यमुना में पानी छोड़ने पर विवश सरकार

Submitted by Hindi on Fri, 04/22/2011 - 12:01
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मान मंदिर सेवा संस्थान द्रस्ट
यमुना की सफाई और पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग को लेकर पिछले 7 दिनों से जंतर-मंतर पर बैठे साधु-संतों व किसानों का अनशन समाप्त हो गया।
यमुना नदी की सफाई और उसमें पर्याप्त पानी छोड़ने की मांग को लेकर पिछले सात दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठे देश भर से आए साधु-संतों व किसानों का अनशन आखिरकार रंग लाया। सरकार यमुना में हथिनीकुंड (ताजेवाला) बैराज व वजीराबाद बैराज से क्रमशः 4.5 क्यूसेक और 4 क्यूसेक पानी छोड़ने पर राजी हो गई है। साथ ही यमुना में न्यूनतम पानी का प्रवाह लगातार बना रहे इसके लिए एक आठ सदस्यीय समिति गठित की गई है।

जिसमें सरकार के पांच प्रतिनिधियों के साथ यमुना बचाओ आंदोलन के तीन सदस्य शामिल होंगे। इसका फैसला केंद्र सरकार के जल मामलों के मंत्रिसमूह की बैठक में गुरुवार को लिया गया। जिसका सर्कुलर जल संसाधन मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को जारी किया गया। इसी के साथ सात दिनों से चला आ रहा साधु-संतों व किसानों का आमरण अनशन खत्म हो गया। लेकिन इन लोगों ने अपना धरना तब तक जारी रखने का ऐलान किया है जब तक कि यमुना में दिल्ली से आगे वृदांवन-मथुरा तक जल का प्रवाह होता न दिखाई दे।

गुरुवार को केंदीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम की अध्यक्षता में मंत्रिसमूह की बैठक में यमुना में जल धारा छोड़ने और उस पर निगरानी रखने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला लिया गया। इस समिति में केंद्रीय जल आयोग के सीनियर चीफ इंजीनियर, हरियाणा व दिल्ली सरकार के एक-एक प्रतिनिधि, पर्यावरण व वन मंत्रालय व योजना आयोग के एक-एक प्रतिनिधि के अलावा यमुना बचाओ आंदोलन के भी तीन प्रतिनिधि होंगे। इस फैसले के सर्कुलर की प्रति लेकर शाम साढ़े पांच बजे केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री प्रदीप जैन अनशनकारियों के पास जंतर-मंतर पहुंचे और अनशनकारियों को जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया।

आंदोलन के संरक्षक जयकृष्ण ने कहा कि अभी केवल अनशन तोड़ा गया है, जब तक यमुना में स्वच्छ जल का प्रवाह होना शुरू नहीं हो जाता है तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। किसान नेता भानुप्रताप सिंह ने कहा कि उन्हें जब मथुरा से फोन आ जाएगा कि यमुना में पानी आ गया, तभी दिल्ली से कूच करेंगे। एक एनआरआई आंदोलनकारी राधाजीवन पार ने कहा कि सरकार को सिगरेट व शराब की तरह यमुना के घाटों पर भी चेतावनी के बोर्ड लगाने चाहिए कि इसमें स्नान करना व आचमन करना आपकी सेहत के लिए खतरनाक है। उन पर वास्तविक हालत बताई जाए कि यमुना में यमुनोत्री का नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली आदि का मल-मूत्र व औद्योगिक कचरा आ रहा है।

आज 22 अप्रैल को, यमुना बचाओ आन्दोलन के समर्थन में हजारों की संख्या में नेता, दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से छात्र, डॉक्टर, गैर सरकारी संस्थाएं, उद्योगी, सनातन-धर्म अनुयायी, वैष्णव, दिल्ली के निवासियों आदि द्वारा पटेल चौक से शुरू होकर एक रैली निकालने की सम्भावना है।

इसके अलावा आज ही मुख्य रूप से मेरठ विश्वविद्यालय से, बड़ौत एवं बागपत, उत्तर प्रदेश के लगभग 25-30 युवा उप-जिलाधीश के कार्यालय के सामने विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं| यह प्रदर्शन यमुना वॉटरकीपर मीनाक्षी अरोड़ा (प्रबंध निदेशिका वॉटर कम्युनिटी इंडिया और ट्रस्ट फॉर रिसर्च ऑन अर्थ एण्ड ऐन्वायरमेंट(ट्री) के नेतृत्व में किया जा रहा है। वहाँ पर विरोध-प्रदर्शन के बाद वह भीड़ यमुना को बचाने की न्याय संगत सेवा हितार्थ जंतर-मंतर पर नई दिल्ली पहुंचेगी|

युवाओं का कहना है कि यमुना जी के दूषित जल के कारण वहां के लोग बीमार पड़ रहे हैं| वह युवा आमरण-अनशन में भी तब तक शामिल होना चाहते हैं जब तक कि सरकार यमुना जी के पुनरुज्जीवन की मांग की पूर्ति के लिए कोई निश्चित निर्णय नहीं ले लेती| कल ही युवाओं की इस योजना को जानकर यूपीसीपीसीबी की एक टीम ने बड़ौत के पानी की जाँच करने के लिए सैम्पल लैब में भेज दिए हैं और अधिकारियों का कहना है कि जाँच रिपोर्ट 7-8 दिन में स्थानीय निवासियों को दे दी जाएगी।

श्रीमती रमा राउता (गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की सदस्या) भी अनशन-स्थल पर आईं व अपना समर्थन दिया| श्रीमती मीनाक्षी अरोड़ा प्रारंभ से ही यमुना बचाने की इस मुहिम में अपना पुरजोर समर्थन दे रहीं हैं। उन्होंने कहा, “जब तक जनता अपने अधिकारों को खुद नहीं जानेगी अपने जल स्रोतों को अपना नहीं मानेगी तब तक पानी की जगह मल-मूत्र पीती रहेगी। यमुना हमारी माँ है और माँ की पवित्रता को बनाए रखने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगें।”

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