चाहिए। - गिरीश शर्मा, पार्षद

नर्मदा प्रोजेक्ट का काम अभी चल रहा है। खुदाई, मीटर व अन्य खामियाँ सामने आ रही हैं। हम इसकी दिक्कत दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। - संजय कुमार, अपर आयुक्त

नर्मदा का पानी हर घर तक पहुँचाने का हमारा संकल्प है। जो खामियाँ होंगी, उन्हें दूर करेंगे, कोई भी नर्मदा के पानी से वंचित नहीं रहेगा। - आलोक शर्मा, महापौर

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