मनरेगाः यूपी की 19 नदियों का पुनरुद्धार करेंगे प्रवासी मजदूर

Submitted by HindiWater on Tue, 06/09/2020 - 14:56

प्रतीकात्मक फोटो - Irrigation and Water Resources Department, UP

लाॅकडाउन के दौरान देश कई समस्याओं से जूझ रहा था, लेकिन सबसे बड़ी समस्या तब शुरु हुई, जब देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों की संख्या में मजदूर अपने गांव की तरफ लौटने लगे। रोजगार चले जाने के बाद पेट की भूख ने उन्हें मीलों पैदल चलने के लिए मजबूर कर दिया। सरकार की तरफ से भी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्था की गई थी, लेकिन असली चुनौती तो रोजगार था, जो फिलहाल मजूदरों के पास है नहीं। ऐसे में मजदूरों की मदद करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से काफी सराहनीय फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश में नदी पुनरुद्धार योजना के अंतर्गत प्रवासी मजदूरों के माध्यम से राज्य की 19 छोटी नदियों को पुनरुद्धार किया जाएगा।

लाॅकडाउन के दौरान देश में सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश में ही लौटे हैं। सरकार मजदूरों को अपने स्तर रोजगार देने के लिए विभिन्न कार्य कर रही है। कई स्थानों पर मनरेगा के तहत मजदूरों को काम दिया जा रहा है, लेकिन मजदूरों की संख्या ज्यादा होने से रोजगार की समस्या अभी भी बनी हुई है। इसलिए सरकार ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए मजूदरों के श्रम को जल संरक्षण के दिशा में लगाने का निर्णय लिया है। पत्रिका में छपी खबर के मुताबिक प्रदेश की 19 नदियां - सई, पांडु, मंदाकिनी, टेढ़ी, मनोरमा नदी, वरुणा नदी, ससुर खदेरी, अरिल, मोरवा, तमसा, नाद, कर्णावती, बान, सोन, काली पूर्वी, डाढ़ी, ईशन, बूढ़ी गंगा तथा गोमती नदियों का पुनरुद्धार करने का फैसला सरकार ने लिया है। 

खबर के अनुसार बेहतर समन्वय के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि प्रमुख सचिव पंचायतीराज, प्रमुख सचिव सिंचाई, प्रमुख सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण पेयजल एवं आपूर्ति, प्रमुख सचिव वन विभाग तथा आयुक्त ग्राम्य विकास विभाग इसके सदस्य होंगे। मनरेगा ग्रामीण विकास के अपर आयुक्त इसके सदस्य सचिव होंगे। 

पुनरुद्धार कार्य को अलग-अलग चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण में सई, मंदाकिनी और पांडु नदी को चयनित कर काम शुरु किया जा चुका है। पत्रिका की खबर के मुताबिक गंगा की सहायक ‘वरुणा नदी’ मनरेगा से खुदाई का कार्य चल रहा है। ये प्रोजेक्ट करीब सवा तीन करोड़ का है, जिसमें से एक करोड़ से ज्यादा का काम हो चुका है। खुदाई के इस पूरे कार्य से हजारों प्रवासी मजदूरों को रोजगार मिल रहा है। आउटलुक की खबर के अनुसार ‘‘नदियों के पुनरुद्धार कार्य के लिए मनरेगा के तहत मजदूर सिल्ट निकालने और चैकडेम साफ करने जैसे आदि कार्य करेंगे।’’


हिमांशु भट्ट (8057170025)

 

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