वर्षामापी (Rain Gauge or Pluviometer) क्या है? अर्थ, परिभाषा और महत्व

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वर्षामापी (Rain Gauge or Pluviometer) क्या है? अर्थ, परिभाषा और महत्व

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वर्षामापी (Rain Gauge) एक वैज्ञानिक उपकरण है जिसका उपयोग किसी स्थान पर एक निश्चित समयावधि में हुई वर्षा की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है। इसे प्लुवियोमीटर (Pluviometer) भी कहा जाता है।

सरल शब्दों में, वर्षामापी वह यंत्र है जो बताता है कि किसी क्षेत्र में कितनी वर्षा हुई है। वर्षा की मात्रा सामान्यतः मिलीमीटर (mm) या सेंटीमीटर (cm) में मापी जाती है।

वर्षामापी की परिभाषा

वर्षामापी एक मौसम विज्ञान उपकरण है जिसका उपयोग वर्षा, बूंदाबांदी या अन्य तरल वर्षण के रूप में पृथ्वी की सतह पर गिरने वाले जल की मात्रा को मापने के लिए किया जाता है।

वर्षामापी का इतिहास

वर्षा मापन की परंपरा प्राचीन सभ्यताओं से जुड़ी है। भारत, चीन और कोरिया में सदियों पहले वर्षा के रिकॉर्ड रखे जाते थे। आधुनिक वर्षामापी का विकास 17वीं शताब्दी में हुआ और आज यह मौसम विज्ञान तथा जल विज्ञान का एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है।

वर्षामापी की संरचना

एक सामान्य वर्षामापी में निम्न भाग होते हैं -

  • वर्षा संग्रहण फनल (Funnel)

  • संग्रहण पात्र (Collecting Container)

  • मापक सिलेंडर (Measuring Cylinder)

  • मापांकित स्केल (Graduated Scale)

वर्षा का जल फनल के माध्यम से पात्र में एकत्रित होता है और बाद में उसकी मात्रा मापी जाती है।

वर्षामापी की कार्यप्रणाली

वर्षामापी निम्न चरणों में कार्य करता है -

  1. वर्षा का जल फनल में गिरता है।

  2. जल संग्रहण पात्र में एकत्रित होता है।

  3. एकत्रित जल को मापक सिलेंडर में डाला जाता है।

  4. स्केल की सहायता से वर्षा की मात्रा मापी जाती है।

  5. परिणाम मिलीमीटर या सेंटीमीटर में दर्ज किए जाते हैं।

वर्षामापी के प्रमुख प्रकार

  • साधारण वर्षामापी (Standard Rain Gauge) - यह सबसे सामान्य प्रकार का वर्षामापी है जिसमें वर्षा जल को एक पात्र में एकत्रित कर मापा जाता है।

  • टिपिंग बकेट वर्षामापी (Tipping Bucket Rain Gauge) - इसमें दो छोटे पात्र होते हैं। एक निश्चित मात्रा भरने पर पात्र झुक जाता है और वर्षा की मात्रा स्वतः रिकॉर्ड हो जाती है।

  • भार आधारित वर्षामापी (Weighing Rain Gauge) - यह एकत्रित वर्षा जल के भार के आधार पर वर्षा की मात्रा मापता है।

  • स्वचालित वर्षामापी (Automatic Rain Gauge) - यह डिजिटल तकनीक से वर्षा का डेटा स्वतः रिकॉर्ड और प्रसारित करता है।

वर्षामापी का महत्व

  • मौसम पूर्वानुमान - वर्षा के आंकड़ों के आधार पर मौसम की भविष्यवाणी की जाती है।

  • कृषि प्रबंधन - किसानों को सिंचाई, बुवाई और फसल प्रबंधन में सहायता मिलती है।

  • जल संसाधन प्रबंधन - जलाशयों, नदियों और भूजल के प्रबंधन में वर्षा डेटा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • बाढ़ और सूखा प्रबंधन - अत्यधिक या कम वर्षा की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलती है।

  • जलवायु अध्ययन - दीर्घकालिक वर्षा रिकॉर्ड जलवायु परिवर्तन के अध्ययन में उपयोगी होते हैं।

वर्षामापी के उपयोग

  • मौसम विज्ञान केंद्रों में

  • कृषि अनुसंधान में

  • जल संसाधन योजना में

  • बाढ़ पूर्वानुमान में

  • जलवायु परिवर्तन अध्ययन में

  • बांध और जलाशय प्रबंधन में

वर्षा मापन की इकाई

वर्षा की मात्रा सामान्यतः मिलीमीटर (mm) में व्यक्त की जाती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी क्षेत्र में 50 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, तो इसका अर्थ है कि समतल सतह पर 50 मिमी ऊंचाई तक जल जमा हो सकता है।

भारत में वर्षामापी का उपयोग

भारत में वर्षामापी का व्यापक उपयोग मौसम विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों, जल संसाधन विभागों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा किया जाता है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) देशभर में हजारों वर्षामापी केंद्रों के माध्यम से वर्षा का रिकॉर्ड रखता है।

वर्षामापी और जलवायु परिवर्तन

जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा के स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। कहीं अत्यधिक वर्षा तो कहीं लंबे सूखे की स्थिति देखने को मिल रही है। ऐसे में वर्षामापी द्वारा प्राप्त आंकड़े जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने और अनुकूलन रणनीतियां बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वर्षामापी मौसम विज्ञान और जल संसाधन प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह वर्षा की मात्रा को मापकर कृषि, जल प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान देता है। बदलती जलवायु परिस्थितियों में वर्षामापी से प्राप्त सटीक आंकड़े सतत विकास और जल सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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