श्री श्री से आगे जहाँ और भी हैं

Submitted by RuralWater on Thu, 03/10/2016 - 13:45

जब पानी को लेकर सारे देश में कोहराम की स्थिती बनती जा रही है जबकि गर्मियों ने अभी तक अपना रंग नहीं दिखाया है तब सिर्फ नीतिगत मंथन कितना सार्थक होगा। पर्यावरणविदों से लेकर सरकार के नुमाइन्दों तक ने पानी पर गहराते संकट से आँखें मूँद रखी हैं। सभी का ध्यान इसी पर है कि श्री श्री यमुना के पर्यावरण से क्यों खेल रहे हैं। कितनों को यह पता है कि सरकारी कागजों में यमुना मरी हुई नदी घोषित है। सरकारी कागजों में साफ दर्ज है कि यमुना नदी नहीं है। लेकिन हल्ला बदस्तूर जारी है, मंथन भी जारी है और श्री श्री का सांस्कृतिक महोत्सव भी जारी है।

पिछले पखवाड़े पानी को लेकर हंगामा बरपा रहा लेकिन सरकार जल मंथन में व्यस्त थी। कुछ घटनाओं पर नजर डालिए, जाट आन्दोलन ने पूरे प्रशासन को पंगु बना दिया और मुनक नहर पर कब्जा कर लिया जिससे दिल्ली में पानी का भारी संकट पैदा हो गया। दिल्ली सरकार आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट पहुँची और गुजारिश की बीजेपी शासित हरियाणा को कहा जाये कि उनके हिस्से का पानी ना रोके।

कोर्ट ने हरियाणा को निर्देश तो दिया साथ ही केजरीवाल सरकार को भी झाड़ लगाई कि वह बिना प्रशासनिक कोशिश किये हर मुद्दे पर कोर्ट में चली आती है। अब अपनी यमुना को गन्दे नाले में बदल देने वाले शहर दिल्ली को पानी के लिये हरियाणा की तरफ ही देखना पड़ता है। हालांकि पूर्वी दिल्ली के कुछ इलाके गंगा नहर से अपनी जरूरतें पूरी करते हैं।

इस तस्वीर में भविष्य के लिये एक चेतावनी भी छुपी है वैसे ही जैसे एक दशक पहले पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के विचार पर बना एक पॉवर पाइंट प्रजेंटेशन काफी चर्चित हुआ था। इसमें ग्राफिक स्लाइड के माध्यम से बताया गया था कि आने वाली पीढ़ी इस बात पर आश्चर्य करेगी कि लोग शॉवर से नहाते थे और हमारे पूर्वजों में से कई अपनी गाड़ियों को पाइप लगाकर धोया करते थे।

पूर्व राष्ट्रपति ने आशंका जताई थी कि आने वाली सदी में बची-खुची नदियों को कटीले तारों से बाड़ बनाकर घेरा जाएगा और उनकी पानी की सुरक्षा के लिये सेना तैनात की जाएगी।

इस तस्वीर के इतर राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में जल के सरकारी जानकार जमा थे। इस दूसरे जल मंथन का विषय था स्थायी जल प्रबन्धन के लिये एकीकृत दृष्टिकोण। लेकिन उमा भारती का पूरा भाषण प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना पर केन्द्रीत था कुछ समय के लिये लगा जल मंथन का उद्देश्य सिंचाई योजनाओं को लागू करना है ना कि जल के संग्रहण की नीतियों को कार्यरूप देना।

उमा भारती ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अन्तर्गत ली गई 46 योजनाओं को समयसीमा में पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि 23 योजनाओं को अगले साल तक पूरा भी कर लिया जाएगा। बाकी योजनाओं के लिये भी समयसीमा 2020 तक रखी गई है। उमा ने जोर दिया कि मंथन के दौरान सिंचाई योजनाओं और नदी जोड़ो योजना पर ही ज्यादा बात की जाये। सरकार ने राज्यों के प्रतिनिधियों से इन परियोजनाओं को सफल बनाने की अपील की।

जल संसाधन को भरोसा है कि तापी मेगा रिचार्ज योजना का पूरा होना दुनिया की अनूठी घटना होगी। तापी मेगा रिचार्ज योजना मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच बन रही है। भारती ने बड़े जलाशयों और बाँधों के आसपास पर्यटन विकास पर जोर देते हुए इन बाँधों से विस्‍थापित हुए लोगों को रोजगार के बेहतर अवसर पैदा करने की उम्मीद जताई । हालांकि अतीत में भी ऐसे प्रयास बयानवीर से ज्यादा कुछ भी साबित नहीं हुए ।

घोषित रूप से जल मंथन में सतत विकास के लिये नदी घाटी दृष्टिकोण, भूजल, जल सुरक्षा, जल आवंटन के सिद्धान्तों, जल प्रशासन में नवाचार, जल प्रबन्धन, केन्द्र एवं राज्यों के बीच समन्वय, जल संरक्षण और जल पर एक राष्ट्रीय कानून की आवश्यकता जैसे विषयों पर चर्चा होनी थी लेकिन यह मोटे तौर प्रधानमंत्री की सिंचाई योजना पर ही सीमित होकर रह गई।

जब पानी को लेकर सारे देश में कोहराम की स्थिती बनती जा रही है जबकि गर्मियों ने अभी तक अपना रंग नहीं दिखाया है तब सिर्फ नीतिगत मंथन कितना सार्थक होगा। पर्यावरणविदों से लेकर सरकार के नुमाइन्दों तक ने पानी पर गहराते संकट से आँखें मूँद रखी हैं। सभी का ध्यान इसी पर है कि श्री श्री यमुना के पर्यावरण से क्यों खेल रहे हैं। कितनों को यह पता है कि सरकारी कागजों में यमुना मरी हुई नदी घोषित है। सरकारी कागजों में साफ दर्ज है कि यमुना नदी नहीं है। लेकिन हल्ला बदस्तूर जारी है, मंथन भी जारी है और श्री श्री का सांस्कृतिक महोत्सव भी जारी है।

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