जलाशय क्या होता है ? परिभाषा, अर्थ और जलाशय के प्रकार (Reservoir Definition in Hindi)

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जलाशय क्या होता है ? परिभाषा, अर्थ और जलाशय के प्रकार (Reservoir Definition in Hindi)

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रेज़रवॉयर (Reservoir) का हिंदी अर्थ है जलाशय या पानी को जमा करके रखने का स्थान। यह प्राकृतिक भी हो सकता है और कृत्रिम भी। सरल शब्दों में, जब किसी जगह पर पानी को लंबे समय तक उपयोग के लिए संचित किया जाता है, तो उसे रेज़रवॉयर कहा जाता है। यह जल प्रबंधन (water management) की एक महत्वपूर्ण संरचना है, जो सिंचाई, पेयजल, बिजली उत्पादन और बाढ़ नियंत्रण में अहम भूमिका निभाती है।

जलाशय परिभाषा (Reservoir Definition in Hindi)

जलाशय वह जल भंडारण प्रणाली है, जिसमें वर्षा, नदियों या अन्य स्रोतों से पानी एकत्रित कर भविष्य में उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जाता है।

जलाशय के प्रकार (Types)

जलाशय  मुख्यतः दो प्रकार के होते है -

  • प्राकृतिक रेज़रवॉयर (Natural Reservoir) -  झीलें, तालाब, आर्द्रभूमि (wetlands)। उदाहरण: कश्मीर की डल झील

  • कृत्रिम रेज़रवॉयर (Artificial Reservoir) - बांध (dam) बनाकर तैयार किए जाते हैं। उदाहरण: भाखड़ा नांगल बांध का जलाशय

जलाशय जल संसाधनों के संतुलित उपयोग में महत्वपूर्ण होते हैं। इसका मुख्य उपयोग बारिश के पानी को संग्रहित करके सूखे समय में उपयोग करने में होता है। नदियों के जल प्रवाह को नियंत्रित करना और भूजल स्तर (groundwater recharge) को बनाए रखना है।

भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में जलाशय का उपयोग बहुत महत्वपूर्ण है। ये सिंचाई के लिए लगातार पानी उपलब्ध कराते है। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती को संभव बनाते है। फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा में योगदान।

इसका मुख्य उदाहरण राजस्थान में छोटे-छोटे जलाशय (तालाब) खेती को सहारा देते है। कर्नाटक में टैंक सिस्टम (tank irrigation) ग्रामीण जल प्रबंधन का आधार है।

बदलते जलवायु पैटर्न के कारण वर्षा अनियमित हो रही है। ऐसे में जलाशय का महत्व और बढ़ जाता है- 

  • बाढ़ (flood) के समय अतिरिक्त पानी को रोकते है

  • सूखे (drought) के समय पानी उपलब्ध कराते है

  • जल सुरक्षा (water security) सुनिश्चित करते है

नगरों में जलवितरण के लिये भी जलाशय बनाए जाते हैं। ऐसे जलाशयों में पानी ऊँचाई पर संचित किया जाता है, जिससे वितरण नलियों में पानी सुचारु रूप से पहुँच सके। इस किस्म के जलाशय कंक्रीट, इस्पात आदि के बने होते हैं। इनमें आवश्यक मात्रा में जल संचित किया जाता है, जिससे सामान्य रूप से जल उपलब्ध हो सके। वैसे बहुतेरी जगहों में संतुलन जलाशय भी बनाए जाते है, जिससे जलवितरण में सुविधा हो सके और वितरणक्षेत्रों में पानी का दबाव समान रहे।

जलाशय के उपयोग

  • पेयजल आपूर्ति - शहरों और गांवों के लिए

  • सिंचाई- खेतों में पानी पहुंचाने के लिए

  • जल विद्युत उत्पादन (Hydropower)

  • मत्स्य पालन (Fisheries)

  • पर्यटन और आजीविका

  • पर्यावरणीय प्रभाव

जलाशय के कुछ सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव भी होते है -

  • सकारात्मक - जल संरक्षण, हरित क्षेत्र (green cover) में वृद्धि, स्थानीय जलवायु में सुधार

  • नकारात्मक - विस्थापन (displacement) की समस्या, नदी पारिस्थितिकी (river ecology) पर प्रभाव, गाद (siltation) भरने से क्षमता कम होना

भारत के सन्दर्भ में , भाखड़ा नांगल रेज़रवॉयर (हिमाचल प्रदेश/पंजाब), हिराकुंड बांध (ओडिशा), नागार्जुन सागर (तेलंगाना/आंध्र प्रदेश) इसका उदहारण है।

जलाशय जल संसाधनों के प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण आधार है। यह न केवल पानी को संग्रहित करते है, बल्कि कृषि, ऊर्जा, और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते है। सही योजना और प्रबंधन के साथ, जलाशय भारत में जल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का प्रभावी समाधान बन सकते है।

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