काला सोना

मैत्री सर्व सेवा समिति, ग्राम पंचायत, वेस्ट (WASTE) और किसानों ने वर्ष 2008 में, नागासांद्रा गांव में, 9 यूडीडीटी टॉयलेट बनाए। 1 सितम्बर 2009 को पहला कम्पोस्टिंग चैम्बर किसानों और नेताओं की उपस्थिति में खोला गया।

अपशिष्ट में कोई बदबू नहीं थी और वह पूरी तरह खाद बन चुका था। जिसको लोगों ने नाम दिया 'काला सोना', इसको पेथोजीन और पोषक तत्वों की जांच के लिए भी लिया गया। इसी गांव में अर्घ्यम् और जीकेवीके एक खेत में अपशिष्ट से बनाई गई खाद और मूत्र प्रयोग कर रहे हैं। जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

उत्पादक सेनिटेशन को अगर ठीक से लागू किया जाए तो यह बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।

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