द्रोणी

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द्रोणी अथवा बेसिन (Basin) शब्द का प्रयोग कई सामान्य तथा विशेष अर्थों में होता है। साधारणत: किसी भी ऐसे क्षेत्र को जो तश्तरी के आकार का हो, अर्थात्‌ जिसके चारों ओर उच्च स्थल हों, जो क्रमश: मध्य की ओर नीचा होता जाए तथा जिसका मध्यभाग प्राय: सपाट हो, उसे द्रोणी कहते हैं। प्राकृतिक भूगोल में द्रोणी उस क्षेत्र को कहते हैं जो किसी विशेष नदीप्रणाली के अंतर्गत आता हो अर्थात्‌ एक प्रधान नदी एवं उसकी विभिन्न सहायक नदियाँ जिस क्षेत्र से अपना जल इकट्ठा करती हैं वह द्रोणी है। भौमिकी (Geology) में द्रोणी की संज्ञा उस क्षेत्र को दी जाती है जिसकी भूसंरचना (Structure) इस प्रकार हो कि मध्य भाग में चट्टानें नतोदर तथा चारों ओर उन्नतोदर हों। इस पकार द्रोणी गुंबदाकार धरातल का विलोम स्वरूप है। लंदन बेसिन, पेरिस बेसिन आदि सुविख्यात द्रोणियाँ इसी प्रकार की हैं। कभी कभी द्रोणी के मध्य भाग में झीलें भी पाई जाती हैं। झील द्रोणी ज्वालामुखी शंकु के धराशायी होने से भी बनती हैं।(जगदीश सिंह)

अन्य स्रोतों से:

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बाहरी कड़ियाँ:


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विकिपीडिया से (Meaning from Wikipedia):

संदर्भ:


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