भू-क्षरण
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डिग्रेडेशन (Degradation) क्या है? अर्थ, परिभाषा और पर्यावरण में महत्व
डिग्रेडेशन (Degradation) का सामान्य अर्थ है किसी चीज़ की गुणवत्ता, क्षमता या संरचना में धीरे-धीरे गिरावट आना। यह शब्द खास तौर पर पर्यावरण, जल संसाधन और कृषि के संदर्भ में बहुत महत्वपूर्ण है। जब प्राकृतिक संसाधन अपनी मूल गुणवत्ता खोने लगते हैं, तो उसे डिग्रेडेशन कहा जाता है।
Degradation (Meaning in Hindi) का सीधा अर्थ निम्नीकरण अथवा क्षरण होता है, यानि भौतिक, रासायनिक या जैविक प्रक्रियाओं द्वारा जटिल पदार्थों का सकरलतर पदार्थों में परिवर्तित होना। यह Aggradation की उलट स्थिति है। इसमें तलछट या नदी के कणों का कटाव होता है और बहाव तल सामान्य तल से नीचे हो जाता है। विशेष रूप से नदी में कम तलछट रहने पर Degradation होता है।
डिग्रेडेशन की परिभाषा
डिग्रेडेशन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी प्राकृतिक संसाधन जैसे भूमि, जल या पारिस्थितिकी तंत्र की गुणवत्ता, उत्पादकता या कार्यक्षमता समय के साथ कम हो जाती है। यह प्रक्रिया प्राकृतिक कारणों या मानव गतिविधियों के कारण हो सकती है।
पर्यावरण और जल क्षेत्र में डिग्रेडेशन
पर्यावरण के संदर्भ में डिग्रेडेशन मुख्य रूप से निम्न प्रकार से दिखाई देता है -
भूमि क्षरण (Land Degradation): अत्यधिक खेती, रासायनिक उर्वरकों का उपयोग या वनों की कटाई के कारण मिट्टी की उर्वरता घट जाती है, तो भूमि क्षरण होता है।
जल डिग्रेडेशन (Water Degradation): जब जल स्रोत प्रदूषित हो जाते है, जैसे नदियों में औद्योगिक कचरा या सीवेज का मिलना, जल डीग्रेडेशन कहलाता है।
जैव विविधता में कमी: इसमें पौधों और जानवरों की प्रजातियां कम होने लगती है।
उदाहरण के रूप में देखें तो भारत की कई नदियाँ जैसे गंगा और यमुना प्रदूषण के कारण जल गुणवत्ता में गिरावट का सामना कर रही है।
कृषि क्षेत्र में डिग्रेडेशन
कृषि में डिग्रेडेशन का सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है - जिसमें मिट्टी की गुणवत्ता खराब होने से फसल उत्पादन कम हो जाता है। भूजल स्तर गिरने से सिंचाई की समस्या बढ़ जाती है। रासायनिक खेती से मिट्टी की संरचना कमजोर हो जाती है।
बात अगर भारत की करें तो राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों में भूमि क्षरण एक बड़ी समस्या है, जहां सूखा और अत्यधिक चराई (overgrazing) से जमीन बंजर होती जा रही है।
डिग्रेडेशन के प्रकार
डिग्रेडेशन को कई प्रकारों में बांटा जा सकता है -
भौतिक डिग्रेडेशन – मिट्टी का कटाव (erosion), संरचना का टूटना ।
रासायनिक डिग्रेडेशन – मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी या लवणता बढ़ना।
जैविक डिग्रेडेशन – जैविक पदार्थ (organic matter) की कमी।
डीग्रेडेशन के प्रभाव
संयुक्त राष्ट्र (UN) और FAO की रिपोर्ट्स के अनुसार, दुनिया की लगभग 33% भूमि डिग्रेडेशन से प्रभावित है। भारत में भी बड़ी मात्रा में कृषि भूमि मिट्टी के कटाव और जल की कमी के कारण प्रभावित हो रही है। डिग्रेडेशन का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन पर भी गहरा असर डालता है।
खाद्य सुरक्षा पर खतरा
जल संकट में वृद्धि
किसानों की आय में कमी
जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा
समाधान और उपयोगिता
डिग्रेडेशन को रोकने के लिए कई उपाय अपनाए जा सकते है -
सतत कृषि (Sustainable Agriculture) को बढ़ावा देना
वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting)
जैविक खेती (Organic Farming)
वनीकरण (Afforestation)
सरकार और विभिन्न संगठनों द्वारा भूमि क्षरण न्यूनीकरण (Land Degradation Neutrality) जैसे कार्यक्रम भी चलाए जा रहे है। डिग्रेडेशन एक गंभीर समस्या है, जिसे समझना और रोकना बेहद जरूरी है, ताकि हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रख सकें।
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