कानपुर की CSJM यूनिवर्सिटी से अब पर्यावरण में कीजिए Ph.D.
उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) ने शोध के लिए प्रवेश द्वार खोल दिये हैं। उच्च शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में निरंतर नए आयाम स्थापित कर रहा छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर ने अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लिया है।
CSJMU के पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा 25 साल बाद पर्यावरण विज्ञान विषय में Ph.D. के लिए प्रवेश प्रारंभ किया जा रहा है। इसे उत्तर प्रदेश में पर्यावरणीय शिक्षा व शोध को अकादमिक उत्कृष्टता तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक के अनुसार, वर्ष 2001 में स्थापित सीएसजेएमयू का पर्यावरण विज्ञान विभाग स्थापना के बाद से निरंतर प्रगति कर रहा है और Ph.D इस दिशा में एक बड़ा कदम है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनिंदा संस्थानों में ही यह सुविधा उपलब्ध है।
किन विषयों पर कर सकेंगे रिसर्च
इस कार्यक्रम के अंतर्गत शोधार्थियों को जलवायु परिवर्तन एवं उसके प्रभाव, वायु एवं जल प्रदूषण नियंत्रण, पर्यावरणीय जैव प्रौद्योगिकी, जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन एवं पुनर्चक्रण, पर्यावरणीय स्वास्थ्य, जल संरक्षण एवं जल गुणवत्ता अध्ययन, सतत विकास एवं हरित प्रौद्योगिकी तथा पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अनुसंधान करने का अवसर मिलेगा। पर्यावरण विज्ञान में Ph.D. कार्यक्रम शुरू होने से छात्र-छात्राओं व शोधार्थियों को पर्यावरणीय चुनौतियों के वैज्ञानिक अध्ययन तथा उनके नवीन समाधान विकसित करने का अवसर प्राप्त होगा। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप बहुविषयक एवं नवाचार-आधारित शोध को प्रोत्साहित करेगा।
पर्यावरण विज्ञान में Ph.D. कार्यक्रम शुरू करने के पीछे विभाग का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में पर्यावरणीय समस्याओं की वैज्ञानिक समझ विकसित करना तथा उनके समाधान हेतु शोध-आधारित दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना है। पिछले दो दशकों में विभाग ने वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं सतत विकास जैसे विषयों पर अनेक अकादमिक एवं शोध गतिविधियों को सफलतापूर्वक संचालित किया है।
कहां होंगी रोजगार और करियर संभावनाएं
Ph.D. उपाधि प्राप्त शोधार्थियों के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों में सहायक आचार्य, वैज्ञानिक एवं शोध मार्गदर्शक, पर्यावरण मंत्रालय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वन विभाग, जल संसाधन विभाग सहित विभिन्न सरकारी एजेंसियों में विशेषज्ञ, उद्योग एवं कॉर्पोरेट क्षेत्र में पर्यावरणीय अनुपालन विशेषज्ञ तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शोध एवं परामर्शदाता के रूप में व्यापक रोजगार एवं करियर अवसर उपलब्ध हैं, इसके अतिरिक्त पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, सामुदायिक विकास एवं जैव विविधता संरक्षण से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं प्राप्त की जा सकती हैं"।
कितनी सीटें, किसको मिलेगा दाखिला
विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान विषय में कुल 12 सीटों पर Ph.D. प्रवेश किया जाएगा। संबंधित विषय में पोस्ट-ग्रेजुएशन (स्नातकोत्तर) डिग्री न्यूनतम 55% अंकों के साथ उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इसमें स्नातकोत्तर स्तर पर पर्यावरण विज्ञान के अलावा अन्य विषयों की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवार भी आवेदन कर सकेंगे। Ph.D. में दाखिला प्रवेश परीक्षा के जरिये दिया जाएगा। विभिन्न बहुआयामी विषयों के शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं ने भी पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य करने हेतु अपनी रुचि व्यक्त की है। यह कार्यक्रम अंतर्विषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है। साइट पर उपलब्ध ब्रोशर में प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता, शुल्क और प्रवेश परीक्षा के बारे में विस्तार से बताया गया है।
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